Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Explained: कितनी देर में पचती है कौन से आटे की रोटी, लंच और डिनर के लिए कौन सी बेस्ट

Roti Digestion Time Hindi (लंच और डिनर में कौन से आटे की रोटी खाएं): रोटी भारतीय कुजीन का खास हिस्सा है। जितने इसके प्रकार हैं, वहीं रोटी भी अलग-अलग आटे की खाई जाती है। लेकिन रोटी को पचने में कितना टाइम लगता है और ये किस बात पर निर्भर करता है - यहां जानें। साथ ही देखें कि किस समस्या में कौन सी रोटी नहीं खानी चाहिए और लंच या डिनर में किस आटे की रोटी बेस्ट रहेगी।

Image
रोटी का डाइजेशन टाइम कितना होता है
Authored by: Medha Chawla
Updated Nov 24, 2025, 20:52 IST
Follow on Google News

Roti Digestion Time Hindi (लंच और डिनर में कौन से आटे की रोटी खाएं): भारतीय खाने की कोई भी प्लेट रोटी के बिना पूरी नहीं होती। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका रूप और नाम थोड़ा बदल जाता है लेकिन इसका महत्व हर जगह बराबर होता है। हालांकि रोटी के फायदे-नुकसान को लेकर भी चर्चा होती है तो हमने इस लेख में रोटी और सेहत के कनेक्शन की जानकारी एक्स्पर्ट्स की मदद से जुटाई है।

भारत में कई प्रकार के आटे की रोटी खाने का चलन है। इसमें गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी आदि प्रमुख हैं। हर आटे का असर शरीर पर अलग होता है - किसी का डाइजेशन जल्दी होता है तो कोई देर तक पेट भरा रखता है। अगर आप वजन, स्वास्थ्य या पाचन को लेकर सजग हैं, तो यह जानना जरूरी है कि कौन सा आटा कितने समय में पचता है और लंच व डिनर में कौन सी रोटी खाना सबसे फायदेमंद रहता है।

रोटी का डाइजेशन टाइम कितना होता है

हर तरह की रोटी का डाइजेशन टाइम यानी पाचन का समय अलग होता है। यह समय अनाज के प्रकार और इसमें मौजूद फाइबर, स्टार्च, प्रोटीन और ग्लूटन का स्तर अलग-अलग होता है। इसी वजह से कुछ रोटियां जल्दी पच जाती हैं और कुछ पेट में ज्यादा देर रहती हैं।

दिल्ली के एक नामी हॉस्टपिटल से जुड़ीं डाइटिशियन श्वेता मलिक का कहना है कि अगर आपको रोटी के पचने का समय पता होगा तो आप अपनी हेल्थ और लाइफस्टाइल के हिसाब से सही आटे का चयन कर सकेंगे। इससे जहां हेल्थ प्रॉब्लम्स दूर रहती हैं वहीं वजन बढ़ने से भी रोका जा सकता है। ऐसे में शुगर लेवल, थायरॉयड, वजन घटाने जैसी समस्याओं के अनुसार सही आटा चुनने में मदद मिलेगी। वहीं एसिडिटी और गैस से भी आपका बचाव रहेगा।

हर आटे की रोटी का डाइजेशन टाइम है अलग

जैसे कि ऊपर बताया गया है कि फाइबर, स्टार्च, प्रोटीन आदि की वजह से हर आटे की रोटी का डाइजेशन टाइम अलग होता है। एक वेट लॉस एप के साथ जुड़ीं डाइटिशियन पलक गर्ग का कहना है कि रोटी का पाचन समय व्यक्ति के पाचन तंत्र, रोटी में मौजूद सामग्री और उसे कितनी अच्छी तरह चबाया गया है, इस बात पर निर्भर करता है। जितने भी आटे हैं- उनमें चावल के आटे की रोटी 1 से 2 घंटे में सबसे जल्दी पच जाती है। वहीं गेहूं के आटे की रोटी का पाचन समय 2 से 3 घंटे, ज्वार की रोटी को पचने में 2 घंटे, मक्की की रोटी को डाइजेस्ट होने में 3 से 4 घंटे तो मिक्स आटे की रोटी का पाचन 1 से 3 घंटे में होता है।

kaun si roti kitni der mein pachti hai

kaun si roti kitni der mein pachti hai

कौन से आटे की रोटी का क्या है फायदा

हर आटे की रोटी के अपने गुण होते हैं। श्वेता मलिक बताती हैं कि गेहूं के आटे की रोटी भले ही ग्लूटेन वाली हो लेकिन इसी वजह से यह मुलायम भी रहती है। वहीं ज्वार के आटे की रोटी में फाइबर भरपूर होता है और यह ब्लड शुगर में स्पाइक नहीं करती है। इसी तरह रागी की रोटी बहुत जल्दी पच जाती है जिससे इसे वजन घटाने, शुगर कंट्रोल और रात के खाने के लिए आदर्श माना जाता है।

अगर आप एकदम लाइट खाने के मूड में है और रोटी भी चाहिए तो चावल के आटे की रोटी का विकल्प चुनें। यह काफी हल्की और ग्लूटन-फ्री होती है। इसी तरह मक्की की रोटी को भारी की श्रेणी में रखा जाता है। अगर आप चाहते हैं कि पेट देर तक भरा रहे तो इस आटे की रोटी खाएं। हालांकि इसे भी लंच में खाना ही प्रिफर किया जाता है और ये गट के लिए भारी होने की वजह से इसे रोज भी नहीं खाया जा सकता है।

हेल्थ प्रॉब्लम और रोटी का कनेक्शन

कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में डाइट में बदलाव करते हुए कुछ तरह की रोटी से बचने की सलाह दी जाती है। इस पर पलक गर्ग का कहना है कि जिन लोगों को थायरॉयड की समस्या होती है, उनको हम बाजरा और रागी की रोटी से खासतौर पर दूर रहने की सलाह देते हैं। किडनी की किसी भी समस्या में रागी, मक्की की रोटी डाइट से दूर रखी जाती है। कम BP में ज्वार की रोटी नहीं दी जाती है तो हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को बाजरा, मक्की आदि की रोटी से दूर रखा जाता है।

कौन सी रोटी किस समस्या में नहीं खानी चाहिए

कौन सी रोटी किस समस्या में नहीं खानी चाहिए

किस समस्या में खाएं कौन सी रोटी

जिस तरह किसी खास हेल्थ प्रॉब्लम में कुछ आटों की रोटी खाने ये बचने की सलाह डाइट एक्सपर्ट देते हैं, वहीं मामला इसके उलट भी होता है। यानी अगर आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम है तो कुछ खास आटे की रोटी डाइट में शामिल करके सेहत में सुधार किया जाता है। इस को समझाते हुए पलक कहती हैं कि थायरॉयड के मरीजों को वह ज्वार, चावल, मक्की आदि के आटे की रोटी खाने की सलाह देती हैं। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर कम होने की समस्या रहती है उनको गेहूं, बाजरा, मक्की आदि की रोटी खाने को कहा जाता है।

पलक कहती हैं कि वेट लॉस का टार्गेट लेकर चल रहे लोगों के ज्वार, रागी, मल्टीग्रेन आदि आटे की रोटी रिकमेंड की जाती है। वहीं ग्लूटेन को ना पचा पाने वाले लोगों को आदि की रोटी बदल-बदल कर खाने को कहा जाता है।

कौन सी रोटी किस बीमारी में रहेगी सही

कौन सी रोटी किस बीमारी में रहेगी सही

लंच या डिनर में कौन से आटे की रोटी खानी चाहिए

रोटी को लेकर सबसे बड़ा सवाल ये आता है कि लंच या डिनर - रोटी कब खानी चाहिए। डाइटिशियन श्वेता मलिक का कहना है कि रोटी को लेकर यह सबसे अहम जानकारी है जिसके बारे में आम लोगों को जरूर पता होना चाहिए। इसके बिना कोई भी डाइट प्लान सफल नहीं हो सकता है। हालांकि उनका ये भी मानना है कि डिनर में अगर आप रोटी अवॉइड करें तो बेहतर। नहीं तो रात के खाने के लिए गेहूं, चावल और मिक्स आटे की रोटी बेहतर रहती है। अधिक फाइबर वाले आटे की रोटी रात में खाने से पेट फूलने और गैस की समस्या हो सकती है।

कौन सी रोटी लंच या डिनर के लिए सही रहेगी

कौन सी रोटी लंच या डिनर के लिए सही रहेगी

रोटी खाते समय किन गलतियों से बचना चाहिए

  1. बहुत ज्यादा रोटी एक साथ मत खाएं। एक बार में 2 से ज्यादा रोटी खाने पर पाचन भारी हो सकता है। ओवरइटिंग से शुगर लेवल भी तेजी से बढ़ता है।
  2. रोटी को बहुत मोटी न बेलें। मोटी रोटी को पचने में ज्यादा समय लगता है जिससे गैस और ब्लोटिंग की समस्या बढ़ सकती है।
  3. रोटी में ज्यादा तेल/घी न लगाएं। इससे कैलोरी दोगुनी हो जाती है। इस वजह से वजन बढ़ने और कोलेस्ट्रॉल की समस्या शुरू हो सकती है।
  4. रोटी के साथ फाइबर और प्रोटीन जरूर लें। रोटी अकेले खाने से शुगर तेजी से बढ़ती है।
  5. जल्दी-जल्दी रोटी न खाएं। इससे पाचन गड़बड़ होता है।
  6. रोटी को ज्यादा तवे पर मत जलाएं। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
  7. बहुत देर तक रखी हुई रोटी खाने से भी बचना चाहिए। ठंडी और सूखी रोटी पचने में भारी हो जाती है।

एक बार में कितनी रोटी खानी चाहिए

आप हेल्दी हों या किसी लाइफस्टाइल प्रॉब्लम से जूझ रहे हों - रोटी की मात्रा आपको सीमित ही रखनी चाहिए। श्वेता मलिक कहती हैं कि हम रुटीन में इतना ज्यादा फिजिकल वर्क नहीं करते हैं कि दो रोटी से ज्यादा खाना पचा सकें। इसलिए डाइट को कंट्रोल में रखना ही बेहतर है। बेहतर होगा कि आप नाश्ते में एक, लंच में दो या तीन और रात में एक ही रोटी खाएं। और हां - रोटी और चावल को भी एक साथ खाना अवॉइड ही करें। ध्यान में रहे कि कंट्रोल में खाना ही निरोगी काया का पहला नियम है।

End of Article