Who is Tariq Mansoor: साल 2024 के आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नई टीम का शनिवार (29 जुलाई, 2023) को ऐलान हुआ। पार्टी चीफ जेपी नड्डा के नेतृत्व वाले इस दल में कुल 38 चेहरे हैं। दो-चार नामों को छोड़ दें तो अधिकतर लोग पार्टी के पुराने और प्रतिबद्ध नेता ही हैं। हालांकि, इस स्पेशल-38 टीम में जिन नामों की सर्वाधिक चर्चा हुई, उनमें तारिक मंसूर भी हैं। उनका अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू), पसमांदा और पढ़े-लिखे मुस्लिमों से सीधा कनेक्शन है।
तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वीसी रह चुके हैं। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
वह एएमयू (एनआरसी और सीएए विरोधी प्रदर्शनों का स्थल भी रहा) के वाइस चांसलर (वीसी) रह चुके हैं। बीजेपी उनके जरिए पसमांदा मुसलमानों और पढ़े-लिखे मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ को मजबूत करना चाहती है। मंसूर यूपी विधान परिषद के लिए चुने जा चुके हैं और बीते कुछ बरसों में वह बीजेपी की ओर से इस पद के लिए चुने गए चौथे मुस्लिम थे।
मंसूर मूल रूप से अलीगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, जहां सूबे के मतदाताओं में लगभग 19% मुस्लिम हैं और कम से कम 30 लोकसभा सीटों पर उनकी अच्छी खासी मौजूदगी है। खास बात यह है कि इनमें से वे 15 से 20 निर्वाचन क्षेत्रों में परिणाम तय करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
वैसे, कम ही लोग जानते हैं कि मंसूर एएमयू को "मध्यम मार्ग" पर चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने इसके अलावा मुगल राजकुमार दारा शिकोह की शिक्षाओं (हिंदू-मुस्लिम एकता और शांति पर) को बढ़ावा देने के लिए आरएसएस के साथ मिलकर काम भी किया है। आरएसएस के एक पदाधिकारी की मानें तो मंसूर ने दारा शिकोह प्रोजेक्ट पर अपने काम से संघ के नेतृत्व को प्रभावित किया था।
प्रोफेसर मंसूर एएमयू के इतिहास में ऐसे पहले वीसी हैं, जिनकी करीबियां बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से रही हैं, जबकि पहले रहे वीसी के सियासी संबंध जरूर रहे लेकिन वे गैर-बीजेपी (जाकिर हुसैन से लेकर हामिद अंसारी तक) थे।
दरअसल, भाजपा ने शनिवार को प्रदेश इकाइयों के नए संगठन महासचिवों की नियुक्ति की है। 38 लोगों में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 12 राष्ट्रीय सचिव और आठ राष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए हैं। छह लोग इनमें यूपी से हैं, जबकि चुनावी राज्य तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़ और राजस्थान के लोग भी हैं। वहीं, बीजेपी ने फणींद्र नाथ शर्मा को पार्टी की हरियाणा प्रदेश इकाई का महासचिव (संगठन) नियुक्त किया। इसी पद पर पार्टी ने जी आर रवींद्र राजू को असम और त्रिपुरा इकाइयों का कार्य सौंपा है। राजू और शर्मा दोनों अपने पदों की अदला-बदली करेंगे। विवेक दाधाकर पार्टी की अंडमान और निकोबार इकाई में महासचिव (संगठन) के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
अपनी प्रदेश इकाइयों में भाजपा के महासचिव (संगठन) आम तौर पर आरएसएस से लिए जाते हैं और इसकी नीतियों तथा कार्यक्रमों के निष्पादन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच एक कड़ी के रूप में काम करते हैं। वैसे, इससे पहले दिन में भाजपा ने अपने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में बदलाव किया।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी का पूरा जोर चुनावी राज्यों पर ही है और इस कड़ी में सबसे अहम लोकसभा चुनाव है। 2024 के आम चुनाव से पहले करीब नौ सूबों में चुनाव होंगे, जिनमें म.प्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना पर सर्वाधिक ध्यान दिया गया है। मंसूर के अलावा दूसरे जिस नाम की इन 38 चेहरों में अधिक चर्चा हुई, वह राधा मोहन अग्रवाल हैं। वह यूपी के गोरखपुर से नाता रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि उनका सीएम योगी आदित्यनाथ से वैचारिक मतभेद रहा है।
