पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 मई 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक ऐसा पल आया जिसने हर किसी की आंखें ठिठका दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मंच पर वयोवृद्ध नेता माखनलाल सरकार को गले लगाया, तो सभी यह जानने को उत्सुक थे कि यह नेता कौन हैं। यह न केवल एक सम्मान था, बल्कि बंगाल में दशकों के संघर्ष और तपस्या को मिला प्रतिफल था।
प्रधानमंत्री ने माखनलाल को गले लगाया और पांव छुए (चित्र साभार: X/@narendramodi)
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस पल को साझा करते हुए लिखा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार का शपथ लेना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विजन को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कौन हैं माखनलाल सरकार?
माखनलाल सरकार को उत्तर बंगाल और सिलिगुड़ी क्षेत्र में भाजपा का 'भीष्म पितामह' माना जाता है। उनके राजनीतिक जीवन की कुछ अनकही और गौरवशाली बातें हैं। उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। जब डॉ. मुखर्जी कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए आंदोलन कर रहे थे, तब माखनलाल उनके साथ थे और उन्हें जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार भी किया गया था। उन्हें सिलिगुड़ी, दार्जिलिंग पहाड़ियों और तराई क्षेत्रों में भाजपा का संस्थापक सदस्य माना जाता है। वह भाजपा सिलिगुड़ी संगठनात्मक जिले के पहले जिला अध्यक्ष भी रहे। उनके बेटे माणिक सरकार बताते हैं कि उनके पिता को उस दौर में राष्ट्रगान गाने के लिए भी गिरफ्तार किया गया था जब आरएसएस पर प्रतिबंध लगा था।
परिवार के लिए 'अविस्मरणीय' दिन
सिलिगुड़ी में रहने वाले माखनलाल जी के परिवार के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं था। उनकी बहू मीनू सरकार ने भावुक होते हुए कहा, "आज का दिन ऐतिहासिक है। मेरे ससुर ने दशकों तक पार्टी को अपना खून-पसीना दिया, आज प्रधानमंत्री ने उन्हें जो सम्मान दिया है, उसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं।" उनके बड़े बेटे माणिक सरकार ने गर्व के साथ कहा, "मेरे पिता 97 साल की उम्र में भी सादा जीवन जीते हैं। उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित होते देखना हमारे लिए गौरव का क्षण है।"
उत्तर बंगाल की राजनीति के मार्गदर्शक
माखनलाल सरकार आज भी पार्टी में 'मार्गदर्शक' की भूमिका निभाते हैं। दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता सहित भाजपा के तमाम युवा नेता अक्सर उनसे परामर्श लेने उनके सिलिगुड़ी स्थित आवास पर जाते हैं। उनकी सादगी और राष्ट्रवाद के प्रति समर्पण आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
