Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर में कथित चंदा चोरी मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट ने खुद इसकी पुष्टि की है। हालांकि, अभी तक इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि आगामी बैठक में इस्तीफे पर फैसला विचार-विमर्श किया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि चंपत राय के स्थान पर किसी अन्य सदस्य का चयन हो सकता है, तो चलिए ऐसे में समझते हैं कि आखिर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और पदाधिकारियों के इस्तीफे की प्रक्रिया क्या है? क्या यह महज पत्र देने भर से प्रभावी हो जाता है या फिर कोई तय कानून प्रक्रिया भी है।
आस्था का मुद्दा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी भी सदस्य का इस्तीफा अपने आप में लोगों की दिलचस्पी का मुद्दा बन जाता है और वह इससे जुड़े नियम कायदों को जानना-समझना चाहते हैं।
ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust) है। इसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण के उद्देश्य से किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी।
ट्रस्ट में कितने सदस्य हैं?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें से 12 सदस्यों को भारत सरकार ने नामित किया, जबकि पहली बैठक के दौरान 3 अन्य सदस्यों का चयन किया गया। इस ट्रस्ट की आतंरिक व्यवस्था ट्रस्ट डीड (Trust Deed) और लागू कानून प्रवाधानों के तहत संचालित होती है। हालांकि, ट्रस्ट डीड के बारे में जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। दरअसल, ट्रस्ट डीड एक कानूनी और औपचारिक दस्तावेज है, जो किसी ट्रस्ट की स्थापना और संचालन के नियम-कायदों को तय करता है।
इसके बावजूद, मौजूदा घटनाक्रमों और भारतीय ट्रस्ट कानून के तहत इस्तीफे की प्रक्रिया को कुछ हद तक समझा जा सकता है।
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क्या इस्तीफा देने से पद हो जाता है खाली?
सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या महज इस्तीफा देने से पद खाली हो जाता है? तो इसका जवाब ट्रस्ट की हालिया आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति से मिला। ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की जानकारी दी, लेकिन उस पर फैसला अगली बैठक में विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। जिसका मतलब साफ है कि इस्तीफा देने मात्र से वह प्रभावी नहीं हो जाता है। खबर लिखे जाते समय ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम और तस्वीरें मौजूद हैं।
Ram Mandir
ट्रस्ट की अगली बैठक में इस्तीफे पर चर्चा होगी। ऐसे में अगर ट्रस्ट इस्तीफा स्वीकार कर लेता है तभी चंपत राय और अनिल मिश्रा औपचारिक रूप से पदमुक्त माने जाएंगे और जरूरत के हिसाब से उसी बैठक या आगे की बैठक में रिक्त पद भरने की प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है।
क्या कहता है नियम?
भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 की धारा 46 के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति ट्रस्टी का पद स्वीकार करता है, तो वह फिर मनमाने ढंग से या बिना किसी उचित कारण के उस पद को नहीं छोड़ सकता है। हालांकि, इस्तीफा देने के लिए कुछ विकल्प मौजूद हैं। पहला यदि ट्रस्ट डीड में इस्तीफे की अनुमति दी गई हो। दूसरा यदि सभी सक्षम लाभार्थी उसकी सहमति दें और तीसरा यदि सक्षम न्यायालय उसे पद छोड़ने की अनुमति दे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यायालय अमूमन तभी इस्तीफा स्वीकार करने की अनुमति देता है, जब यह साबित हो कि उसके पद पर बने रहना उसके लिए अनुचित या अत्यधिक बोझिल है और उसके हटने से ट्रस्ट के संचालन या उद्देश्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 की धारा 73 और 74 नए ट्रस्टी की नियुक्ति की व्यवस्था करती हैं, ताकि किसी ट्रस्टी के हटने या पद छोड़ने की स्थिति में भी ट्रस्ट का कामकाज निर्बाध रूप से चलता रहे।
