West Bengal Loudspeaker Awareness Campaign: पश्चिम बंगाल में लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और समाजिक चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री बनने के बाद से सुवेंदु अधिकारी लगातार एक के बाद एक फैसले ले रहे हैं। इसी कड़ी में सुवेंदु अधिकारी ने लाउडस्पीकर के नियमों को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य भर में किसी भी धार्मिक स्थलों और आयोजनों में निर्धारित मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी का सख्त संदेश
सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट किया कि ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार का संदेश साफ है कि तय मानकों के तहत ही लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाए, क्योंकि इसकी वजह से मरीजों, छात्रों और बुजुर्गों सहित इत्यादि को असुविधा होती है।
ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों ने कई मंदिरों और मस्जिदों में बैठकें कीं, ताकि उनसे इस विषय पर बातचीत की जा सकें और सरकारी गाइडलाइन्स का पालन सुनिश्चित किया जाए, लेकिन इन कोशिशों के बीच आसनसोल के रेलपार क्षेत्र में स्थिति गड़बड़ा गई। उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला किया और तोड़फोड़ की।
आसनसोल में बिगड़ी स्थिति
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार के निर्देश के बाद जहांगिरी मोहल्ला पुलिस रेलपार क्षेत्र में रहने वाले समुदाय के लोगों के बीच लाउडस्पीकर संबंधी प्रशासनिक संदेश पहुंचाने गई थी। इसको लेकर कई मंदिरों और मस्जिदों में बैठकें भी शुरू हुईं, लेकिन उपद्रवी तत्वों में अफवाह फैला दी, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
गुस्साए लोगों ने कथित तौर पर एक पुलिस चौकी पर हमला किया और तोड़फोड़ की। हालांकि, पुलिस ने लाठीचार्ज करते हुए स्थिति को संभाला। घटना के बाद अतिरिक्त बल तैनात किया गया। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से उपद्रवियों की पहचान की। अबतक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार का संदेश साफ है कि चाहे कोई भी धार्मिक स्थल हो लाउडस्पीकर का निर्धारित मानकों के हिसाब से ही इस्तेमाल हो।
लाउडस्पीकर जागरूकता अभियान
प्रशासनिक अधिकारी अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से लाउडस्पीकर से जुड़े नियमों का पालन करने की अपील करेंगे, ताकि तनाव न पसरे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गाइडलाइन्स की अनदेखी की जाए। अगर कोई गाइडलाइन्स का पालन नहीं करता है तो उस पर कार्रवाई भी हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सचिवालय 'नबान्न' में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में ध्वनि प्रदूषण नियमों को बिना किसी अपवाद के सख्ती से लागू करने पर जोर दिया और इनके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई के खिलाफ चेतावनी दी।
Suvendu adhikari
बैठक में उपस्थित पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक नहीं हो सकती। उल्लंघन के मामलों में पुलिस को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।"
कितनी होगी चाहिए लाउडस्पीकर की आवाज?
राज्य सचिवालय के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने अब ध्वनि प्रदूषण संबंधी मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। पर्यावरण अधिकारियों द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय 55 डेसिबल तक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति है और रात में यह सीमा 45 डेसिबल है।
अधिकांश धार्मिक स्थल आवासीय क्षेत्रों में स्थित हैं। औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अनुमत सीमा थोड़ी अधिक है। सूत्रों के अनुसार, हालांकि विशेष त्यौहारों और अवसरों पर 65 डेसिबल तक की छूट पहले दी गई थी, लेकिन नया प्रशासन ध्वनि नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।
लाउडस्पीकर को लेकर क्या हैं नियम?
देश में लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम मुख्य रूप से केंद्र सरकार के 'Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000' के तहत लागू होते हैं। इस कानून के तहत कुछ ऐसे स्थान भी चिह्नित किए गए हैं, जहां लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पाबंदी है। साइलेंस जोन के अंतर्गत आने वाली जगहों के 100 मीटर के दायरे में इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
Loudspeaker
साइलेंस जोन में सख्ती
आमतौर पर साइलेंस जोन में अस्पताल, स्कूल, अदालत और शैक्षणिक संस्थानों को माना जाता है। यहां तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं होती है।
कब नहीं बजा सकते लाउडस्पीकर?
आमतौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहती है। हालांकि, राज्य सरकार विशेष अवसरों पर सीमित छूट दे सकती है।
अनुमति लेना अनिवार्य
इसके अलावा किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन, जुलूस या सभा में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने के लिए स्थानीय प्रशासन या पुलिस से अनुमति लेना जरूरी होता है। धार्मिक स्थलों में भी इसी प्रक्रिया के आधार पर अनुमति मिलती है। हालांकि, धार्मिक स्थलों के लिए तय समय को बढ़ाया जा सकता है।
