Monsoon Child Care: बारिश का मौसम बच्चों को खूब पसंद आता है, लेकिन यही मौसम कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से उन्हें बीमार भी कर सकता है। अक्सर बच्चे भीगे हुए रेनकोट और स्कूल बैग लेकर घर आते हैं। कई बार इन्हें बिना सुखाए ही दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है। यही गलती परेशानी की वजह बन सकती है। गीले रेनकोट और बैग में नमी बनी रहती है, जिससे उनमें बैक्टीरिया और फफूंदी पनपने लगते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बरसात में बच्चों के रेनकोट और स्कूल बैग की सफाई और उन्हें अच्छी तरह सुखाना भी उतना ही जरूरी है, जितना हाथ धोना या साफ खाना खाना।
बरसात में बच्चों को बैग और रैनकोट भी बना सकते हैं बीमार
क्यों बढ़ जाता है बैक्टीरिया का खतरा
बारिश में भीगने के बाद अगर रेनकोट या स्कूल बैग को मोड़कर रख दिया जाए, तो उनमें काफी देर तक नमी बनी रहती है। यही नमी बैक्टीरिया और फफूंदी के बढ़ने के लिए सही माहौल बनाती है। अगर बैग के अंदर किताबें, कॉपियां या टिफिन भी गीले हो जाएं, तो समस्या और बढ़ सकती है।
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बच्चों की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है - children health
विशेषज्ञों के मुताबिक, गंदे या लंबे समय तक गीले रहने वाले रेनकोट और बैग की वजह से बच्चों को त्वचा पर खुजली, लाल दाने, एलर्जी या छोटे-मोटे इंफेक्शन हो सकते हैं। अगर बच्चे की रोगों से लड़ने की ताकत कम है, तो परेशानी बढ़ सकती है। कई बार गीले बैग से आने वाली सीलन की बदबू भी बच्चों को परेशान करती है।
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इन आदतों से बच्चों को रखें सुरक्षित
घर लौटते ही रेनकोट को फैलाकर अच्छी तरह सुखाएं। अगर स्कूल बैग भीग गया है तो पहले उसे खाली करें और खुली हवा में सूखने दें। बैग के अंदर भी समय-समय पर साफ कपड़े से सफाई करें। टिफिन और पानी की बोतल भी रोज अच्छी तरह धोएं, क्योंकि इनमें भी गंदगी जल्दी जमा हो सकती है।
थोड़ी-सी सावधानी से मिलेगी बड़ी सुरक्षा
बरसात के मौसम में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि रोज की अच्छी आदतें भी जरूरी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर रेनकोट और स्कूल बैग को हर बार अच्छी तरह सुखाकर और साफ रखकर इस्तेमाल किया जाए, तो बैक्टीरिया से होने वाली कई परेशानियों से बचा जा सकता है। कुछ मिनट की यह सावधानी पूरे मानसून बच्चों की सेहत की अच्छी सुरक्षा कर सकती है।
