Kolkata Warehouse Tragedy: कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके तारातला में निर्माणाधीन गोदाम के ढहने के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। वहीं, 24 घंटे बीतने के बाद भी राहत और बचाव कार्य जारी है। मलबे के नीचे दबे 30 लोगों को अब तक बचाया जा चुका है। इस बीच सामने आया है कि जिस गोदाम के ढहने की घटना हुई, उसके निर्माण की मंजूरी कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के पूर्व मेयर और पश्चिम बंगाल के पूर्व नगर मामलों और शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने दी थी।
बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी।
हादसे की जांच और बचाव कार्य पर सीएम सुवेंदु की सीधी नजर
गौरतलब है कि इस हादसे की जांच और राहत और बचाव कार्य पर सीएम सुवेंदु अधिकारी सीधी नजर रख रहे हैं। उन्होंने गुरुवार दोपहर पश्चिम बंगाल विधानसभा में कहा कि गोदाम बनाने की योजना को 17 जनवरी को मंजूरी दी गई थी। इस पर हकीम और योजना की जांच करने वाले संबंधित केएमसी इंजीनियरों के हस्ताक्षर थे।
पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर भी साधा निशाना
इस दौरान मुख्यमंत्री अधिकारी ने पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने सदन में कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और जबरन वसूली के जरिए ‘सिटी ऑफ जॉय’ को ‘सिटी ऑफ डेथ’ में बदल दिया। सुवेंदु ने कहा कि यह आपके पापों का नतीजा है। आपने अतीत में इमारतें गिरने से हुए कई हादसों से कोई सबक नहीं सीखा। मंजूर किए गए प्लान पर पूर्व मेयर के हस्ताक्षर हैं। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने सदन को यह भी बताया कि मंजूर किए गए प्लान पर तृणमूल कांग्रेस के चार बार विधायक रहे हकीम के अलावा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रंजन दास असिस्टेंट इंजीनियर निर्मलेंदु सरकार और सब असिस्टेंट इंजीनियर अमीनुर शेख के भी हस्ताक्षर थे। इस दौरान उन्होंने केएमसी के उस बोर्ड पर भी आरोप लगाया, जो पहले तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में था कि उसने आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक और अत्याधुनिक उपकरण नहीं खरीदे।
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बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार-सुवेंदु अधिकारी
उन्होंने विधानसभा में यह भी दावा किया कि केएमसी इलाके में कई बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसी ज्यादातर गड़बड़ियों के पीछे 'काली' नाम का एक व्यक्ति था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काली की गिरफ्तारी के बाद सारी जानकारी सामने आ जाएगी। काली केएमसी के मंजूरी वाले प्लान को प्रभावित करता था। ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाइपास पर तृणमूल भवन का निर्माण उसी ने करवाया था। एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हम कार्रवाई करेंगे और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी
बताया जा रहा है कि यह वेयरहाउस श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट की लीज पर ली गई जमीन पर बनाया जा रहा था। मलबे में अभी भी लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए उपलब्ध सभी संसाधनों को लगाया गया है। सेना के GPR सिस्टम की मदद से मलबे के नीचे जीवन के संकेत खोजे जा रहे हैं। यह उपकरण मलबे के भीतर हलचल और शरीर की धड़कनों तक का पता लगाने में सक्षम है। इसके अलावा विशेष कैमरे भी मलबे के नीचे भेजे गए हैं, जबकि सक्रिय मोबाइल फोन के सिग्नल की मदद से संभावित फंसे लोगों की लोकेशन तलाशने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तक पांच लोग किए गए गिरफ्तार
हादसे के सिलसिले में पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें वेयरहाउस मालिक शंभूनाथ बेहरा, स्ट्रक्चरल इंजीनियर कमल सामंता, अयान ट्रेडर्स के सुपरवाइजर गुलजार हुसैन, श्रमिक आपूर्तिकर्ता दिवाकर भंडारी और अब्दुल हमीद शामिल हैं।
इन धाराओं में पुलिस ने दर्ज किया मामला
कोलकाता पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गैर-इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि हादसे के कारणों, निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों के पालन और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं की गहन जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां लगा रहीं इस बात का पता
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या निर्माण या सुरक्षा मानकों में किसी तरह की लापरवाही इस भीषण हादसे की वजह बनी। वहीं राहतकर्मियों की प्राथमिकता अब भी मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
