Why Some Indian States Are More Obese Than Others: भारत में कभी कुपोषण सबसे स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में गिना जाता था, लेकिन अब देश की तस्वीर बदल रही है। हाल ही में आई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS Report) की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाले वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट की मानें तो देश के कई राज्यों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट के आंकड़े (NFHS obesity data) बताते हैं जहां कुछ राज्य आज भी कुपोषण और पोषण की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ राज्यों में लोगों का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ रहा है।
केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे राज्यों में मोटापे की दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ ज्यादा खाना नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता शहरीकरण, पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का बढ़ता इस्तेमाल और कम होती शारीरिक गतिविधियां जिम्मेदार हैं।
सवाल यह है कि आखिर कुछ राज्यों में मोटापा तेजी से क्यों बढ़ रहा है? और क्या यह आने वाले समय में भारत के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
NFHS-6 रिपोर्ट क्या कहती है
NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर तीन महिलाओं में लगभग एक महिला और हर चार पुरुषों में एक पुरुष का वजन सामान्य से ज्यादा है। पिछले कुछ वर्षों में यह आंकड़ा लगातार बढ़ा है।
आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में लोग ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आ चुके हैं। यह बदलाव सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब छोटे शहरों और गांवों में भी दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ खाने की आदतों का मामला नहीं है, बल्कि बदलती जीवनशैली और तेजी से हो रहे सामाजिक बदलावों का भी नतीजा है।
कुछ राज्यों में मोटापा ज्यादा क्यों?
भारत के कुछ राज्यों में मोटापा ज्यादा क्यों बढ़ रहा है
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और मेटाबॉलिक एंड बेरिएट्रिक सर्जन डॉ. कोना लक्ष्मी कुमारी के अनुसार, मोटापा पूरे भारत में एक जैसा नहीं बढ़ रहा है। जिन राज्यों में शहरीकरण तेजी से हुआ है और लोगों की आय बढ़ी है, वहां मोटापे के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।
पहले लोगों की थाली में दाल, सब्जियां, मोटे अनाज और घर का बना खाना ज्यादा होता था। लेकिन अब उनकी जगह पैकेट वाले स्नैक्स, फास्ट फूड, मीठे पेय और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ लेते जा रहे हैं।
इसके साथ ही लोगों की दिनचर्या भी बदल गई है। ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप के सामने ज्यादा समय बिताना और पैदल चलने की बजाय वाहन का इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। इन सभी चीजों का असर धीरे-धीरे वजन पर पड़ता है।
भारत एक साथ दो समस्याओं से क्यों लड़ रहा है
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत की स्थिति दुनिया के कई देशों से अलग है। यहां एक तरफ कुपोषण की समस्या अब भी मौजूद है, तो दूसरी तरफ मोटापा तेजी से बढ़ रहा है।
डॉ. कोना लक्ष्मी कुमारी बताती हैं कि इसे 'डबल बर्डन' यानी दोहरी चुनौती कहा जा सकता है। कुछ राज्यों में लोग पर्याप्त पोषण नहीं पा रहे, जबकि दूसरे राज्यों में मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और लिवर से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। यानी भारत को एक साथ दो मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है - लोगों को पर्याप्त पोषण भी देना है और बढ़ते मोटापे को भी रोकना है।
गांवों में भी तेजी से बढ़ रहा है मोटापा
कई लोगों को लगता है कि मोटापा सिर्फ बड़े शहरों की समस्या है, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। गांवों में भी पैकेट वाले खाद्य पदार्थ आसानी से मिलने लगे हैं। खेती और दूसरे कामों में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने से शारीरिक मेहनत कम हुई है। इसके अलावा टीवी, मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में भी लोगों का वजन बढ़ रहा है। आज मोटापा केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है।
मोटापे से कौन सी बीमारियां हो रही हैं?
मोटापा सिर्फ बढ़ता वजन नहीं कई बीमारियों की वजह
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि मोटापे को केवल शरीर के आकार से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
उनके अनुसार, मोटापा कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इनमें शामिल हैं:
- डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- फैटी लिवर
- दिल की बीमारी
- किडनी से जुड़ी समस्याएं
- कुछ प्रकार के कैंसर
डॉ. धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में इन बीमारियों का बोझ और बढ़ सकता है।
डॉक्टर मोटापे को अब एक बीमारी क्यों मान रहे हैं
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. हरि किशन बोरुगु का कहना है कि मोटापा अब केवल खराब लाइफस्टाइल का नतीजा नहीं माना जाता, बल्कि इसे एक बीमारी के रूप में देखा जा रहा है।
वे बताते हैं कि आज अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन्हें मोटापे की वजह से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, जोड़ों का दर्द, नींद से जुड़ी परेशानियां और दिल की बीमारियां हो रही हैं।
सबसे चिंता की बात यह है कि अधिकतर लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब शरीर में दूसरी समस्याएं शुरू हो चुकी होती हैं। इसलिए समय रहते जांच और सावधानी जरूरी है।
क्या इसके लिए सिर्फ व्यक्ति जिम्मेदार है
अक्सर लोगों को लगता है कि मोटापा केवल ज्यादा खाने या आलस करने की वजह से होता है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं बड़ी है। आज जंक फूड पहले से ज्यादा आसानी से उपलब्ध है। बच्चों और युवाओं को आकर्षित करने वाले विज्ञापन लगातार दिखते हैं। कई शहरों में लोगों के पास खुली जगहों की कमी है, जहां वे नियमित रूप से टहल या व्यायाम कर सकें। यानी मोटापा सिर्फ व्यक्ति की आदतों का नहीं, बल्कि बदलते माहौल और जीवनशैली का भी परिणाम है।
बढ़ता हुई मोटापा कैसे रोकें
बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए क्या करना होगा
डॉक्टर्स का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है:
- संतुलित और घर का बना भोजन खाना
- रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करना
- मीठे पेय और जंक फूड कम करना
- पर्याप्त नींद लेना
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराना
- बच्चों को बचपन से ही स्वस्थ आदतें सिखाना
डॉ. कोना लक्ष्मी कुमारी का मानना है कि स्कूलों, दफ्तरों और सामुदायिक कार्यक्रमों में भी लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए जागरूक करना जरूरी है।
डॉक्टर क्या देते हैं सलाह
NFHS के आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत में मोटापा अब केवल अमीर लोगों या बड़े शहरों की समस्या नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है। कुछ राज्यों में यह समस्या दूसरों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, जिसकी वजह बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें और कम होती शारीरिक गतिविधियां हैं।
ऐसे में डॉक्टर्स का कहना है कि अगर अभी से जागरूकता, सही खानपान और नियमित व्यायाम पर ध्यान दिया जाए तो मोटापे से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है। भारत के सामने चुनौती सिर्फ लोगों का वजन कम कराने की नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक स्वस्थ रखने की है।
