Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर लगातार अहम खुलासे हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज होने से कई दिन पहले ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपी से पैसे वसूलना शुरू कर दिया था। इस पूरे मामले की कड़ियों की शुरुआत 3-4 जून को हुई, जब ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को पहली बार दान राशि की चोरी या हेराफेरी का संदेह हुआ।
राम मंदिर केस में शिकायत से पहले पैसे वापस लेने के दावों ने बढ़ाए सवाल। AI IMAGE
इसके बाद 5 जून को आंतरिक जांच और वेरिफिकेशन पूरा करके ट्रस्ट के अधिकारी पुलिस बल के साथ मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के आवास पर पहुंचे, जहां छापेमारी के दौरान लगभग 58 लाख रुपये बरामद किए गए; टाइम्स नाउ द्वारा देखे गए सीसीटीवी फुटेज में भी अधिकारी अविनाश शुक्ला को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
7 जून को सामने आया ये मामला
इसके बाद 6 से 8 जून के बीच दान की बाकी बची हुई राशि को आरोपियों द्वारा उनके बैंक खातों के जरिए ट्रस्ट को वापस लौटा दिया गया और 7 जून को यह पूरा मामला पहली बार मीडिया और जनता के सामने आया जब हेराफेरी और गबन के आरोप सार्वजनिक रूप से उजागर हुए। इस मामले में देरी से एफआईआर दर्ज होने का मुख्य कारण यह था कि औपचारिक शिकायत तब दर्ज की गई जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशें सामने आईं।
शिकायत से पहले ही पैसों की रिकवरी कैसे की गई?
ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित इस एसआईटी के प्रमुख लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत थे, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को राज्य सरकार को सौंपी और इसके बाद ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। वर्तमान में जांच एजेंसियां इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि औपचारिक शिकायत से पहले ही पैसों की रिकवरी कैसे की गई और क्या शुरुआती स्तर पर कोई प्रक्रियात्मक लापरवाही हुई थी।
इन आठ लोगों को किया गया गिरफ्तार
इस घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर उर्फ तिन्नू यादव की न्यायिक हिरासत समाप्त होने पर सोमवार को उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भ्रष्टाचार निवारण अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया, जहां विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे के अनुसार पुलिस द्वारा आगे की कस्टडी न मांगे जाने पर अदालत ने सभी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।इस बड़े विवाद और चौतरफा दबाव के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक आधिकारिक बयान जारी कर गहरा दुख और स्तब्धता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की प्रतिबद्धता जताई है, साथ ही ट्रस्ट ने यह भी घोषणा की है कि उन्हें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे प्राप्त हो चुके हैं।
