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दानपेटी से दस्तावेजों तक... राम मंदिर चंदा चोरी की जांच में क्या-क्या मिला? SIT इनवेस्टिगेशन की इनसाइड स्टोरी

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे वैसे इसमें नए खुलासे हो रहे हैं। इस बीच, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट न्यास ने अपनी छह जुलाई को होने वाली बैठक का एजेंडा जारी किया है। सोमवार को होने वाली इस बैठक के बीच हम जानेंगे कि मामले में एसआईटी जांच अभी कहां तक पहुंची है और उसने क्या-क्या बरामद किया है, साथ ही यह भी कि इसमें आगे कौन से कदम उठाए जा सकते हैं....

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राम मंदिर अयोध्या
Edited by: Shiv Shukla
Updated Jul 4, 2026, 21:53 IST
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अयोध्या में राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ है। जब मंदिर निर्माण के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो उसके बाद पूरे देश के लोगों ने बढ़-चढ़कर मंदिर निर्माण के लिए दान दिया। वहीं अब जबकि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की खबर सामने आई तो इसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शुरू में तो इसे केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की तरह देखा गया था, लेकिन जैसे-जैसे आरोपों की जांच आगे बढ़ रही है, आरोप और भी गंभीर होते जा रहे हैं। अब दानपेटियों की सुरक्षा व्यवस्था, नकदी गिनने की प्रक्रिया, बैंक खातों का रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका, संदिग्ध बैंक लेनदेन और करोड़ों की संपत्तियों तक जांच का दायरा पहुंच गया।

अब इस पूरे मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल)की जांच निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। एक ओर आठ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं तो दूसरी ओर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने यह दावा करके मामले को और गंभीर बना दिया कि उन्होंने अप्रैल 2024 में ट्रस्ट को भेंट की गई सवा किलो सोने से मढ़ी रामचरितमानस की आज तक कोई रसीद नहीं मिली और अब वह पुस्तक भी नहीं मिल रही है।

ऐसे समय में छह जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं,जिसमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला होने के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलावों पर भी चर्चा हो सकती है।

सात जून से पहले ही मिल गए थे गड़बड़ी के संकेत

जून 2026 की शुरुआत तक मंदिर में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था। श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही थी और दान की राशि भी प्रतिदिन बढ़ रही थी। लेकिन इसी दौरान ट्रस्ट में नकदी के हिसाब-किताब में गड़बड़ी सामने आई। बाद की जांच में सामने आया कि सात जून से पहले ही संभावित वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिल चुके थे।

हालांकि सार्वजनिक रूप से यह मुद्दा तब सामने आया,जब सात जून को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। ट्रस्ट ने उस समय इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आंतरिक जांच में कोई बड़ी अनियमितता नहीं मिली है, लेकिन बाद की घटनाओं ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए।

13 जून को बनी एसआईटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत,पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया।

एसआईटी ने जांच की शुरुआत किसी आरोपी से पूछताछ से नहीं, बल्कि पूरी नकदी प्रबंधन प्रणाली को समझने से की। जांचकर्ताओं ने यह देखा कि दानपेटियां कब खुलती हैं, उनकी चाबियां किसके पास रहती हैं, नकदी कौन गिनता है, पैसा बैंक तक कैसे पहुंचता है और पूरी प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी निगरानी किस प्रकार होती है।

इसी दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा था। कई सीसीटीवी फुटेज निर्धारित अवधि तक सुरक्षित नहीं रखे गए थे। दानपेटियों की चाबियों की सुरक्षा व्यवस्था भी नियमों के अनुरूप नहीं थी और कई स्तरों पर जवाबदेही कमजोर दिखाई दी।

प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफआईआर

एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से आपराधिक जांच की सिफारिश की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई।

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

करीब 80 लाख रुपये और विदेशी मुद्रा बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों के कब्जे से लगभग 80 लाख रुपये नकद तथा विदेशी मुद्रा बरामद की। हालांकि जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पूरी राशि कथित गबन से जुड़ी है या नहीं। एसआईटी का मानना है कि यह बरामदगी केवल शुरुआती स्तर की हो सकती है। असली रकम इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है, इसलिए आरोपियों के बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों की विस्तृत जांच जारी है।

सीसीटीवी से बचने का कथित तरीका भी आया सामने

पूछताछ में आरोपी अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर जांच अधिकारियों को बताया कि दान गिनने वाली टीम को मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का फायदा उठाकर कथित तौर पर नकदी बाहर निकाली जाती थी। जांच के अनुसार, गिनती के दौरान एक व्यक्ति नकदी अलग करता था जबकि अन्य लोग उसे कैमरे की सीधी नजर से बचाने के लिए घेरा बनाकर खड़े हो जाते थे। आरोप है कि पहले पैसे वॉशरूम में छिपाए जाते थे और बाद में मौका मिलने पर उन्हें परिसर से बाहर निकाल लिया जाता था।

टिन्नू यादव के पास कैसे पहुंची चाबी?

पूरी जांच में सबसे गंभीर सवाल चाबियों को लेकर उठ रहा है। एसआईटी के अनुसार,आरोपी रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव के पास दान गिनने वाले कमरे की एक चाबी थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास रहती थी। नियमों के अनुसार चाबियों की सुरक्षा अत्यंत नियंत्रित होनी चाहिए थी, लेकिन जांच में पाया गया कि इस व्यवस्था में गंभीर लापरवाही हुई। टिन्नू यादव पहले चंपत राय का चालक रह चुका था। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसके पास चाबी कैसे पहुंची और कितने समय से वह इस व्यवस्था का हिस्सा था।

एसबीआई कर्मचारियों से भी हो रही पूछताछ

राम मंदिर में नकद दान की गिनती का कार्य भारतीय स्टेट बैंक की निगरानी में होता है। इसके लिए बैंक ने एक निजी एजेंसी को जिम्मेदारी दी हुई थी। कुल 14 लोगों की टीम दान की गिनती करती थी, जिसमें 11 बैंक कर्मचारी और तीन ट्रस्ट प्रतिनिधि शामिल थे। एसआईटी ने बैंक प्रबंधक सहित 10 से अधिक कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं यह पूरी घटना कुछ व्यक्तियों तक सीमित थी या इसमें व्यापक मिलीभगत भी शामिल थी।

बैंक खातों ने बढ़ा दिया शक

सूत्रों के अनुसार, चोरी का मामला सामने आने से पहले ट्रस्ट के खातों में प्रतिदिन लगभग 16 से 18 लाख रुपये जमा हो रहे थे। लेकिन जैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ और निगरानी बढ़ी,वही दैनिक जमा राशि बढ़कर लगभग 24 से 26 लाख रुपये तक पहुंच गई।

एसआईटी इसी अंतर को अपनी जांच का अहम आधार बना रही है। यदि श्रद्धालुओं की संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया था,तो फिर अचानक प्रतिदिन जमा होने वाली राशि में लाखों रुपये की बढ़ोतरी क्यों हुई? जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित चोरी कितने समय से चल रही थी और कुल कितनी राशि का गबन हुआ।

बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल खंगाल रही जांच एजेंसी

एसआईटी ने ट्रस्ट से जुड़े बैंक खातों के दस्तावेज, जमा पर्चियां, नकदी रिकॉर्ड और वित्तीय विवरण अपने कब्जे में लेकर उनका विश्लेषण शुरू कर दिया है। सिर्फ नकद बरामदगी पर निर्भर रहने के बजाय जांच एजेंसी डिजिटल ट्रेल की भी जांच कर रही है। आरोपियों के बैंक खातों में हुए लेनदेन, बड़ी नकद जमा, संदिग्ध ट्रांसफर और परिवार के सदस्यों के खातों तक की पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई आरोपियों के खातों में उनकी घोषित आय से कहीं अधिक रकम के लेनदेन सामने आने का दावा किया जा रहा है।

संपत्तियों पर भी कसता जा रहा शिकंजा

जांच के क्रम में अब पुलिस आरोपियों के मकानों,प्लॉट, हॉस्टल, कृषि भूमि और अन्य अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटा रही है। इनकी बाजार कीमत का आकलन कराया जा रहा है ताकि यदि अदालत अनुमति दे तो कथित अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियों से नुकसान की भरपाई की जा सके।

लवकुश मिश्रा की पत्नी की संपत्ति भी जांच के घेरे में

वहीं, जांच के दौरान आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम खरीदी गई जमीन भी एजेंसियों के रडार पर आ गई है। पुलिस के अनुसार अक्टूबर 2025 में सोहावल तहसील क्षेत्र में उनके नाम पर जमीन खरीदी गई थी, जिसकी रजिस्ट्री लगभग 8.8 लाख रुपये में हुई जबकि बाजार मूल्य लगभग 25 लाख रुपये बताया जा रहा है।

अयोध्या विकास प्राधिकरण ने निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के बाद पाया कि बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण किया जा रहा था। अब नोटिस जारी कर संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

केवल चढ़ावा ही नहीं, निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में आएंगे

एसआईटी अब पांच वर्षों के ऑडिट रिकॉर्ड की समीक्षा की तैयारी कर रही है। मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य भुगतान की भी जांच संभव है। यही वजह है कि जांच एजेंसी ने मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव सहित कई महत्वपूर्ण लोगों से पूछताछ की है। कुछ अन्य व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, अगर वित्तीय अनियमितताओं के अतिरिक्त कोई अन्य गड़बड़ी सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

सबकी नजरें 15 जुलाई की रिपोर्ट पर

उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का कार्यकाल बढ़ा दिया है और अब 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित गबन की वास्तविक राशि कितनी थी और यह कितने समय से चल रहा था,इसमें कितने लोग शामिल थे और क्या जांच की आंच ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक भी पहुंचेगी।

इसी बीच छह जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक भी बेहद अहम मानी जा रही है। इसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला होने के अलावा मंदिर प्रशासन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है।

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