सुप्रीम कोर्ट पहुंचा NEET Paper Leak केस, NTA के पुनर्गठन की मांग; पढ़ें पूरी डिमांड

NEET Paper Leak के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट में NTA के पुरर्गठन की मांग की गई है। साथ ही एनटीए पर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

NEET Paper Leak केस अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। NTA के पुनर्गठन की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अपने अनुरोध के साथ बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के कारण 22.7 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकारों पर ’’प्रत्यक्ष हमले’’ का हवाला दिया है। याचिका में एनटीए का पुनर्गठन या प्रतिस्थापन करने और नीट-यूजी आयोजित करने के लिए एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

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NTA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका (फाइल फोटो- PTI)

NTA के खिलाफ याचिका में क्या-क्या?

’द फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) ने अधिवक्ता तन्वी दुबे के जरिये दाखिल अर्जी में अनुरोध किया है कि जब तक पुनर्परीक्षा की देखरेख के लिए औपचारिक रूप से एक नए निकाय का गठन नहीं हो जाता, तब तक उच्चाधिकार प्राप्त एक निगरानी समिति नियुक्त की जाए। याचिका में कहा गया कि इस समिति में उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष नियुक्त किया जाए, साथ ही एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल किए जाएं ताकि भविष्य में पेपर लीक होने की कोई घटना न हो।

NTA पर कई गंभीर आरोप

याचिका के मुताबिक, राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने खुलासा किया कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर प्रसारित ’संभावित प्रश्नपत्रों’ में 120 ऐसे प्रश्न थे जो नीट-यूजी 2026 परीक्षा के वास्तविक जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान अनुभागों में पूछे गए प्रश्नों के समान थे। इसमें कहा गया कि एनटीए द्वारा 5जी जैमर, जीपीएस ट्रैकिंग और एआई-निगरानी वाले कैमरों सहित उच्च-तकनीकी सुरक्षा उपायों का उपयोग करने के दावों के बावजूद, ये उपाय ’केवल कागजों पर’ ही प्रतीत होते हैं। याचिका में कहा गया कि एनटीए द्वारा परीक्षा आयोजित करने के लिए इस्तेमाल की जा रही मौजूदा प्रणाली में उचित सुरक्षा उपायों का अभाव है। गत वर्षों में बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के बावजूद, अधिकारी परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ’’आवश्यक बदलाव लागू करने में विफल’’ रहे हैं। इसमें कहा गया, ’’वे अब भी प्रश्न पत्रों को भौतिक रूप से छापने और परिवहन के लिए निजी कूरियर का उपयोग करने जैसे जोखिम भरे, पुराने जमाने के तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे पेपर लीक होने की आशंका बढ़ जाती है।’’

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