भारत में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र ऐसा है, जहां पॉल्यूशन सबसे अधिक रिकॉर्ड किया जाता है। सर्दियों की आहट के साथ ही हवा की फिजाओं में जहर घुलने लगता है और करीब 9 महीने तक एक्यूआई खतरनाक श्रेणी में रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण पंजाब में पराली जलाने को बताया जाता है। हालांकि, एक रिपोर्ट ने चौंका दिया है, जिसमें कहा गया है कि एनसीआर की आबो हवा में पीएम 2.5 के उच्च स्तर के लिए काफी हद तक पड़ोसी देश पाकिस्तान जिम्मेदार है और क्षेत्र में इस प्रदूषण में करीब 33 प्रतिशत का योगदान करता है। यह खुलासा एक नवीनतम रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की वजह से भारत के पंजाब में भी वायु प्रदूषण की समस्या विकराल होती है।
दिल्ली-एनसीआर की हवा का भी आया ‘पाकिस्तान कनेक्शन’
रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर में पीएम2.5 की सालाना औसत सांद्रता 67.9 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर है। इसमें स्थानीय स्रोतों का योगदान 28 प्रतिशत है, जो मुख्य रूप से घरों में होने वाली गतिविधियों (जैसे खाना पकाने के लिए जैवईंधन जलाना) से होता है, इसके बाद उद्योग, कृषि और परिवहन का स्थान आता है।
’बियॉन्ड स्टेट बाउंड्रीज़: क्वांटिफाइंग इंटरस्टेट एयर पॉल्यूशन ट्रांसपोर्ट एंड सेक्टरल सॉल्यूशंस इन द इंडो-गैंजेटिक प्लेन’ से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर और मध्य भारत के राज्य एनसीआर में पीएम2.5 के स्तर में केवल 12 प्रतिशत का योगदान करते हैं, जिसमें प्राकृतिक और कृषि स्रोतों के साथ-साथ घरों, उद्योगों और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रमुख है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति अध्ययन केंद्र (सीएसटीईपी) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में सिंधु-गंगा के मैदान (आईजीपी) में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों, उन क्षेत्रों जहां से वे उत्पन्न होते हैं, और क्षेत्रीय स्तर पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन के उपायों का विश्लेषण किया गया है।
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रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पंजाब में पीएम2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 77.8 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर है। इलाके में स्थानीय स्रोतों में, रिहायशी इलाकों से होने वाला प्रदूषण कुल स्थानीय पीएम2.5 का लगभग 52 प्रतिशत है। इस प्रदूषण में इसके बाद उद्योग (13.8 प्रतिशत), प्राकृतिक और कृषि स्रोत (11.6 प्रतिशत) और पराली जलाने की घटनाओं (7.9 प्रतिशत) का हिस्सा है।
बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर की तरह ही पंजाब की हवा की गुणवत्ता पर भी पाकिस्तान से आने वाले प्रदूषण का बहुत अधिक असर पड़ता है। राज्य में वार्षिक औसत पीएम2.5 सांद्रता में पड़ोसी देश का योगदान 40 प्रतिशत का है। पंजाब की वायु गुणवत्ता में योगदान देने वाले अन्य क्षेत्रों में उसके पड़ोसी भारतीय राज्य शामिल हैं। इनमें राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शामिल हैं।
