प्रस्तावित परिसीमन से बदल सकता है लोकसभा की सीटों का 'भूगोल', जानिए किस क्षेत्र में बढ़ेंगी ज्यादा सीटें

सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किए जा रहे हैं उनमें लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

Delimitation Bill 2026: लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार 131वां संविधान संशोधन विधेयक एवं परिसीमन बिल पेश करने की तैयारी में है। इसके लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किए जा रहे हैं उनमें लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। रिपोर्टों में कहा गया है कि इन विधेयकों के लागू होने के बाद राज्यों में लोकसभा की सीटों में वृद्धि होगी। रिपोर्टों के मानें तो दक्षिण क्षेत्र की तुलना में हिंदी भाषी राज्यों की सीटों में ज्यादा वृद्धि हो सकती है।

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प्रस्तावित परिसीमन में लोकसभा की सीटें 850 करने की बात कही गई है।

क्षेत्र%सीटों में वृद्धि543 सीटों में हिस्सेदारी850 सीटों में हिस्सेदारी
पूर्व48.7%14.4%13.7%
हिंदीभाषी प्रदेश76.8%38.1%43.1%
उत्तर-पूर्व33.3%4.4%3.8%
उत्तर-गैर हिंदी58.3%4.4%4.5%
दक्षिण33.3%24.3%20.7
पश्चिम56.4%14.3%14.4%
कुल56.5%100%100%

दक्षिण क्षेत्र की लोकसभा सीटें ज्यादा प्रभावित होंगी

रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि नया परिसीमन यदि लागू हो जाता है तो कुल सीटों में दक्षिण क्षेत्र की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत से कम होकर 20.7 प्रतिशत पर आ जाएगी जबकि हिंदी भाषी राज्यों की हिस्सेदारी 38.1 प्रतिशत से बढ़कर 43.1 फीसदी हो जाएगी। जाहिर है कि इससे राज्यों की खासकर दक्षिण क्षेत्र की लोकसभा सीटें प्रभावित होंगी। 2011 की जनगणना को आधार बनाकर प्रस्तावित परिसीमन होने पर लोकसभा की सीटों में इस तरह की वृद्धि होने का अनुमान है।

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