Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमल मौला परिसर (Bhojshala-Kamal Maula Complex) विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह याचिका मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल की गई है। मुस्लिम पक्ष (Bhojshala case) का कहना है कि हाई कोर्ट का 15 मई का आदेश सही नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में पूरे परिसर को मंदिर मानते हुए वहां नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि हिंदू पक्ष को ही इस स्थान पर पूजा का अधिकार है। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में पुरातात्विक रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया था।
भोजशाला विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
मौजूदा ढांचा पुराने मंदिर के अवशेषों पर आधारित-ASI
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2000 पन्नों की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया था कि मौजूदा ढांचा पुराने मंदिर के अवशेषों पर आधारित है। यह रिपोर्ट 98 दिनों की जांच के बाद तैयार की गई थी। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया था कि मुस्लिम पक्ष चाहें तो धार जिले में अलग जमीन लेकर मस्जिद का निर्माण कर सकता है। इस फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ASI की रिपोर्ट निष्पक्ष नहीं है और जांच प्रक्रिया में कई खामियां हैं।
मंदिर तोड़ने का कोई सबूत नहीं-वकील सलमान खुर्शीद
वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने तर्क दिया कि ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान मिली कुछ वस्तुओं और नमूनों की वैज्ञानिक जांच पूरी तरह नहीं की गई। खासकर कार्बन डेटिंग न होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। उनके अनुसार, इससे ऐतिहासिक तथ्यों को सही तरीके से समझने में दिक्कत आती है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह विवाद धार्मिक, ऐतिहासिक और कानूनी सभी पहलुओं से जुड़ा हुआ है। देशभर की नजरें अब इस केस की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
