भारत में मंदिर केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास के सबसे बड़े केंद्र भी हैं। हर दिन यहां लाखों श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार नकद दान, सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात और कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। कुछ मंदिर ऐसे हैं जहां एक दिन में आने वाला चढ़ावा कई छोटे शहरों के सालाना बजट से भी ज्यादा होता है। भारत के कई बड़े मंदिरों में चढ़ावे की गिनती किसी बैंक के ट्रेजरी रूम से कम नहीं होती। कड़ी सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, बैंक अधिकारियों की मौजूदगी और सख्त नियमों के बीच करोड़ों रुपये का हिसाब-किताब किया जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन मंदिरों में आने वाले करोड़ों रुपये, सोने-चांदी और बहुमूल्य उपहारों का हिसाब कैसे रखा जाता होगा? आखिर कौन गिनता है इतना पैसा? गिनती के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम होते हैं? और क्यों कुछ मंदिरों में चढ़ावे की गिनती करने वालों को बिना जेब वाले कुर्ते और बिना नाड़े वाले पायजामे पहनाए जाते हैं? आज हम आपको भारत के उन 6 सबसे अमीर मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां हर साल करोड़ों नहीं बल्कि हजारों करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है। साथ ही जानेंगे कि आखिर मंदिरों में दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया क्या होती है और क्यों इसे बेहद गोपनीय और अनुशासित तरीके से अंजाम दिया जाता है।
तिरुपति बालाजी मंदिर, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, जिसे तिरुपति बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है, भारत का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा संचालित इस मंदिर की आय के कई प्रमुख स्रोत हैं। हुंडी में मिलने वाला दान, प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू प्रसाद की बिक्री, श्रद्धालुओं के लिए आवास सुविधाएं, बाल दान से होने वाली नीलामी और विभिन्न निवेशों से प्राप्त ब्याज इसके प्रमुख राजस्व स्रोत हैं। इन सभी माध्यमों से मंदिर को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की आय होती है। अनुमान है कि मंदिर की वार्षिक आय लगभग 4,700 करोड़ से 5,400 करोड़ रुपये के बीच रहती है, जिसके चलते तिरुपति बालाजी मंदिर देश के सबसे समृद्ध धार्मिक संस्थानों में शामिल है।
हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां नकद दान के साथ सोना, चांदी और आभूषण भी चढ़ाते हैं। मंदिर के पास हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति और बड़े पैमाने पर सोने का भंडार बताया जाता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां चढ़ावा कई गुना बढ़ जाता है।
तिरुपति बालाजी मंदिर, आंध्र प्रदेश
कैसे होती है दान की गिनती
आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर (तिरुमला) में दान की गिनती 'परकामणि' (Parakamani) नामक प्रक्रिया के जरिए होती है । यह पूरी प्रक्रिया 'तिरुमला तिरुपति देवस्थानम' (TTD) के अधिकारियों द्वारा 24 घंटे काम करने वाले AI-संचालित उच्च-रिजॉल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरों और मल्टी-लेयर सुरक्षा की कड़ी निगरानी में होती है। टीटीडी के स्थायी कर्मचारी और पुजारियों की देखरेख में दान को नकद, सिक्कों, सोने, और चांदी के आभूषणों में अलग किया जाता है। नोटों और कीमती वस्तुओं की गिनती सख्त निगरानी वाले हॉल में की जाती है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। वर्ष 2011 में मंदिर की भूमिगत तिजोरियों से मिले सोने, हीरे-जवाहरात और अन्य बहुमूल्य खजाने ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था। हालांकि मंदिर की अधिकांश संपत्ति ऐतिहासिक खजाने के रूप में संरक्षित है, फिर भी दान, निवेश और अन्य स्रोतों से इसकी वार्षिक आय लगभग 650 से 700 करोड़ रुपये आंकी जाती है। अपने गुप्त खजानों के लिए प्रसिद्ध, तिरुवनंतपुरम के इस मंदिर में ₹1.2 लाख करोड़ की संपत्ति है, जिसमें सोने के आभूषण, पन्ना, हीरे और गुप्त भूमिगत कक्षों से प्राप्त प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं।
पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल
कैसे होती है गिनती
द्मनाभस्वामी मंदिर में दान (कनिका) की गिनती सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासनिक समिति, न्यायाधीशों और बैंक अधिकारियों की कड़ी निगरानी में होती है। दान पेटियों (हंडियों) से नकदी व आभूषण निकालकर पारदर्शी तरीके से गिने, दर्ज और बैंक में जमा किए जाते हैं।
गुरुवायूर देवस्वम, केरल
गुरुवायूर देवस्वम (श्रीकृष्ण मंदिर) की कुल संपत्ति में ₹1,737 करोड़ से अधिक की बैंक जमा राशि और 271 एकड़ जमीन शामिल है । इसे भक्तों से दान के रूप में 260 किलोग्राम से अधिक सोना और भारी मात्रा में चांदी भी प्राप्त होती है। मंदिर का अनुमानित वार्षिक राजस्व लगभग ₹400 करोड़ है। मंदिर को श्रद्धालुओं के चढ़ावे, पूजा-पाठ और प्रसाद की बिक्री से हर साल लगभग ₹400 करोड़ की आय होती है।
कैसे होती है गिनती
गुरुवायूर देवस्वम (Guruvayur Devaswom) में दान पेटियों (हुंडी) की गिनती और आय-व्यय का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ होता है, जिसकी देखरेख गुरुवायूर देवस्वम प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। यहां गिनती प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए स्थानीय राष्ट्रीयकृत बैंकों (जैसे CSB बैंक या यूनियन बैंक ) के कर्मचारी और अधिकारी मंदिर प्रशासन की देखरेख में सीधे शामिल होते हैं। नकद रुपयों की गिनती के साथ-साथ, दान में आए सोने और चांदी का वजन करके उसे प्रमाणित स्वर्ण मूल्यांककों (Gold Appraiser) द्वारा जांचा जाता है ।
सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई
मुंबई का सिद्धिविनायक गणपति मंदिर देश के सबसे लोकप्रिय और समृद्ध मंदिरों में शामिल है। फिल्मी सितारों, उद्योगपतियों और आम श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहां पहुंचती है। मंदिर को हर साल करोड़ों रुपये का दान मिलता है। नकद चढ़ावे के अलावा सोना और चांदी भी बड़ी मात्रा में दान किए जाते हैं। मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 182 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय दर्ज की है। यह राशि पिछले वर्ष के मुकाबले 35 प्रतिशत अधिक है । मंदिर की इस कुल कमाई का अधिकांश हिस्सा भक्तों द्वारा दान पेटियों, ऑनलाइन माध्यमों और सोने-चांदी के चढ़ावे से आता है।
सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई
कैसे होती है गिनती
गिनती के लिए मंदिर के सुरक्षाकर्मी, बैंक अधिकारी, और ट्रस्ट के सदस्य शामिल होते हैं। गिनती करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले कपड़े पहनने होते हैं और अंदर मोबाइल फोन ले जाने की सख्त मनाही होती है। सप्ताह के निर्धारित दिनों में दान पेटियों को सील के साथ मंदिर की चौथी मंजिल पर ले जाया जाता है। नकद राशि की छंटनी के लिए आधुनिक नोट गिनने वाली मशीनों का उपयोग किया जाता है। विदेशी मुद्रा और चिल्लर को अलग गिना जाता है। भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों व सिक्कों को अलग कर दिया जाता है। बाद में इनका मूल्यांकन करके इन्हें सार्वजनिक नीलामी के जरिए ट्रस्ट की आय में जोड़ा जाता है। पूरी राशि का मिलान करने के बाद बैंककर्मी इसकी रसीद ट्रस्ट को सौंपते हैं। मंदिर के खातों का नियमित रूप से ऑडिट भी किया जाता है।
शिरडी साईं बाबा मंदिर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के शिरडी में स्थित साईं बाबा मंदिर देश के सबसे ज्यादा दान प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में से एक है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिरडी साईं बाबा मंदिर भारत के सबसे अमीर और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। ट्रस्ट की वार्षिक आय लगभग ₹638 करोड़ से ₹648 करोड़ के बीच रहती है । इस कमाई के मुख्य स्रोत दान, चढ़ावा और सावधि जमा (FD) से प्राप्त ब्याज हैं। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर ट्रस्ट को हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का दान प्राप्त होता है। ट्रस्ट इन पैसों का उपयोग धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में भी करता है।
शिरडी साईं बाबा मंदिर
कैसे होती है गिनती
साईं बाबा मंदिर परिसर में कुल 43 दानपात्र रखे गए हैं। सप्ताह में दो दिन, यानी मंगलवार और शुक्रवार को ये सभी दानपात्र एक-एक कर खोले जाते हैं। गिनती की पूरी प्रक्रिया के लिए एक विशेष भूमिगत हॉल बनाया गया है, जहां चारों तरफ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहती है। दान की गिनती के दौरान श्रद्धालु, शिर्डी गांव के प्रतिनिधि, मंदिर कर्मचारी और बैंक अधिकारियों समेत 200 से अधिक लोग मौजूद रहते हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया सामूहिक रूप से संपन्न की जाती है। खास बात यह है कि इस कार्य में शामिल लोगों को किसी प्रकार का मानदेय या पारिश्रमिक नहीं दिया जाता। हॉल में जाने वाले सभी लोगों को बिना कॉलर और बिना जेब का अद्धी कुर्ता और इलास्टिक लगा पैजामा ट्रस्ट की तरफ से पहनने के लिए दिया जाता है। यानी पायजामा में नाड़ा भी नहीं होता। बैंककर्मी एक दिन की गिनती में इकट्ठा हुई पूरी नकदी की रसीद बनाकर ट्रस्ट को सौंपते हैं और नकदी लेकर पूरी सुरक्षा के साथ चले जाते हैं।
वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू-कश्मीर
त्रिकुटा पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी का मंदिर भारत के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में गिना जाता है। माता वैष्णो देवी मंदिर की कुल वार्षिक आय लगभग ₹500 करोड़ है, जो इसे देश के शीर्ष सबसे अमीर मंदिरों में शामिल करती है। इस आय का मुख्य स्रोत दान, प्रसाद की बिक्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया कैश, सोना और चांदी हैं। श्राइन बोर्ड के आरटीआई (RTI) आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में दान में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में (जनवरी तक) मंदिर को लगभग ₹171.90 करोड़ का दान प्राप्त हुआ था। मंदिर को नकद दान के साथ बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी प्राप्त होता है। मंदिर बोर्ड इस धन का उपयोग यात्रियों की सुविधाओं और विकास कार्यों में करता है।
वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू-कश्मीर
कैसे होती है गिनती
श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में दान की गिनती श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी में की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विशेष तकनीकी और प्रशासनिक उपाय अपनाए जाते हैं। मंदिर और यात्रा मार्ग पर रखी दान पेटियों को तय समय पर खोला जाता है। गिनती में लगे कर्मचारियों को पारंपरिक वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें मोबाइल या पर्स जैसी निजी वस्तुएं अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होती है। पूरी गिनती प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में होती है, ताकि सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे।
