West Bengal Panchayat Election: पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए शनिवार (आठ जुलाई, 2023) को हिंसा, आगजनी और बमबाजी के बीच मतदान हुआ। सूबे में एक रोज पहले यानी शुक्रवार (सात जुलाई, 2023) की रात से लेकर अब तक (खबर लिखे जाने तक) हुई चुनाव से जुड़ी हिंसा में कुल 12 लोग मारे गए। अफसरों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि मारे गए लोगों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के छह सदस्य, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के एक-एक कार्यकर्ता और दो अन्य लोग हैं।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
वैसे, इनके अलावा हिंसक झड़पों में कई लोग बुरी तरह घायल भी हुए, जबकि वोटिंग के दौरान कई हिस्सों में मतदान केंद्रों पर मतपेटियों को नष्ट किए जाने की खबरें भी आईं। अधिकारियों ने बताया कि कूचबिहार जिले की फलीमारी ग्राम पंचायत में भाजपा के मतदान एजेंट माधव बिस्वास की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। बीजेपी का आरोप है कि जब बिस्वास ने मतदान केंद्र में जाने की कोशिश की, तो तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने उन्हें रोका और विवाद बढ़ने पर उन्होंने बिस्वास की हत्या कर दी। हालांकि, टीएमसी ने आरोपों से इन्कार किया।
भांगोर में फटा देसी बम, दो बच्चे जख्मी
मतदान के बीच दक्षिण 24 परगना जिले के भांगोर में दो बच्चों ने गलतफहमी में बॉल समझ कर एक देसी बम उठा लिया और उसमें विस्फोट हो जाने से दोनों घायल हो गए। आठ और दस साल के घायल दोनों बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीयों का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया कि मतदाताओं को डराने-धमकाने के लिए रातभर देसी बमों का इस्तेमाल किया गया और कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया।राज्यपाल ने चुनावों का लिया जायजा लिया, पीड़ित से मिले
वहीं, राज्यपाल सीवी आनंद बोस स्थिति का जायजा लेने के अपने आश्वासन के तहत उत्तर 24 परगना के बारासात-1 उपमंडल में बम हमले में घायल एक व्यक्ति के घर गए। पीरगाछा में पीड़ित के परिवार से बात करने के बाद बोस बारासात में उस अस्पताल पहुंचे जहां उसका इलाज हो रहा है। बोस ने राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के अधिकारियों और पुलिस को फोन करने का प्रयास किया, लेकिन नेटवर्क में दिक्कत के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका।लगे राष्ट्रपति शासन- बीजेपी की मांग
उधर, चुनाव संबंधी हिंसा में मौतों के बाद सारी पार्टियों ने एक सुर में इसकी निंदा की। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग उठाई, जबकि छह समर्थकों को खोने वाली सत्तारूढ़ टीएमसी ने विपक्षी दलों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और मतदाताओं की सुरक्षा करने में विफलता के लिए केंद्रीय बलों की आलोचना की। कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि टीएमसी के ‘गुंडे’ खुलेआम घूम रहे हैं और लोगों का जनादेश लूट लिया गया है।पंचायत चुनाव में क्यों इतना अहम? समझें
दरअसल, पंचायत चुनाव सूबे के सभी सियासी दलों के लिए काफी अहम है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उनके संगठन की क्षमता और कमजोरी के बारे में आकलन करने का एक मौका देगा। साथ ही यह इलेक्शन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के लगातार तीसरे कार्यकाल के शुरुआती दो साल को लेकर राज्य के मिजाज को भी रेखांकित करेगा।बंगाल का पंचायत चुनावः एक नजर में
सूबे के 22 जिलों में ग्राम पंचायत की 63,229 सीटें और पंचायत समिति की 9,730 सीटें हैं, जबकि 20 जिलों में 928 जिला परिषद सीटें हैं। टीएमसी जिला परिषदों की सभी 928 सीटों, पंचायत समितियों की 9,419 सीटों और ग्राम पंचायतों की 61,591 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, भाजपा ने 897 जिला परिषद सीटों, पंचायत समिति की 7,032 सीटों और ग्राम पंचायतों की 38,475 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। माकपा की बात करें तो वह 747 जिला परिषद सीटों, पंचायत समिति की 6,752 सीटों और ग्राम पंचायत की 35,411 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और कांग्रेस 644 जिला परिषद सीटों, पंचायत समिति की 2,197 सीटों और ग्राम पंचायत की 11,774 सीटों पर किस्मत आजमा रही है।- सीटें - 73,887
- मतदाता- 5.67 करोड़
- उम्मीदवार - करीब 2.06 लाख
- वोटिंग - 33.66 प्रतिशत (दोपहर एक बजे तक)।
