Glycemic Index VS Glycemic Load: जब भी डायबिटीज के मरीजों की डाइट या ऐसे फूड्स के चुनने की बात आती है जो जल्दी शुगर नहीं बढ़ाते हैं तो ऐसे में लोग सबसे पहले उस चीज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी GI देखना शुरू कर देते हैं। आपने ऐसा अक्सर अपने आसपास के लोगों के साथ भी देखा होगा, जो कई बार कहीं पढ़ लें कि आलू का GI बहुत ज्यादा है तो उसे वे उसे पूरी तरह खाना ही बंद कर देते हैं। कई बार लोग सिर्फ GI आधार पर तय कर लेते हैं कि उन्हें कोई चीज खानी है या नहीं। उन्हें लगता है ज्यादा GI वाली चीज खाते ही उनका ब्लड शुगर लेवल आसमान छूने लगेगा। लेकिन क्या सच में ऐसा है?
फूड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स या ग्लाइसेमिक लोग, क्या ज्यादा मायने रखता है
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा नहीं है। हेल्थ इन्फ्लुएंसर, जनरल फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत (MD Medicine, DM Neurology, AIIMS Delhi) बताती हैं कि आजकल शुगर के मरीजों के बीच खाने के ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी GI को लेकर काफी चर्चा रहती है। अक्सर लोग किसी भी खाने की चीज को सिर्फ उसके GI के आधार पर अच्छा या बुरा मान लेते हैं। लेकिन सिर्फ किसी फूड का GI देखकर उसे खाने का फैसला करना पूरी कहानी नहीं बताता। अगर आपको सच में ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से समझना है, तो ग्लाइसेमिक लोड यानी GL को भी समझना जरूरी है। यही पैमाना बताता है कि कोई चीज आपके शरीर पर वास्तव में कितना असर डाल सकती है।
आखिर ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या बताता है
डॉ. प्रियंका सेहरावत के मुताबिक, किसी फूड का GI सिर्फ हमें यह बताता है कि कोई चीज खाने के बाद आपके खून में शुगर कितनी तेजी से बढ़ती है। इसे आसान भाषा में समझें तो मान लीजिए दो गाड़ियां सड़क पर दौड़ रही हैं। एक बहुत तेज चल रही है और दूसरी धीरे
GI सिर्फ यह बताता है कि कौन सी गाड़ी ज्यादा तेज है। लेकिन वह यह नहीं बताता कि गाड़ी कितनी दूर जाएगी या कितना सामान लेकर चल रही है। यही वजह है कि किसी फूड का GI ज्यादा होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि वह आपके लिए सबसे खराब विकल्प है।
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GI और GL के बीच का फर्क समझें
फिर ग्लाइसेमिक लोड क्यों है ज्यादा महत्वपूर्ण
यहीं से ग्लाइसेमिक लोड की भूमिका शुरू होती है। डॉ. सेहरावत बताती हैं कि ग्लाइसेमिक लोड (Glycemic Load) सिर्फ शुगर बढ़ने की रफ्तार नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि उस भोजन में कुल कार्बोहाइड्रेट कितनी मात्रा में मौजूद है। यानी कोई चीज शुगर को कितनी देर और कितनी मात्रा में बढ़ाकर रख सकती है।
सरल शब्दों में कहें तो GI आपको स्पीड बताता है, जबकि GL आपको पूरी तस्वीर दिखाता है। यही कारण है कि कई बार किसी फूड का GI ज्यादा होता है, लेकिन उसका वास्तविक असर उतना बड़ा नहीं होता जितना लोग समझ लेते हैं।
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तरबूज की कहानी से समझिए पूरा गणित
डॉ. प्रियंका सेहरावत तरबूज का उदाहरण देकर इस बात को समझाती हैं। हार्वर्ड की एक स्टडी में तरबूज को 'Watermelon Paradox' कहा गया था। इसके पीछे वजह यह है कि तरबूज का GI करीब 74 होता है, जो काफी ज्यादा माना जाता है। इसे देखकर कई लोग सोचते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को तरबूज नहीं खाना चाहिए। लेकिन असली तस्वीर इससे अलग है।
बता दें कि तरबूज का बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत कम होती है। यही वजह है कि इसका GL सिर्फ 4 के आसपास होता है, जो काफी कम माना जाता है।
यानी तरबूज शुगर को तेजी से बढ़ा तो सकता है, लेकिन उसमें कार्बोहाइड्रेट कम होने की वजह से उसका कुल असर सीमित रहता है। यही कारण है कि सिर्फ GI देखकर किसी भी खाने को अपनी प्लेट से बाहर कर देना सही नहीं है।
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पॉर्शन कंट्रोल का है असली खेल
किस चीज का है असली खेल
अगर डायबिटीज मैनेजमेंट की बात करें तो सबसे ज्यादा महत्व इस बात का है कि आप क्या खा रहे हैं और कितनी मात्रा में खा रहे हैं। डॉ. सेहरावत का कहना है कि हर चीज को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं होता। कई लोग किसी फूड का नाम सुनते ही डर जाते हैं और उसे खाना छोड़ देते हैं। जबकि असल में सही मात्रा में खाया गया वही भोजन शरीर पर अलग असर डाल सकता है।
यानी अगर आप अपनी खाने की प्लेट और उसमें खाने की मात्रा पर ध्यान दे रहे हैं, तो शुगर को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। इसलिए सिर्फ किसी एक नंबर के आधार पर खाना छोड़ना समझदारी नहीं है।
किन चीजों से बचने की जरूरी
किन चीजों से ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
डॉ. प्रियंका सेहरावत के अनुसार, अगर किसी चीज पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है तो वह हाई GL वाले फूड्स हैं जैसे,
- सफेद चावल
- आलू
- शकरकंद
- और व्हाइट ब्रेड
इस तरह की चीजों का GL सामान्य से काफी ज्यादा होता है। ऐसे फूड ब्लड शुगर को लंबे समय तक हाई बनाए रख सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें पूरी तरह छोड़ दिया जाए, बल्कि इनकी मात्रा और सेवन की आवृत्ति पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है। शुगर मैनेजमेंट में यही छोटी-छोटी बातें बड़ा फर्क पैदा करती हैं।
डॉक्टर क्या देती हैं सलाह
डॉक्टर सलाह देती हैं कि डायबिटीज या ब्लड शुगर कंट्रोल की बात हो तो सिर्फ खाने के GI पर भरोसा करना सही नहीं है। डॉ. प्रियंका सेहरावत के अनुसार, GI सिर्फ यह बताता है कि शुगर कितनी तेजी से बढ़ेगी, जबकि GL यह समझने में मदद करता है कि उसका कुल असर कितना होगा।
तरबूज इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसका GI ज्यादा है लेकिन GL बहुत कम है। इसलिए किसी भी खाने को सिर्फ एक नंबर देखकर अच्छा या बुरा न मानें। सही मात्रा, संतुलित भोजन और GL की समझ आपको बेहतर फैसले लेने में मदद कर सकती है। आखिरकार, शुगर कंट्रोल का मतलब डरकर खाना छोड़ना नहीं, बल्कि समझदारी से खाना चुनना है।
