भारत वैश्विक मंच पर एक 'इलेक्शन सुपरपावर' के रूप में उभर रहा है। आधुनिक और डिजिटल युग में जब दुनिया के कई बड़े देश अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनावी निष्पक्षता को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, तब भारत दिखा रहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कैसे शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो रहा है। यही कारण है कि कई देश अपने यहां के चुनाव में भारत की मदद लेते रहे हैं, अब इंडोनेशिया (Indonesia) भी इसी में शामिल हो गया है। इंडोनेशिया के चुनाव में भारत की ईवीएम (EVM) मशीनें प्रयोग होंगी।
भारत और इंडोनेशिया के बीच समझोता
करीब 28.8 करोड़ की आबादी वाला और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र -इंडोनेशिया- अपने चुनावी ढांचे को आधुनिक और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए भारत की ओर देख रहा है। दोनों देशों के बीच चुनाव प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत भारत, इंडोनेशिया की जरूरतों के मुताबिक तैयार की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVMs) वहां निर्यात करेगा। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा कर भारत की डिजिटल गवर्नेंस, चुनाव पर्यवेक्षण प्रणाली और मतदाता जागरूकता अभियानों का बारीकी से अध्ययन किया है, जिसे अब इंडोनेशिया में लागू करने की तैयारी है।
28 देशों में फैला भारतीय चुनाव मॉडल का प्रभाव
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की तकनीकी आज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। भारत ने अब तक दुनिया के 28 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के साथ आधिकारिक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों में- ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, फिजी, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं। भारत तीन प्रमुख वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए अपनी विशेषज्ञता साझा कर रहा है।
कई देशों के पास भारतीय ईवीएम
भारतीय ईवीएम पहले से ही कई देशों में चुनाव के लिए इस्तेमाल की जाती रही है। भूटान वो पहला देश है, जहां भारतीय ईवीएम का इस्तेमाल सबसे पहले हुआ था। नेपाल भी भारतीय ईवीएम का प्रयोग कर चुका है। इसके अलावा भारतीय इवीएम का सबसे बड़ा खरीददार नामीबिया है, जहां भारत के लिए एक बड़ी व्यावसायिक सफलता साबित हुआ, जिसने न केवल अपने राष्ट्रीय चुनावों में मेड-इन-इंडिया ईवीएम का इस्तेमाल किया, बल्कि भारत की वीवीपीएटी तकनीक पर भी भरोसा जताया।
भारतीय स्याही पर भी दुनिया को भरोसा
भारत का योगदान केवल ईवीएम या डिजिटल टूल्स तक ही सीमित नहीं है। चुनाव में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने वाले सबसे बड़े हथियार-अमिट स्याही (Indelible Ink)- के मामले में भी दुनिया भारत पर निर्भर है। मेडागास्कर, म्यांमार, कंबोडिया, फिजी, भूटान, सिएरा लियोन और मंगोलिया जैसे विविध भौगोलिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले देशों के चुनावों में भारत में बनी इस स्याही का इस्तेमाल किया गया है।
