कॉलेज लाइफ का मतलब सिर्फ पढ़ाई नहीं है। सुबह जल्दी उठना, लगातार क्लासेज, कैंटीन का खाना, दोस्तों के साथ ब्रेक, देर रात तक पढ़ाई और वीकेंड की मस्ती Gen Z की डेली लाइफ का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आज के युवा पीढ़ी की यही आदतें आगे चलकर मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकती हैं।
कॉलेज की भागदौड़ में Gen Z कैसे रखे ब्लड शुगर कंट्रोल? इन छोटी आदतों से सुधर सकती है मेटाबॉलिक हेल्थ (Photo: iStock)
युवाओं के लिए कई डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हाई ब्लड शुगर कोई साफ संकेत देकर सामने नहीं आता। इसलिए कम उम्र में भी अपनी रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।
उम्र देखकर नहीं होता डायबिटीज
डायबिटीज को अक्सर बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज का खतरा युवाओं में भी हो सकता है। हालांकि सिर्फ कम उम्र में ज्यादा खाना या कभी-कभार फास्ट फूड खाने से डायबिटीज नहीं होती।
जेनेटिक्स, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी, कम शारीरिक गतिविधि और मेटाबॉलिक फैक्टर्स भी जोखिम को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक खराब खान-पान, कम एक्टिविटी, नींद की कमी और वजन बढ़ने का पैटर्न इंसुलिन रेजिस्टेंस के खतरे को बढ़ा सकता है। वहीं टाइप-1 डायबिटीज अलग स्थिति है। यह ऑटोइम्यून बीमारी है और इसके लिए सिर्फ ज्यादा चीनी खाना या खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार नहीं होती।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: AIIMS के डॉक्टर ने बताया- लिवर को डिटॉक्स करने में कारगर हैं ये तीन ड्रिंक्स
कॉलेज का टाइमटेबल बिगाड़ देता है रूटीन
सुबह कॉलेज पहुंचने की जल्दबाजी में नाश्ता छूट जाता है। फिर एक के बाद एक लेक्चर चलते रहते हैं। लंच का समय निकल जाता है। भूख लगने पर कैंटीन से जो सबसे जल्दी मिलता है, वही खा लिया जाता है।
हॉस्टल में स्थिति और मुश्किल हो सकती है। इंस्टेंट नूडल्स, बिस्किट, तले हुए स्नैक्स, मीठे पेय और देर रात का खाना आसानी से उपलब्ध होते हैं। ऐसे में संतुलित भोजन की जगह सुविधा वाला खाना रोज की आदत बन सकता है।
वैसे इसके लिए किसी मुश्किल डाइट प्लान की जरूरत नहीं है। बैग में फल, मुट्ठी भर नट्स, भुना चना, उबले अंडे, दही, सुंडल यानी उबली दालें या घर का बना सैंडविच रखा जा सकता है। क्लास लंबी होने पर यही छोटे स्नैक्स अनहेल्दी विकल्पों का सहारा लेने से बचा सकते हैं।
कैसा रहे भोजन
हेल्दी रहने का मतलब यह नहीं है कि पसंदीदा खाना हमेशा के लिए छोड़ दिया जाए। असली बात यह है कि रोज की डाइट कैसी है। कैंटीन में कोशिश करें कि भोजन में प्रोटीन, सब्जियां या फाइबर वाली चीजें जरूर हों। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी संतुलित रखें। हर दिन फ्राइड स्नैक्स को पूरा भोजन बनाने की बजाय कभी-कभार खाया जाए तो बेहतर है।
पढ़ाई के बीच ब्रेक भी जरूरी
घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना भी अच्छी आदत नहीं है। पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना और कुछ देर चलना-फिरना रोज की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से बचता है।
परीक्षा के समय तनाव और देर रात तक जागना भी आम है, लेकिन नींद और तनाव को लगातार नजरअंदाज करना मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए ठीक नहीं है। इसलिए पढ़ाई के साथ पर्याप्त नींद, नियमित भोजन और थोड़ी शारीरिक गतिविधि को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: पैटी लिवर से राहत पाना है तो ब्रेकफास्ट में शामिल करें ये चीजें
कुल मिलाकर Gen Z को इस बात का ध्यान रखना होगा कि ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए रोज की आदतों का पैटर्न थोड़ा बेहतर हो। समय पर खाना, बेहतर विकल्प चुनना, लंबे समय तक बैठे रहने से बचना और नींद को गंभीरता से लेना जैसे छोटे कदम आगे चलकर बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद कर सकते हैं।
