सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के मामले की सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में हार के लिए SIR को ही दोषी ठहराया है। इसके लिए ममता बनर्जी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में आंकड़े भी दिए हैं। टीएमसी की ओर से कहा गया है कि वो इसके लिए अलग से मामला दाखिल करेंगे। टीएमसी ने दावा किया कि अगर इसी गति से ट्रिब्यूनल में मामलों की सुनवाई हो तो 4 साल लग जाएंगे
टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में बंगाल की हार के लिए SIR को ठहराया जिम्मेदार
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी का दावा
टीएमसी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बीजेपी और टीएमसी में हार जीत का फासला 32 लाख है,और इससे कहीं ज्यादा मामले मुकदमेबाजी में फंसे हुए हैं। टीएमसी ने दावा किया कि 31 सीटों पर हार जीत का अंतर SIR में लंबित मामलों से कम है। एक सीट पर तो टीएमसी 862 वोट से हारी है। और वहां 5000 से ज्यादा लोग SIR की वजह से वोट ही नहीं डाल पाए। टीएमसी ने कहा कि वो इस मामले में याचिक दाखिल करेंगे और SIR में लंबित मामलों को कानूनी आधार बनाएंगे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा न्यायमूर्ति बागची की पूर्व टिप्पणी का हवाला देने के बाद दलीलों पर गौर किया। बनर्जी ने न्यायमूर्ति बागची की पूर्व टिप्पणी का हवाला देत हुए कहा था कि यदि विरोधियों की जीत का अंतर एसआईआर के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी 31 सीट हैं। कल्याण बनर्जी ने कहा, ’’फिलहाल, हमने अदालत का ध्यान उन 31 सीट की ओर दिलाया है जहां हमारी हार का अंतर एसआईआर के ’विचाराधीन’ चरण के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम था। इसके बाद हम अदालत को उन सीट के बारे में सूचित करेंगे जहां हार का अंतर कुल हटाए गए नामों के पांच से 20 प्रतिशत के बीच था। ऐसा करने के बाद ऐसी सीट की संख्या में काफी वृद्धि होगी जिससे हमारा यह दावा साबित हो जाएगा कि जनता का जनादेश चुनाव परिणामों में सही मायने में प्रतिबिंबित नहीं हुआ।’’
टीएमसी का आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ’’अपारदर्शी तरीके से आयोजित की गई, इसमें हेराफेरी की गई’’ और ’’मतदाताओं के एक विशिष्ट वर्ग को अनैतिक तरीके से निशाना बनाया गया’’, जिनके मतदान अधिकारों को छीनकर भाजपा को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने कहा, ’’मतदान केंद्रों और ईवीएम भंडारण कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिनसे बाहर लगे मॉनिटरों को लाइव फीड मिल रही थी। लेकिन क्या मतगणना केंद्रों पर कैमरे लगे थे, जहां असली खेल चल रहा था? कम से कम 60 सीट ऐसी थीं जहां हमारे मतगणना एजेंटों को पीटा गया और उन्हें परिसर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।’’
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि अगर टीएमसी पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर इलेक्शन पेटिशन दाखिल करती है तो चुनाव आयोग इस पर जवाब दाखिल करेगा। वहीं SIR के लंबित मामलों के स्टेटस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट लेंगे।
