Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Operation Sindoor: "प्रीति"....रामचरितमानस की वो पंक्तियां जिन्हें एयर मार्शल ने दोहराकर दी थी पाक को वॉर्निंग

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य रणनीति और संयमित लेकिन सख्त रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा। रामचरितमानस की एक चौपाई के जरिए एयर मार्शल ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत धैर्य रखता है, लेकिन अन्याय पर निर्णायक जवाब देना भी जानता है।

Image
समझदार के लिए इशारा ही काफी
Authored by: Nilesh DwivedI
Updated May 10, 2026, 23:17 IST
Follow on Google News

Operation Sindoor: बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।।

अक्सर आपने और हमने इन पक्तियों को रामकथा के वक्त सुना या पढ़ा होगा। जिन भगवान राम को मर्यादा, धर्म, मानवता और शालीनता के प्रतीक में पूजा जाता है वे भी अपना संयम तब खो बैठे जब निर्लज्ज समुद्र ने उनकी प्रार्थना स्वीकार नहीं की। रामचरितमानस के सुंदरकांड की इन पंक्तियों में भगवान राम के उस रूप का वर्णन देखने को मिलता है जिससे जल, थल और अंबर तीनों भयभीत हो गए। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई इस चौपाई का पूरा अर्थ है- तीन दिन बीतने के बाद भी जड़ (मूर्ख) समुद्र विनय नहीं मान रहा है। तब राम क्रोधित होकर कहते हैं कि भय के बिना प्रीति यानी प्रेम नहीं होता।

26 मासूम लोगों को उतारा मौत के घाट

लेकिन आज हम आपको ये बात क्यों बता रहे हैं? दरअसल हम आपको भारत की उस सैन्य ताकत के बारे में बता रहे हैं जो कि देश की शांति के साथ कभी भी समझौता नहीं कर सकती है। आपको वो भयावह मंजर तो याद ही होगा जब पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम स्थित में बैसरन घाटी में एक-दो नहीं, बल्कि 26 निर्दोष नागरिकों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था और वो भी उनका नाम और धर्म पूछकर। कई माताओं और बहनों की मांग हमेशा के लिए सूनी करने वाले उन आतंकियों के खिलाफ देशभर में क्रोध की मसाल दहक उठी। एक्शन जरूरी हो गया था। फिर जो हुआ उसने पाकिस्तान की कई रातों की नींद ही उड़ा दी।

"याचना नहीं, अब रण होगा"

"याचना नहीं, अब रण होगा"- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों को भारत के धुरंधरों ने सार्थक बना दिया। महज 15 दिन बाद भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त अभियान चलाते हुए पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्कों पर बड़ा प्रहार किया। सेना की तेज, सटीक और रणनीतिक कार्रवाई से पाकिस्तान पूरी तरह चौंक गया। इस ऑपरेशन में भारत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ, जबकि भारतीय जवानों ने पाकिस्तान और PoK में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया। इन्हीं ठिकानों पर पहलगाम आतंकी हमले की साजिश रची गई थी और उसे अंजाम देने की तैयारी की गई थी। हमले में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। भारत ने पहलगाम हमले का जवाब देने का अपना संकल्प 7 मई 2025 को इस कार्रवाई के जरिए पूरा कर दिया।

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई

भारत ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल आतंकवाद के खिलाफ थी। भारत की ओर से कहा गया कि ऑपरेशन का उद्देश्य आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था, न कि पाकिस्तान की सैन्य संस्थाओं को। हमले के बाद भारत ने अपनी कार्रवाई को संतुलित, सटीक और सीमित दायरे में किया गया कदम बताया। भारतीय एजेंसियों ने इस मिशन को बेहद सुनियोजित रणनीति और पुख्ता खुफिया सूचनाओं के आधार पर अंजाम दिया, ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक क्षति न हो। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि आम नागरिकों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। पूरे ऑपरेशन में संयम और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए केवल आतंकवादी ठिकानों को ही निशाना बनाया गया।

10 मई को भारत ने जताई सीजफायर पर सहमति

भारत के स्पष्ट और संतुलित रुख के बावजूद 7-8 मई 2025 की रात पाकिस्तान ने जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन उसके अधिकांश हथियार और हमले प्रभावी साबित नहीं हो सके। इसके बाद भारतीय सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को सटीक निशानों के जरिए नुकसान पहुंचाया। भारतीय कार्रवाई में पाकिस्तान के एयरबेस, सैन्य अड्डों और हवाई पट्टियों को निशाना बनाया गया। यह ऑपरेशन पूरी तरह रणनीतिक और लक्ष्य आधारित था, जिसमें केवल सैन्य प्रतिष्ठानों पर फोकस रखा गया। लगातार दबाव और जवाबी हमलों के बीच पाकिस्तान महज 88 घंटों के भीतर बैकफुट पर आ गया और तनाव कम करने के लिए बातचीत की पहल करने लगा। इसके बाद 10 मई को भारत ने युद्धविराम यानी सीजफायर पर सहमति जताई।

हित-वचन नहीं तूने माना,

मैत्री का मूल्य न पहचाना,

तो ले, मैं भी अब जाता हूं,

अन्तिम संकल्प सुनाता हूं।

याचना नहीं, अब रण होगा,

जीवन-जय या कि मरण होगा।

AK Bharti Warning to Pakistan

AK Bharti Warning to Pakistan

"समझदार के लिए इशारा ही काफी है"

12 मई 2025 और उससे पहले भारतीय सेना के तीनों विंग के महानिदेशक स्तर के अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कीं। पहले दिन की प्रेस वार्ता का आगाज शिव तांडव स्तोत्र के संगीत से हुआ था। सैन्य अधिकारियों के वक्तव्य से पहले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के महाकाव्य रश्मिरथी के मशहूर भाग 'कृष्ण की चेतावनी' के इन्हीं अंशों का इस्तेमाल किया गया। उसी दौरान जब भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद वायु सेना के मार्शल एके भारती (डीजी एयर ऑपरेशन) को संदेश देने के लिए कहा गया तो उन्होंने रामचरितमानस की एक चौपाई याद दिला दी। उन्होंने कहा कि- "मैं बस रामचरितमानस की एक पंक्ति याद दिलाऊंगा, याद कीजिए वो पंक्ति- बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होई न प्रीति।।" भारती ने आगे कहा- "समझदार के लिए इशारा ही काफी है।"

और अंत में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की ही एक कविता 'शक्ति और क्षमा' की वो लाइनें जो भारत की इस ऐतिहासिक कार्रवाई को और भी सही शब्दों में बयां करती हैं-

तीन दिवस तक पंथ मांगते रघुपति सिन्धु किनारे,

बैठे पढ़ते रहे छन्द अनुनय के प्यारे-प्यारे।

उत्तर में जब एक नाद भी उठा नहीं सागर से

उठी अधीर धधक पौरुष की आग राम के शर से।

सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि करता आ गिरा शरण में

चरण पूज दासता ग्रहण की बँधा मूढ़ बन्धन में।

सच पूछो, तो शर में ही बसती है दीप्ति विनय की

सन्धि-वचन संपूज्य उसी का जिसमें शक्ति विजय की।

सहनशीलता, क्षमा, दया को तभी पूजता जग है

बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है।

रामचरितमानस की चौपाई के जरिए एयर मार्शल ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि भारत हमेशा धैर्य, शांति और संयम की नीति पर चलता है। हालांकि, जब बार-बार समझाने और शांतिपूर्ण प्रयासों के बावजूद स्थिति नहीं बदलती, तब देश अपनी ताकत और कड़ा रुख दिखाने से पीछे नहीं हटता।

End of Article