राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं, मगर संघ किसी भी व्यक्ति या संगठन को कंट्रोल (काबू) नहीं करता है, जो स्वतंत्र रूप से काम कर रहा हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस चीफ मोहन भागवत। (फाइल)
भागवत शनिवार (19 नवंबर, 2022) को मध्य प्रदेश के जबलपुर में थे, जहां उन्होंने प्रबुद्ध लोगों के बीच यह बयान दिया। वह बोले कि संघ सीधे तौर पर नियंत्रण या 'रिमोट कंट्रोल' का इस्तेमाल नहीं करता है। जब कोई आरएसएस के बारे में बात करता है तो लोग विश्व हिंदू परिषद (VHP) के बारे में भी सोचते हैं और उस संगठन में भी स्वयंसेवक हैं। उनकी सोच भी समान है।
उनके मुताबिक, ‘‘संघ कहने के बाद लोग पीएम मोदी का नाम लेते हैं। वह हमारे ‘स्वयंसेवक’ हैं।’’ बकौल आरएसएस प्रमुख, ‘‘संघ कहने के बाद आपको विहिप दिखती है। विहिप में स्वयंसेवक हैं और उनके विचार-संस्कार स्वयंसेवक जैसे ही हैं, लेकिन ये सब स्वतंत्र और अलग स्वयंसेवकों के किए हुए काम हैं। ये संघ नहीं है।’’
वह आगे बोले कि संघ एक अलग और स्वतंत्र काम है, स्वयंसेवक सब जगह हैं, इसलिए संबंध रहता है जिससे अच्छे कामों में मदद होती है, परंतु संघ का उन पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण नहीं होता है।
यही नहीं हिंदू धर्म पर उनका मानना है कि यह कोई धर्म नहीं है बल्कि जीने का एक तरीका है। यह एक परंपरा है, जिसे विभिन्न पंथों, जातियों और क्षेत्रों की ओर से पोषित किया गया है। दरअसल, विपक्ष अक्सर यह आरोप लगाता रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी और एनडीए सरकार को कारोबारी और संघ कंट्रोल करता है। वे उन्हीं के इशारे पर चलते हैं।
