प्रवर्तन निदेशालय (ED) जयपुर जोनल ऑफिस ने एक बड़ी राहत देते हुए उदयपुर के रॉयल राजविलास प्रोजेक्ट की 354 फ्लैट, 17 कॉमर्शियल यूनिट और 2 प्लॉट — कुल करीब 175 करोड़ की संपत्तियां — वापस दिलाई हैं।
इन संपत्तियों को अब उदयपुर एंटरटेनमेंट वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड (UEWPL) की नई प्रबंधन टीम को सौंपा गया है, जिससे 213 असली घर खरीदारों को फायदा मिलेगा, जो पिछले 12 सालों से अपने घरों का इंतजार कर रहे थे।
क्या है मामला?
यह मामला सिंडिकेट बैंक धोखाधड़ी केस से जुड़ा है, जिसमें भरत बोंब और उनके साथियों ने 2011 से 2016 के बीच 1267.79 करोड़ की धोखाधड़ी की थी। उन्होंने फर्जी चेक, बिल और इंश्योरेंस पॉलिसियों के जरिए बैंक से पैसा हड़पा था। इस मामले में ईडी ने अब तक 535 करोड़ की संपत्तियां अटैच की थीं, जिनमें 83.51 करोड़ की संपत्तियां रॉयल राजविलास प्रोजेक्ट से जुड़ी थीं।
कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह मामला एनसीएलटी मुंबई, राजस्थान हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 2021 में कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) में डाला गया, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे घर खरीदारों के हित में समाधान निकालें।
213 खरीदार पूरी तरह बोना फाइड निवेशक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, ईडी ने 221 खरीदारों के दावे की जांच की और पाया कि 213 खरीदार पूरी तरह बोना फाइड (सच्चे) निवेशक हैं। ईडी ने इन खरीदारों को राहत देने का फैसला किया और केवल 8 खरीदारों के 11 फ्लैट (8.65 करोड़ मूल्य के) को संदिग्ध पाया।
10 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की रिपोर्ट के आधार पर संपत्तियों की बहाली का आदेश दिया। अदालत ने ईडी की प्रोएक्टिव (सक्रिय) भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि एजेंसी ने “निर्दोष घर खरीदारों के हितों की रक्षा में सराहनीय कार्य” किया है।
यह फैसला न केवल 213 परिवारों को राहत देता है बल्कि यह भी दिखाता है कि ईडी अब केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि पब्लिक इंटरेस्ट और रिस्टोरेटिव जस्टिस के लिए भी प्रतिबद्ध है। यह कदम ईडी के प्रति जनता का भरोसा मजबूत करने वाला साबित हुआ है।
