TMC Rebel MP: टीएमसी के 20 सांसद, ममता बनर्जी से अलग होने का ऐलान कर चुके हैं। NCPI में विलय की बात भी हो चुकी है, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी ये मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक ओम बिरला ने इनपर कोई फैसला नहीं लिया है। उनकी मंजूरी टीएमसी के बागी सांसदों के लिए सबसे जरूरी है। अब खबर है कि ओम बिरला, ममता के समर्थक सांसदों से भी मिलने जा रहे हैं, दोनों पक्षों को सुनने के बाद भी वो विलय पर फैसला लेंगे।
टीएमसी के बागी विधायक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलते हुए (फोटो- ANI)
ममता बनर्जी गुट को स्पीकर कार्यालय का मेल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक टीएमसी सांसद गुट को एक आधिकारिक ईमेल भेजा है। इस मेल के जरिए टीएमसी के मुख्य गुट के सांसदों को अपनी बात रखने और मुलाकात करने के लिए समय दिया गया है। संसदीय सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर दोनों पक्षों (बागी गुट और मूल टीएमसी) की दलीलें विस्तार से सुनेंगे और उसके बाद ही कोई संवैधानिक या कानूनी फैसला लेंगे।
कीर्ति आजाद ने संभाला मोर्चा
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI ने इसे लेकर एक बड़ा दावा किया है। टीएमसी सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने 15 जून को दोपहर 2:00 बजे अभिषेक बनर्जी को एक ईमेल भेजा था। हैरान करने वाली बात यह है कि यह मेल उस वक्त भेजा गया जब अभिषेक बनर्जी से प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ कर रहा था और उस दौरान उनके पास अपने फोन या ईमेल को देखने की सुविधा नहीं थी। लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय द्वारा भेजे गए इस मेल में अभिषेक बनर्जी को उसी दिन (15 जून) शाम 4:00 बजे दिल्ली में स्पीकर से मिलने का समय दिया गया थ। लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय से मेल भेजे जाने के महज एक घंटे के भीतर, टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के पास स्पीकर कार्यालय से एक फोन कॉल आया। सूचना मिलते ही सांसद कीर्ति आजाद तुरंत व्यक्तिगत रूप से लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वहां अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया। टीएमसी की ओर से स्पीकर कार्यालय से अनुरोध किया गया कि आगे की किसी तारीख और समय पर बैठक तय की जाए, साथ ही उन्होंने पूरी तरह सहयोग करने का भरोसा भी दिया।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि टीएमसी के भीतर यह संकट तब गहरा गया जब पार्टी के 20 बागी सांसदों ने एक साथ आकर बगावत का बिगुल फूंक दिया। इन सभी 20 बागी सांसदों ने पिछले दिनों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी और उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपा था। इस पत्र के माध्यम से बागी गुट ने स्पीकर को जानकारी दी थी कि वे मूल पार्टी से अलग हो चुके हैं और उन्होंने अपने इस नए गुट का विलय 'एनसीपीआई' (NCPI) में करने का फैसला किया है।
सुनवाई के बाद ही आएगा फैसला
संसदीय नियमों (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के पाला बदलने और विलय के दावे की गहन जांच बेहद जरूरी होती है। यही वजह है कि स्पीकर ओम बिरला ने जल्दबाजी में कोई भी आदेश देने के बजाय 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांत को प्राथमिकता दी है। अब जब तक ममता बनर्जी गुट के सांसदों से मुलाकात और उनकी आपत्ति या पक्ष को नहीं सुन लिया जाता, तब तक बागी गुट के विलय को लेकर लोकसभा अध्यक्ष की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। इस सुनवाई के बाद आने वाला निर्णय पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।
