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मेंटल हेल्थ के लिए धीमा जहर है 'Double Depression', 99% लोग उदासी समझ कर देते हैं नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताए लक्षण

What Is Double Depression In Hindi: आपने अक्सर लोगों को तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन के बारे में बात करते देखा होगा। आमतौर पर लोग इसको लेकर तब बात करते हैं, जब वे मानसिक तौर पर काफी परेशान हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, एक ऐसी स्थिति भी है जिसमें लंबे समय तक उदासी भी गंभीर रूप ले सकती है। इसे डबल डिप्रेशन कहते हैं। चलिए डॉक्टर से जानते हैं क्या है ये बला...

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What Is Double Depression In Hindi

What Is Double Depression In Hindi: कभी-कभी हम खुद को लंबे वक्त तक थका हुआ, बुझा-बुझा या बिना किसी वजह के उदास महसूस करते हैं। फिर सोचते हैं, "शायद ये मेरी आदत है", या "थोड़ा मूड खराब है, ठीक हो जाएगा"। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हल्की सी लगने वाली उदासी, असल में एक बड़ी मानसिक परेशानी का हिस्सा हो सकती है? इस स्थिति को कहते हैं डबल डिप्रेशन (Double Depression)। डॉक्टर मीनाक्षी जैन, जो फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में सीनियर सायकेट्रिस्ट हैं, इसे मेंटल हेल्थ के लिए धीमा जहर कहती हैं। उनका कहना है कि बहुत से लोग इसे पहचान ही नहीं पाते और जब तक समझ आता है, तब तक हालात काफी बिगड़ चुके होते हैं। इसलिए समय रहते इसे समझना और इलाज कराना बेहद जरूरी है।

डबल डिप्रेशन क्या होता है - What Is Double Depression In Hindi

डबल डिप्रेशन दरअसल दो तरह के डिप्रेशन का मिलाजुला रूप होता है। इसमें पहला होता है डिस्थीमिया (Dysthymia), यानी हल्का लेकिन लंबे समय तक चलने वाला डिप्रेशन, जिसमें इंसान हमेशा थोड़ा-थोड़ा उदास रहता है। और दूसरा होता है मेजर डिप्रेशन (Major Depression), जो अचानक गहरा असर डालता है।

मतलब कोई इंसान सालों से खुद को थोड़ा उदास या थका हुआ महसूस करता आ रहा होता है, और फिर एक दिन उसके ऊपर गहरे डिप्रेशन का अटैक हो जाता है। दिक्कत ये होती है कि क्योंकि उस इंसान ने पहले भी खुशी को न के बराबर महसूस किया होता है, तो उसे फर्क समझ ही नहीं आता कि अब उसकी हालत और खराब हो गई है। इसलिए ये बहुत धीरे-धीरे अंदर से इंसान को तोड़ देता है।

Double Depression Symptoms and Causes

Double Depression Symptoms and Causes

लोग उदासी समझकर क्यों नजरअंदाज कर देते हैं?

डॉ. मीनाक्षी जैन बताती हैं कि ज्यादातर लोग सालों तक खुद को थका हुआ या खाली-खाली महसूस करते हैं और इसे अपनी फितरत मान लेते हैं। उन्हें लगता है - “मैं ऐसा ही हूं”, “मुझे ज़्यादा खुशी महसूस नहीं होती”, “सब चलता है”। लेकिन जब ये उदासी अचानक और गहरी हो जाती है। कोई काम अच्छा नहीं लगता, लोगों से मिलना अच्छा नहीं लगता, रातों की नींद खराब हो जाती है, या कुछ भी करने का मन नहीं करता। तो ये साफ संकेत होते हैं कि बात अब सिर्फ मूड की नहीं, बल्कि मानसिक बीमारी की है।

क्या वजहें हो सकती हैं डबल डिप्रेशन की - Double Depression Causes In Hindi

ऐसी हालत के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे बचपन का कोई बुरा अनुभव, लंबे समय से चल रहा तनाव, किसी अपने को खो देने का दर्द, अकेलापन, या फिर परिवार में पहले से मानसिक बीमारी की मौजूदगी। कई बार कोई शारीरिक बीमारी भी इसकी वजह बन सकती है। लेकिन जो बात सबसे ज्यादा परेशानी की है वो ये कि लोग इस बारे में बात ही नहीं करते। और जब बात नहीं होती, तो इलाज भी नहीं हो पाता।

भारत में क्यों इतनी अनदेखी होती है?

हमारे समाज में आज भी मेंटल हेल्थ को लेकर बातें खुलकर नहीं होतीं। लोग सोचते हैं कि मानसिक बीमारी के बारे में बात करना शर्म की बात है। डॉ. जैन कहती हैं कि कई बार परिवार के लोग भी इसे बस "मूड स्विंग" या "सोचने की आदत" मान लेते हैं। लेकिन यही सोच इस बीमारी को और खतरनाक बना देती है। अगर समय रहते इसका इलाज न हो, तो ये हालात जानलेवा भी हो सकते हैं।

Double Depression Treatment

Double Depression Treatment

डबल डिप्रेशन का इलाज क्या है - Double Depression Treatment In Hindi

अगर डबल डिप्रेशन को समय रहते पहचान लिया जाए, तो इसका इलाज मुमकिन है। डॉ. मीनाक्षी जैन बताती हैं कि इस स्थिति में थेरेपी और जरूरत पड़ने पर दवाओं का इस्तेमाल काफी असरदार होता है। खासकर कॉग्निटविट बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसे ट्रीटमेंट से सोचने का तरीका और नजरिया बदलने में मदद मिलती है। साथ ही, रोजाना की जिंदगी में थोड़े-थोड़े बदलाव जैसे कि सुबह की सैर, दोस्तों से बातचीत, पर्याप्त नींद, और संतुलित खाना भी बड़ी मदद कर सकते हैं।

डॉक्टर क्या देते हैं सलाह

डॉ. जैन का साफ कहना है कि “अगर आप या आपके किसी अपने को लंबे समय से ऐसा लग रहा है कि जिंदगी में कोई खुशी नहीं बची, कुछ करने का मन नहीं होता, हर काम बोझ लगता है तो इसे नजरअंदाज न करें। ये सिर्फ स्वभाव नहीं है, ये एक बीमारी हो सकती है। और इसका इलाज पूरी तरह मुमकिन है।”

मेंटल हेल्थ को भी सीरियसली लेना होगा

हम शरीर में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन मन में दर्द हो तो बस खुद से ही झेलते रहते हैं। अब वक्त आ गया है कि मेंटल हेल्थ को भी उतनी ही अहमियत दें। डबल डिप्रेशन जैसी समस्याएं दिखती नहीं, लेकिन अंदर ही अंदर सब कुछ तोड़ देती हैं। इसलिए अगर आप लगातार उदास रहते हैं या कुछ भी अच्छा नहीं लगता, तो चुप मत रहिए, इसको लेकर बात कीजिए, मदद लीजिए।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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