Arvind Kejriwal: सुप्रीम कोर्ट से आम आदमी पार्टी संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को झटका लगा है। अदालत ने पीएम मोदी मानहानि मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने आपराधिक मानहानि मामले में समन रद्द करने से इनकार करने के गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी। मामला पीएम मोदी की डिग्री से जुड़ा हुआ है।
अरविंद केजरीवाल को झटका
पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गुजरात उच्च हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर उनकी टिप्पणी को लेकर मानहानि मामले में समन रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत की एक अलग पीठ ने इसी मामले में 8 अप्रैल को आप नेता संजय सिंह द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था। पीठ ने कहा, हमें एक सुसंगत दृष्टिकोण रखना चाहिए।'
गुजरात हाई कोर्ट ने 16 फरवरी को सिंह और केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने मामले में उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने की मांग की थी। दोनों नेताओं ने गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दायर मामले में एक ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन और सत्र अदालत के समन के खिलाफ उनकी पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
अरविंद केजरीवाल को झटका
24 फरवरी 2024 को पीएम मोदी की डिग्री से जुड़े मानहानि मामले में अरविंद केजरीवाल को झटका लगा था। केजरीवाल और पार्टी के सांसद संजय सिंह ने निचली अदालत की तरफ से जारी किए गए समन को गैरकानूनी बताते हुए चुनौती दी थी। केजरीवाल की तरफ से समन को खारिज करने की मांग की गई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए मामला खारिज करने की मांग की थी।
'व्यंग्यात्मक' और 'अपमानजनक' बयान
मेट्रोपॉलिटन अदालत ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री के संबंध में 'व्यंग्यात्मक' और 'अपमानजनक' बयान को लेकर गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दायर मानहानि मामले में 15 अप्रैल को केजरीवाल और संजय सिंह को पहला समन जारी किया था। आप नेताओं ने समन को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण अर्जी दायर की थी। लेकिन राहत नहीं मिलने पर गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया था।
