ट्विशा शर्मा की मौत के बाद एक बार फिर दहेज और दहेज हत्या का मुद्दा चर्चा में है। भोपाल में ट्विशा शर्मा की कथिति दहेज हत्या के मामले के बाद नोएडा में दीपिका मुद्दा भी इन दिनों सुर्खियों में रहा। ऐसा नहीं है कि दहेज लोभी अचानक से समाज का हिस्सा बन गए हैं। ऐसा भी नहीं है कि पूर्व में कभी दहेज के लिए किसी बहू और उसके घरवालों को परेशान नहीं किया गया या प्रताड़ित करके मौत के घाट नहीं उतार दिया गया। ऐसे मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। आज हम आपके लिए कुछ ऐसे ही मामले लेकर आए हैं, जो आज के ट्विशा शर्मा मामले की तरह ही चर्चा में रहे हैं। चलिए जानते हैं कौन-कौन से हैं वो मामले और उन मामलों में आगे क्या हुआ?
सुधा गोयल मामला
सुधा गोयल की जब हत्या हुई, उस समय वह महज 20 साल की थी। घटना 1980 में दिल्ली में हुई। सुधा गोयल की हत्या का आरोप उनकी सास पर लगा था। आरोप था कि सुधा की सास ने उन्हें जलाकर मार दिया। सुधा के माता-पिता की तरफ से आरोप लगाए गए कि बेटी की ससुराल की तरफ से फ्रिज और स्कूटर सहित कई तरह के दहेज की मांग होती थी। शुरुआत में ही जब यह मामला ट्रायल कोर्ट में गया तो अदालत ने आरोपियों को मौत की सजा सुना दी। जब आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की तो वहां मामला पलट गया और उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद देश में काफी गुस्सा भड़का।
आरोपियों को हाईकोर्ट से बरी किए जाने के बाद हर तरफ यह मामला सुर्खियों में छा गया। महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए। फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। सुप्रीम कोर्ट में इसे सुधा गोयल मामला (राज्य(दिल्ली प्रशासन) बनाम लक्ष्मण कुमार, 1985) से जाना जाता है। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को दोषी माना और हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुधा गोयल के पति और सास को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह मामला दहेज-विरोधी आंदोलनों और भारतीय दंड संहिता (IPC) में धारा 304-B (दहेज मृत्यु) को मजबूती देने वाला मामला बना।
विस्मया नायर का मामला
यह मामला साल 2021 का है। जून 2021 में 24 साल की विस्मया नायर केरल में अपने ससुराल में मृत पाई गई। अभी विस्मया की शादी को एक साल से कुछ ही अधिक समय हुआ था। विस्मया की परिजनों ने वह सब चैट दुनिया के सामने रखे, जिसमें विस्मया को उनका पति किरण कुमार शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करता था। विस्मया के परिवार ने दहेज में 100 ग्राम सोना, जमीन और कार दी थी, लेकिन आरोप था कि ससुराल की तरफ से और ज्यादा दहेज की मांग की जा रही थी।
साल 2022 में इस मामले ने खूब तूल पकड़ा। केरल में कोल्लम जिला अदालत ने विस्मया नायर के पति किरण कुमार को दहेज हत्या, हिंसा और आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया। अदालत ने दोषी पति को 10 साल जेल की सजा सुनाई।
निशा शर्मा केस
नोएडा की महिला निशा शर्मा का मामला साल 2003 का है। निशा शर्मा के घर पर उनकी बारात आने वाली थी। इससे पहले कि बारात घर-आंगन में आती कुछ ही घंटे पहले उन्होंने अपनी शादी तोड़ दी। निशा ने बताया कि उनका दूल्हा और ससुराल वाले दहेज की मांग कर रहे हैं, इसलिए वह ये शादी नहीं करेंगी। देखते ही देखते निशा मीडिया की सुर्खियों में छा गईं और वह उस समय दहेज के खिलाफ महिला सशक्तिकरण का बड़ा चेहरा बन गई थीं।
निशा शर्मा के इस मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी चर्चा हुई। हालांकि, इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब साल 2012 में एक ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि निशा शर्मा ने शादी टालने के लिए बनावटी आरोप लगाए थे। यह मामला कानूनी चर्चाओं में अक्सर भारत में दहेज प्रताड़ना कानून के गलत इस्तेमाल को लेकर उदाहरण के तौर पर सामने आता रहता है।
अनिसिया बत्रा केस
अनिसिया बत्रा के मामले में भी साल 2018-19 में बड़ी सुर्खियां बटोरी। अनिसिया एक फ्लाइट अटेंडेंट थीं और उन्होंने दक्षिण दिल्ली के अपने घर की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। अनिसिया के परिजनों ने शादी के तुरंत बाद से ही उनके साथ घरेलू हिंसा का आरोप लगाया। आरोप तो यहां तक था कि अनिसिया के पति ने दुबई में हनीमून के दौरान उनके साथ होटल की लॉबी में मारपीट की। परिवार का आरोप था कि अनिसिया का पति और ससुराल वाले उनसे बार-बार दहेज की मांग करते थे। आरोप था कि ससुराल की तरफ से रुपये मांगे जाते थे।
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इस मामले पर जनता का गुस्सा भी काफी भड़का। मामले ने घरेलू हिंसा और दहेज मृत्यु के मामलों में दोष सिद्धि सुनिश्चित करने की जटिलताओं को भी उजागर किया। इस मामले ने दिल्ली हाईकोर्ट में धारा 304-B (दहेज मृत्यु) के इस्तेमाल को लेकर लंबी कानूनी लड़ाइयों को जन्म दिया। इस मामले ने भारतीय न्यायिक प्रणाली में पीड़ितों के परिवारों को सिस्टम की देरी के चलते होने वाली देरी को भी बेनकाब किया।