विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025 राज्यसभा से भी पारित हो गया है। देर रात तक राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा हुई, इस दौरान विपक्ष ने अपना विरोध जोर-शोर से दर्ज कराया, लेकिन अंत में विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से भी पारित हो गया था। अब चूंकि यह संसद के दोनों सदनों से यह पारित कराया जा चुका है ऐसे में अब यह राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। जहां राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। बता दें कि विकसित भारत जी राम जी विधेयक 20 साल पुरानी मनरेगा की जगह लेगा। इस विधेयक में हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देता है।
विपक्ष के विरोध के बीच राज्यसभा से भी पारित हुआ जी राम जी विधेयक। Credits: Rajya Sabha TV
राज्यसभा में पांच घंटे से भी ज्यादा हुई चर्चा
वहीं, राज्यसभा में इस विधेयक पर तकरीबन पांच घंटे से भी ज्यादा समय तक चर्चा हुई। इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार मौजूदा ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना MGNREGA से महात्मा गांधी का नाम हटाने के लिए यह विधेयक लेकर आई है। साथ ही विपक्ष का यह भी कहना है कि इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा। वहीं,चर्चा के दौरान विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज चौहान ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस पर महात्मा गांधी के आदर्शों को कई बार मारने और राजनीतिक लाभ के लिए उनके नाम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
विपक्ष की मांग- संसदीय समिति के पास भेजा जाए
वहीं, विधेयक पारित होने के दौरान विपक्ष के कई सदस्यों ने राज्यसभा से विधेयक वापस लेने की मांग करते हुए और सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए वॉकआउट किया। बाद में विपक्षी दलों ने विधेयक के विरोध में संसद परिसर में स्थित संविधान सदन के बाहर धरना दिया। साथ ही विपक्ष ने यह भी मांग की है कि विधेयक को आगे की जांच के लिए संसदीय समिति को भेजा जाए।
विकसित भारत- जी राम जी विधेयक लाने का उद्देश्य क्या है?
‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को निरस्त करने और इस संबंध में एक नया कानून बनाने के पीछे का उद्देश्य भी नए विधेयक में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित किया जाए। जिससे सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण हो सके। सरकार का कहना है कि मनरेगा में जहां आजीविका सुरक्षा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित था, वहीं नये विधेयक में कहा गया है कि इसका मकसद समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत के लिए सशक्तीकरण, विकास, तालमेल को बढ़ावा देना है। विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर जोर देना है। विधेयक के अनुसार, खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता को आसान बनाना जरूरी है।
विधेयक कानून बना तो क्या बदलेगा?
अगर लोकसभा और फिर राज्यसभा से पास होने के बाद विधेयक कानून बन गया तो हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को हर वित्त वर्ष में 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। इसका लक्ष्य सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण करना है। इसके अलावा, इसमें एक जो सबसे बड़ा प्रावधान किया गया है वो मजदूरी को फंड करने के पैटर्न में बदलाव करना है। दरअसल, अभी मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी की पूरी लागत को केंद्र सरकार ही फंड करती है। इसके अलावा, मनरेगा के तहत होने वाले काम में लगने वाली सामग्री का 75 फीसदी हिस्सा भी केंद्र वहन करता है, लेकिन नए विधेयक में इस पैटर्न में बदलाव होगा। विकसित भारत- जी राम जी विधेयक में योजना के खर्च में 60-40 का रेशियो रखा जाएगा। तात्पर्य यह कि कानून बनने के बाद 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकारों को योजना का खर्च उठाना होगा। इससे एक ओर जहां केंद्र पर से वित्तीय दबाव थोड़ा कम होगा वहीं, राज्य सरकारों पर यह बोझ बढ़ जाएगा।
