रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 अप्रैल 2026 को विशाखापट्टनम में स्थित Naval Science and Technological Laboratory (NSTL) में अत्याधुनिक 'लार्ज कैविटेशन टनल' (LCT) सुविधा की आधारशिला रखी। यह सुविधा भारत की नौसेना अनुसंधान और परीक्षण क्षमताओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राजनाथ सिंह ने रखी नई नौसेना परीक्षण सुविधा की नींव (फोटो- PIB)
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लार्ज कैविटेशन टनल पर क्या बोले रक्षा मंत्री?
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि अब तक भारत को कई महत्वपूर्ण परीक्षणों के लिए विदेशों की ओर देखना पड़ता था, लेकिन इस नई सुविधा के शुरू होने के बाद देश अपने जहाजों, पनडुब्बियों और अन्य नौसैनिक उपकरणों का परीक्षण स्वदेश में ही कर सकेगा। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी और तकनीकी क्षमता भी बढ़ेगी।
सुविधा से क्या होगा फायदा?
उन्होंने बताया कि यह सुविधा केवल एक इमारत नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली है जो भारत की नौसैनिक तकनीक को नई दिशा देगी। इससे जहाजों और पनडुब्बियों के प्रणोदन सिस्टम, शोर नियंत्रण और स्टेल्थ क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह भविष्य में आधुनिक युद्धपोत और पनडुब्बियों के डिजाइन और विकास के लिए मजबूत आधार साबित होगी।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर भारत
रक्षा मंत्री ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री Narendra Modi के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्वदेशी तकनीक का विकास बेहद जरूरी है और भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके चालू होने के बाद भारत अपने जहाज निर्माण और नौसैनिक अनुसंधान क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम और आगे बढ़ाएगा।
सीकीपिंग एंड मैन्यूवरिंग बेसिन का रक्षा मंत्री ने किया दौरा
कार्यक्रम के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अध्यक्ष Sameer V. Kamat ने NSTL की विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी। रक्षा मंत्री ने 'सीकीपिंग एंड मैन्यूवरिंग बेसिन' का दौरा भी किया, जहां टॉरपीडो, नौसैनिक माइंस, डिकॉय और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUV) जैसी आधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया।
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