इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की नौसैनिक नेतृत्व क्षमता को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। भारत ने इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) में स्पेन की औपचारिक भागीदारी का स्वागत किया है। 21 जनवरी 2026 को स्पेन के विदेश मंत्री जोसे मैनुअल अल्बारेस ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को IPOI में शामिल होने की घोषणा सौंपी।
इंडो-पैसिफिक में भारत की समुद्री ताकत को समर्थन
इस घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि यह इंडियन नेवी की 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित इंडो-पैसिफिक विज़न को वैश्विक समर्थन मिलने का संकेत है। IPOI के तहत समुद्री सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी, आपदा राहत (HADR), क्षमता निर्माण जैसे सात प्रमुख स्तंभों पर सहयोग किया जाता है, जिसमें अब 25 से अधिक देश भारत के नेतृत्व पर भरोसा जता चुके हैं।
भारत एक रेज़िडेंट पावर के रूप में हिंद महासागर को अपना रणनीतिक क्षेत्र मानता है और यहां इंडियन नेवी की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। अंडमान-निकोबार से लेकर अफ्रीका के तट तक, नौसेना ने एंटी-पायरेसी ऑपरेशन्स के जरिए समुद्री लूटपाट की घटनाओं में लगभग 80 प्रतिशत तक कमी लाने में अहम भूमिका निभाई है। होर्मुज़ और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री चोक-पॉइंट्स की सुरक्षा में भी भारतीय नौसेना अग्रणी रही है।
स्पेन की अटलांटिक क्षेत्र की नौसैनिक विशेषज्ञता अब हिंद महासागर में भारत के प्रयासों को मजबूती देगी। यह सहयोग Quad+ ढांचे के तहत सामूहिक समुद्री सुरक्षा और डिटरेंस को और प्रभावी बनाएगा। साथ ही, ASW (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर), EEZ निगरानी और संयुक्त प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से छोटे तटीय देशों की क्षमताओं को भी सशक्त किया जाएगा।
महत्वपूर्ण यह भी है कि भारत किसी सैन्य ठिकाने या संधि आधारित रणनीति के बजाय पारदर्शी, गैर-संधि सहयोग मॉडल पर काम करता है। आपदा के समय इंडियन नेवी की First Responder भूमिका—चाहे श्रीलंका हो, मालदीव हो या अफ्रीकी देश—भारत को एक भरोसेमंद ‘Preferred Security Partner’ के रूप में स्थापित करती है।
IPOI में स्पेन की भागीदारी केवल एक कूटनीतिक खबर नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि हिंद महासागर में रणनीतिक स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग की धुरी अब इंडियन नेवी बन चुकी है।
