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भारत में किस पहाड़ को कहा जाता है गोल्डन माउंटेन? उत्तराखंड, हिमाचल छोड़िए, इस जगह पर है मौजूद

India's golden mountain: कंचनजंगा हरे-भरे जंगलों और दुर्लभ वन्यजीवों से घिरा हुआ है। कंचनजंगा बायोस्फीयर रिजर्व, जो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, इसकी अनोखी बायोडायवर्सिटी की रक्षा करता है। भूवैज्ञानिक नजरिए से कंचनजंगा को एक जवान पहाड़ माना जाता है। यह लगभग 50 मिलियन साल पहले इंडियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से बना था।

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भारत में किस पहाड़ को कहा जाता है गोल्डन माउंटेन?

Golden Mountain of India: पहाड़ हमेशा से हैरानी और प्रेरणा का सोर्स रहे हैं। कुछ चोटियों की तारीफ सिर्फ उनकी ऊंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी अनोखी सुंदरता, रहस्यमयी आकर्षण और सांस्कृतिक महत्व के लिए भी की जाती है। वे यात्रियों, तीर्थयात्रियों और प्रकृति प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। इनमें से कई पहाड़ दिलचस्प कहानियों, किंवदंतियों और परंपराओं से घिरे हुए हैं जो उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में मशहूर और सम्मानित बनाते हैं और दूर-दूर से लोगों को अपनी ओर खींचते हैं।

भारत का सुनहरा पहाड़ (Golden Mountain of India)

भारत का सुनहरा पहाड़ कहा जाने वाला पहाड़ कंचनजंगा (Kanchenjunga) है। यह दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा पहाड़ है, जिसकी ऊंचाई 8,586 मीटर (28,169 फीट) है। कंचनजंगा सिक्किम (भारत) और नेपाल की सीमा पर स्थित है और विशाल हिमालय का हिस्सा है।

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इसकी सुनहरी चमक के कारण ही इसे यह नाम मिला है। जैसे ही सूरज की रोशनी इसकी बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ती है, पहाड़ एक चमकदार, सुनहरे रंग से चमक उठता है, जिससे ऐसा लगता है जैसे इसे सोने से तराशा गया हो।

कंचनजंगा के दूसरे नाम

कंचनजंगा को सिर्फ गोल्डन माउंटेन के नाम से ही नहीं जाना जाता। समय के साथ, इसे कई और नाम भी मिले हैं:

-बर्फ का खजाने: जो सोना, चांदी, रत्न, अनाज और पवित्र ग्रंथों का प्रतीक हैं।

-सोया हुआ बुद्ध: इसकी चोटियां आराम करते हुए बुद्ध जैसी दिखती हैं।

-सेवा लुंगमा: आस-पास के इलाकों में एक स्थानीय नाम।

कंचनजंगा के बारे में दिलचस्प बातें

-टेक्टोनिक गतिविधि के कारण हिमालय कंचनजंगा अभी हर साल लगभग 5 mm ऊपर उठ रहा है।

-इस पहाड़ के नाम, कंचनजंगा का मतलब है 'बर्फ के पांच खजाने।'

-आंकड़ों के अनुसार, हिमस्खलन और बदलते मौसम के कारण कंचनजंगा से नीचे उतरना चढ़ने से ज्यादा खतरनाक है।

-यह इलाका 400 से ज्यादा ऑर्किड प्रजातियों और हिमालयन ब्लू पॉपी जैसे औषधीय पौधों का घर है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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