Release Bhawana Kishore: Times Now Navbharat के 'ऑपरेशन शीशमहल' के खुलासे के बाद हमारे न्यूज चैनल की पत्रकार भावना किशोर को पंजाब में 5 मई को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब पुलिस ने जिस तरह से उन्हें गिरफ्तार किया, वही सवालों के घेरे में है।
पुलिस का दावा
पुलिस का कहना है कि भावना की गाड़ी से एक महिला को चोट लगी है। जबकि भावना गाडी की पिछली सीट पर बैठी थीं। गाड़ी ड्राइवर चला रहा था। भावना की गिरफ्तारी लुधियाना में हुई है। भावना किशोर के साथ हमारे पत्रकार साथी मृत्युंजय कुमार, परमिंदर को भी गिरफ्तार किया गया है। लेकिन भावना किशोर को जिस तरह एक पुरुष पुलिसकर्मी ने गिरफ्तार किया है, उससे नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
कार्रवाई पर सवाल क्यों
इस गिरफ्तारी में कई सवाल है। पुलिस ने इस मामले में एससी-एसटी एक्ट में मामला दर्ज किया है। अब सवाल है कि भावना गाड़ी चला नहीं रही थी, अनजान महिला को चोट लगी, जिसे भावना जानती नहीं थीं, तो कुछ ही मिनटों में भावना ने महिला की जाति कैसे पहचान ली और गाली भी दे दी?
पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी उठाया सवाल
पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी भी पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहा है। वो कहते हैं- "मेरे को ये समझ में नहीं आ रहा कि अगर एक रिपोर्टर गाड़ी में बैठी हुई थी और किसी से टक्कर होती है, तो रिपोर्ट और जिसको चोट लगी वो एक दूसरे को जानते नहीं है, एक दूसरे के नाम नहीं जानते, तो ये बिलकुल मनगढ़ंत कहानी है कि उसने निकलकर गालियां देनी शुरू कर दी, एससी-एसटी एक्ट वाली, ये विश्वास करने योग्य नहीं है।"
क्या बोलीं सुप्रीम कोर्ट की वकील सविता सिंह
सुप्रीम कोर्ट की महिला वकील सविता सिंह कहती है कि महिला रिपोर्टर भावना किशोर और अन्य दो साथी पत्रकारों की गिरफ्तारी पूरी तरह असंवैधानिक और गैर कानूनी है। उन्होंने कहा, भावना किशोर की गिरफ्तारी में सारे नियम ताक पर रख दिए गए। उन्होंने कहा, अगर कोई एक्सीडेंटल केस है तो ड्राइवर या ऑनर को डिटेन किया जाता है। पैसेंजर को आप गिरफ्तार नहीं कर सकते।
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