वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता (MoU) संपन्न हुआ। यह समझौता दोनों राज्यों के सीमावर्ती और विवादित क्षेत्रों में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और बहुमूल्य खनिज संसाधनों के खोज और इस्तेमाल का रास्ता साफ करेगा। इस ऐतिहासिक मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने एलान किया कि इस समझौते से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और पूर्वोत्तर में तेल उत्पादन क्षमता को 10 गुना से अधिक बढ़ाने में मदद मिलेगी।
असम और नागालैंड के बीच हुए समझौते के बारे में जानकारी देते गृह मंत्री (स्क्रीनग्रैब: X/@AmitShah)
किसी की हार-जीत नहीं, यह भारत की जीत: अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “समृद्ध उत्तर-पूर्व, विकसित उत्तर-पूर्व” के विजन को साकार करने में यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तारीफ करते हुए कहा "दोनों राज्यों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने दशकों पुराने आपसी मतभेदों और आशंकाओं को पीछे छोड़कर सहयोग का रास्ता चुना है। नागालैंड सरकार ने छह चिन्हित विवादित ब्लॉकों के अलावा अब पूरे राज्य में तेल और गैस अन्वेषण के लिए अपनी सहमति दे दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मुद्दे पर बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और सही कहा कि यह किसी राज्य की हार-जीत नहीं, बल्कि पूरे भारत की जीत है।"
अमित शाह ने बताया कि उत्तर-पूर्व में खनिज संपदा और हाइड्रोकार्बन के विशाल भंडार मौजूद हैं, लेकिन विभिन्न अंतर-राज्यीय विवादों और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। अनुमान के मुताबिक, केवल एक तेल क्षेत्र से ही 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी होने की संभावना है, जो दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को बदल कर रख देगा।
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अगले साल तक पूर्वोत्तर से पूरी तरह खत्म हो सकता है AFSPA
गृह मंत्री ने पूर्वोत्तर में आई सुरक्षा और शांति की क्रांति का डेटा पेश करते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि साल 2019 के बाद से मोदी सरकार ने उत्तर-पूर्व में लगभग 12 महत्वपूर्ण शांति समझौते किए हैं, जिसके कारण क्षेत्र में हिंसा की घटनाओं में लगभग 80% की भारी कमी दर्ज की गई है।
अमित शाह ने देश को भरोसा देते हुए कहा "पूर्वोत्तर में आई इस शांति का ही नतीजा है कि आज यहां बुनियादी ढांचे का रिकॉर्ड विकास हो रहा है। वर्तमान में उत्तर-पूर्व का 80% से अधिक हिस्सा सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम यानी AFSPA से मुक्त हो चुका है। मुझे पूरा विश्वास है कि जमीनी हालात में सुधार को देखते हुए, सिर्फ एक-दो राज्यों को छोड़कर अगले वर्ष (2027) तक पूरे उत्तर-पूर्व से AFSPA को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।"
वैश्विक तनाव के बीच राहत की खबर
गृह मंत्री ने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए इस समझौते की टाइमिंग को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष और तनाव के कारण ऊर्जा और आर्थिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के इस दौर में, भारत के भीतर घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प के लिए अत्यंत आवश्यक है। शाह ने इस पूरे समझौते को भारतीय राजनीति में कोऑपरेशन का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
