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पुलिस की नई व्यवस्था: शिकायतकर्ता के स्थान पर ही दर्ज हो जाएगी FIR, स्टेशन पहुंचना जरूरी नहीं

FIR filing at victim's place: पूरे देश में मौजूदा नियम यह है कि अपराध पास के पुलिस स्टेशन में जाकर ही दर्ज कराना होता है। लेकिन तेलंगाना पुलिस ने बताया कि ऐसा देश में पहली बार हुआ है कि जब किसी राज्य के पुलिस कर्मियों को कुछ संवेदनशील मामलों में पुलिस स्टेशन के बजाय शिकायतकर्ताओं के घरों में FIR दर्ज करने का अधिकार दिया गया है।

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तेलंगाना में शिकायतकर्ता के स्थान पर ही दर्ज हो जाएगी FIR, पुलिस स्टेशन पहुंचना जरूरी नहीं (PTI)

Telangana police FIR at home: तेलंगाना पुलिस ने बताया कि ऐसा देश में पहली बार हुआ है कि जब किसी राज्य के पुलिस कर्मियों को कुछ संवेदनशील मामलों में पुलिस स्टेशन के बजाय शिकायतकर्ताओं के घरों में FIR दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध, संपत्ति के खिलाफ अपराध, POCSO एक्ट के तहत अपराध, SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत अपराध, बाल विवाह निषेध एक्ट के तहत अपराध और तेलंगाना रैगिंग निषेध एक्ट के तहत अपराधों के मामलों में शिकायतकर्ताओं के घरों में FIR दर्ज की जा सकती है।

पूरे देश में मौजूदा नियम यह है कि अपराध पास के पुलिस स्टेशन में जाकर ही दर्ज कराना होता है। क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने कहा कि यह नया नियम पीड़ितों और सूचना देने वालों की मदद करेगा जो अक्सर कमजोर, नाजुक या दर्दनाक स्थिति में होते हैं तो समय पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाते।

सिटिजन-सेंट्रिक मॉडल की ओर

CID चीफ चारू सिन्हा ने कहा, 'हो सकता है कि वे शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाने के लिए फिजिकली या मेंटली तैयार न हों, भले ही FIR का तुरंत रजिस्ट्रेशन उनकी सुरक्षा, गरिमा और न्याय पाने के लिए बहुत जरूरी हो।' सिन्हा ने आगे कहा, 'तेलंगाना पुलिस ऐसे मामलों में FIR रजिस्ट्रेशन के लिए स्टेशन-सेंट्रिक मॉडल से सिटिजन-सेंट्रिक मॉडल की ओर बढ़ रही है, जिसमें पीड़ित को पुलिस के पास आने के लिए जोर देने के बजाय जांच मशीनरी को पीड़ित के पास ले जाया जाएगा।'

नए नियमों के तहत, तय कैटेगरी में किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी फोन पर या मौखिक रूप से मिलने पर, अधिकार क्षेत्र वाली पुलिस (या जीरो FIR के मामले में कोई भी पुलिस अधिकारी) 'तुरंत पीड़ित के घर, अपराध की जगह, अस्पताल, या पीड़ित की पसंद की किसी भी दूसरी जगह जा सकती है, और पीड़ित या घटना की जानकारी रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति से शिकायत/रिपोर्ट ले सकती है।'

पूरा प्रोसेस

मिली हुई शिकायत को रिसीविंग ऑफिसर के एंडोर्समेंट के साथ संबंधित पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करने के लिए भेजा जाएगा। FIR की एक कॉपी पीड़ित या सूचना देने वाले को उनके घर या उनकी पसंद की जगह पर दी जाएगी, न कि उन्हें पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा जाएगा। जहां जरूरी होगा, पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 और 183 के तहत बयान भी उसी जगह पर रिकॉर्ड करेगी। सिन्हा ने कहा कि नई प्रक्रिया के लिए SOPs तैयार कर लिए गए हैं और सभी यूनिट अधिकारियों को दे दिए गए हैं, ताकि उन्हें पूरे राज्य में सभी SHO के साथ शेयर किया जा सके और लागू किया जा सके।

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 Nitin Arora
Nitin Arora author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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