Breaking News: महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को माफी मांगी। शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने की घटना पर पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे लिए सिर्फ एक नाम नहीं हैं। आज मैं अपने भगवान छत्रपति शिवाजी महाराज से सिर झुकाकर माफ़ी मांगता हूं। बता दें कि हाल ही में शिवाजी महाराज की प्रतिमा टूट गई थी, जिसके बाद विपक्ष द्वारा सरकार को घेरा जा रहा था।
पीएम मोदी।
पीएम मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना
प्रतिमा गिरने की घटना पर माफी मांगते हुए पीएम मोदी ने विपक्ष पर भी जोरदार प्रहार किया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे संस्कार अलग हैं, हम वो लोग नहीं हैं, जो भारत माता के महान सपूत, इस धरती के सपूत वीर सावरकर को गाली देते रहें और उनका अपमान करते रहें। वे माफ़ी मांगने के लिए तैयार नहीं हैं, वे अदालतों में जाकर लड़ने के लिए तैयार हैं।
महाराष्ट्र के लिए ऐतिहासिक दिन: पीएम मोदी
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज महाराष्ट्र की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन है, ये भारत की विकास यात्रा के लिए बहुत बड़ा दिन है। विकसित महाराष्ट्र, विकसित भारत के संकल्प का सबसे अहम हिस्सा है, इसलिए महाराष्ट्र के लिए लगातार बड़े फैसले लिए गए हैं। महाराष्ट्र में विकास के लिए ज़रूरी सामर्थ्य है, संसाधन हैं, समुद्री तट हैं और इन तटों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सदियों पुराना इतिहास है और यहां भविष्य की अपार संभावनाएं भी हैं। इन अवसरों का पूरा लाभ महाराष्ट्र को और देश को मिले इसके लिए आज वाढवण पोर्ट की नींव रखी गई है।
युवाओं को मिल रहे नए अवसरः पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के समुद्री तट पर विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है, हमने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया है, जलमार्गों का विकास किया है। इस दिशा में लाखों-करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है। निजी निवेश भी बढ़ा है। इसका लाभ हमारे युवाओं को मिल रहा है, उन्हें नए अवसर मिल रहे हैं। आज पूरी दुनिया की नजर वाढवण पोर्ट पर है। इससे इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल जाएगी।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "महाराष्ट्र का विकास मेरी बहुत बड़ी प्राथमिकता है... आज भारत की प्रगति में महाराष्ट्र बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है लेकिन यह दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र विरोधी दलों ने आपके विकास पर हमेशा ब्रेक लगाने की कोशिश की... हमारे देश को वर्षों से दुनिया के साथ व्यापार के लिए एक बड़े और आधुनिक पोर्ट की जरूरत थी, इसके लिए महाराष्ट्र का पालघर ही सबसे उपयुक्त जगह है, लेकिन इस प्रोजेक्ट को 60 वर्षों तक लटका कर रखा गया। इतने जरूरी काम को कुछ लोग शुरू नहीं होने दे रहे थे..."
