धार्मिक आजादी बनाम संवैधानिक अधिकार: 7 अप्रैल से 9 जजों की संविधान पीठ में बड़ी सुनवाई, ‘मल्टीफेथ बेंच’ पर नजर

सुप्रीम कोर्ट में सात अप्रैल से होने जा रही ऐतिहासिक सुनवाई इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य का नतीजा है, जिसे सबरीमला केस नाम से भी जानते हैं। इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर खास नजर होगी। इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों के अधिकार, समानता और गरिमा के अधिकार, और धार्मिक प्रथाओं पर न्यायिक समीक्षा की सीमा जैसे अहम मुद्दों पर विचार होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मामले से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू करेगा। इस मामले के लिए गठित 9 जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस सूर्यकांत कर रहे हैं। इस पीठ में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंद्रेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। बेंच की संरचना को देखते हुए इसे ‘मल्टीफेथ बेंच’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें विभिन्न पृष्ठभूमियों के न्यायाधीश शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

सबरीमला से जुड़े मामलों को नए सिरे से देखेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही ये ऐतिहासिक सुनवाई इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य का नतीजा होगी जिसे सबरीमला केस नाम से भी जानते हैं। इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर खास नजर होगी। इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों के अधिकार, समानता और गरिमा के अधिकार, और धार्मिक प्रथाओं पर न्यायिक समीक्षा की सीमा जैसे अहम मुद्दों पर विचार होगा।

End of Feed