Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास प्रदर्शन के चलते बार-बार होने वाले ट्रैफिक डायवर्जन और आम लोगों को होने वाली परेशानी का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक वकील विकास शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अर्जी दाखिल कर इस मामले में सुओ मोटो कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट (फाइल फोटो)
अर्जी में कहा गया है कि 2 अक्टूबर 2026 से जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के चलते ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन की स्थिति बनी हुई है। जंतर-मंतर रोड, पार्लियामेंट स्ट्रीट, टॉल्स्टॉय मार्ग, अशोका रोड और कनॉट प्लेस, पटेल चौक तथा जीपीओ की ओर जाने वाले रास्ते प्रभावित होने का जिक्र किया गया है।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए रास्ता सुगम रखने की मांग
अर्जी में खास तौर पर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि सेंट्रल दिल्ली के इस हिस्से में RML अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज समेत कई महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन और रास्तों में रुकावट से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है।
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अर्जी में कहा गया है कि किसी महिला के प्रसव या किसी मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत होने पर उसे प्रदर्शन या बैरिकेडिंग के बीच से रास्ता तलाशने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए एंबुलेंस कॉरिडोर, अस्पताल तक पहुंचने वाले रास्ते और चेकपॉइंट पर सहायता की व्यवस्था जरूरी है।
दिव्यांगों के लिए भी सुगम रास्ते की मांग
अर्जी में दिव्यांग लोगों की आवाजाही का भी मुद्दा उठाया गया है। कहा गया है कि सिर्फ वैकल्पिक रास्ता बता देना पर्याप्त नहीं है। वैकल्पिक रास्ता ऐसा होना चाहिए, जिस पर व्हीलचेयर, वॉकिंग एड या दृष्टिबाधित व्यक्ति आसानी से आ-जा सके। बैरिकेडिंग के दौरान पैदल रास्ते, रैंप, सुगम क्रॉसिंग और पिकअप-ड्रॉप प्वाइंट उपलब्ध रहने चाहिए।
मजदूरों और कर्मचारियों की रोजी-रोटी का भी मुद्दा
अर्जी में दैनिक मजदूरों, घरेलू कामगारों, सिक्योरिटी गार्ड, डिलीवरी वर्कर्स, ड्राइवर और स्ट्रीट वेंडर्स की परेशानियों का भी जिक्र किया गया है। कहा गया है कि रास्ते बाधित होने से इन लोगों को काम पर पहुंचने में दिक्कत होती है और उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है। सेंट्रल दिल्ली में बड़ी संख्या में सरकारी कार्यालय होने का हवाला देते हुए कहा गया है कि ट्रैफिक व्यवधान का असर कर्मचारियों के साथ-साथ सरकारी दफ्तरों में आने वाले आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
वकीलों और मुकदमे से जुड़े लोगों की परेशानी का भी जिक्र
अर्जी में अदालत आने-जाने वाले वकीलों, पक्षकारों, गवाहों और कोर्ट स्टाफ की परेशानी का भी मुद्दा उठाया गया है। कहा गया है कि अचानक होने वाली देरी से कोर्ट में पेशी, जरूरी कानूनी काम, फाइलिंग और अन्य निर्धारित कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों के अधिकार में संतुलन की मांग
अर्जी में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लेख किया गया है। साथ ही कहा गया है कि इन अधिकारों के साथ दूसरे नागरिकों के आवागमन, आजीविका, जीवन और सुरक्षा के अधिकारों का भी संतुलन जरूरी है।
दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट सुओ मोटो कार्यवाही शुरू करे और संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करे। इनमें अस्पतालों तक एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही, गर्भवती महिलाओं, दिव्यांगों और मरीजों के लिए सहायता तथा सार्वजनिक रास्तों पर अवैध अवरोध हटाने जैसे कदम शामिल हैं।
