भारत की ‘अखंड प्रहार’ रणनीति ने बदला युद्ध का समीकरण, आत्मनिर्भर ताकत से चीन-पाकिस्तान को सख्त संदेश

ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की चर्चाओं के बीच रेगिस्तान में भारतीय सेना द्वारा आयोजित त्रिसेवा युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल’ के तहत ‘अखंड प्रहार’ अभ्यास ने आधुनिक युद्ध की दिशा में भारत की सामरिक और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। लेफ्टनेंट जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में हुए इस अभ्यास में कोणार्क कॉर्प्स, रुद्र ब्रिगेड और वायुसेना ने संयुक्त रूप से साइबर, स्पेस, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का परिचय दिया। स्वदेशी तकनीक से लैस सिस्टम्स ने आत्मनिर्भर भारत की रक्षा शक्ति को मजबूत किया। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह अभ्यास भारत की थ्री डोमेन वॉरफेयर रणनीति का सशक्त उदाहरण है, जो भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

Akhand Prahar: दिल्ली बम धमाके और 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' की चर्चाओं के बीच थार के तपते रेगिस्तान में भारतीय सेना ने ऐसा दृश्य रचा जिसने न केवल पाकिस्तान और चीन को झकझोर दिया, बल्कि पूरी दुनिया को भारत की नई युद्धनीति का अंदाजा करा दिया। दक्षिणी कमान के नेतृत्व में आयोजित त्रिसेवा युद्धाभ्यास ‘त्रिशूल’ के तहत हुए ‘अखंड प्रहार’ अभ्यास ने आधुनिक युद्ध के हर पहलू में भारत की तकनीकी और सामरिक क्षमता का नया मानक तय किया।

Akhand prahar

दक्षिणी कमान के नेतृत्व में आयोजित हुआ त्रिसेवा युद्धाभ्यास

लेफ्टनेंट जनरल धीरज सेठ ने संभाली कमान

इस युद्धाभ्यास की कमान लेफ्टनेंट जनरल धीरज सेठ (PVSM, AVSM) ने संभाली। उन्होंने कोणार्क कॉर्प्स की ऑपरेशनल तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की। रेगिस्तानी इलाके में हुए इस अभ्यास ने यह साबित किया कि भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रही, बल्कि साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक और ड्रोन-आधारित आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।

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