Surat News: सूरत में एक मेडिकल स्टोर के मालिक का खतरनाक कारनामा सामने आया है। आरोप है कि इस दुकानदार ने जानवरों के लिए बने टॉनिक को दोबारा पैक करके बच्चों की दवा के रूप में दोगुनी कीमत पर बेचा, जिसने सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूरत स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (FDCA) की एक टीम ने मंगलवार को शहर के गोपीपुरा इलाके में 'शांतिनाथ मेडिकल स्टोर' पर छापा मारा और इसके मालिक को गिरफ्तार कर लिया। पीटीआई के मुताबिक, इसकी पहचान मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला (51) के रूप में हुई है। पुलिस उपायुक्त (DCP) राजदीपसिंह नाकुम ने बुधवार को संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
ऐसे करता था जान से खिलवाड़
पुलिस ने जनता से अपील की है कि अगर उन्होंने यह दवा खरीदी है और उन्हें किसी भी तरह के प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव का सामना करना पड़ा है, तो वे तुरंत आवश्यक चिकित्सा सहायता लें। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर जानवरों के लिए बने 'Himalaya Liv.52 Protec Liquid Veterinary Feed Supplement' के बड़े डिब्बों से तरल पदार्थ निकालकर उसे छोटी 60 मिलीलीटर और 100 मिलीलीटर की बोतलों में भरता था।
बोतलों पर बाल चिकित्सा उत्पाद के नकली लेबल
इसके बाद, बच्चों के लिए उपयुक्त दवा के रूप में दिखाने के लिए वह इन बोतलों पर बाल चिकित्सा उत्पाद 'Himalaya Liv.52 Drops' के नाम वाले नकली लेबल लगा देता था। डीसीपी ने कहा, वह 'Himalaya Liv.52 Protec Liquid Veterinary Feed Supplement' के एक लीटर और पांच लीटर के बड़े कैन से तरल निकालता था और उसे मैन्युअल रूप से 60 मिली और 100 मिली की बोतलों में भरता था। इसके बाद वह इन बोतलों पर 'Himalaya Liv.52 Drops' के नकली लेबल चिपका देता था। उन्होंने बताया कि आरोपी इस उत्पाद को इसकी मूल कीमत से दोगुनी कीमत पर बेचता था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान 31,195 रुपये मूल्य की सामग्री और अन्य सामान जब्त किया है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 123 (जहर आदि से उपद्रव करना या चोट पहुंचाना), 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला उतावलापन या लापरवाही भरा कृत्य), 336 (जालसाजी), और 278 (किसी दवा को अलग दवा के रूप में बेचना) के तहत आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस ने उपभोक्ताओं को यह सलाह भी दी है कि किसी भी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के बाद उन्हें अपने इलाज करने वाले डॉक्टर से इसकी प्रामाणिकता और गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए और डॉक्टर के बताए अनुसार ही दवा लेनी चाहिए।
