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Analogue Paneer Ban: दूध की जगह तेल-स्टार्च से बन रहे पनीर पर लगा बैन, एक्सपर्ट्स से जानें क्यों जरूरी है ऐसे खाने पर बैन

Analogue Paneer Ban: एनालॉग पनीर क्या है और यह दूध वाले पनीर से कितना अलग है। एक्सपर्ट से जानें इसके नुकसान, पोषण और पहचान का तरीका।

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क्या होता है एनालॉग पनीर, क्यों सही है इस पर लगा बैन
Authored by: Medha Chawla
Updated Aug 5, 2026, 15:27 IST
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Analogue Paneer Ban: होटल-ढाबे पर पनीर की सब्जी खाते समय क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी प्लेट में रखा पनीर वास्तव में दूध से बना भी है या नहीं? आमतौर पर हम उसका सफेद रंग और मुलायम बनावट देखकर मान लेते हैं कि यह असली होगा। लेकिन बाजार में एक ऐसा उत्पाद भी मौजूद है, जो दिखने और खाने में पनीर जैसा लगता है, जबकि उसे बनाने में वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और फूड एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे एनालॉग पनीर कहा जाता है।

इसी एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य में इसके निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है। जांच में सामने आया कि कई होटल और फूड आउटलेट एनालॉग पनीर को सामान्य पनीर की तरह इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं दी जा रही थी। इससे पहले छत्तीसगढ़ भी नॉन-स्टैंडर्ड डेयरी एनालॉग उत्पादों पर एक साल की रोक लगा चुका है।

अब सवाल है कि क्या हर एनालॉग पनीर खतरनाक होता है? क्या इसे सिंथेटिक या नकली पनीर कहना सही है और इसे खाने से क्या नुकसान हो सकता है? आइए, एक्सपर्ट से आसान भाषा में समझते हैं।

एनालॉग पनीर आखिर होता क्या है

सामान्य पनीर दूध को किसी फूड-ग्रेड कोएगुलेंट की मदद से फाड़कर बनाया जाता है। इसमें दूध का प्रोटीन, फैट और कैल्शियम रहता है। इसके उलट एनालॉग पनीर को असली पनीर जैसा रंग, स्वाद और टेक्सचर देने के लिए वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च, मिल्क सॉलिड, इमल्सीफायर, स्टेबलाइजर और दूसरे फूड एडिटिव्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

एनालॉग पनीर पर क्या जानें

एनालॉग पनीर पर क्या जानें

CK बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डाइटिशियन दिपाली शर्मा बताती हैं कि एनालॉग पनीर आमतौर पर वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर और मिल्क सॉलिड जैसी चीजों से तैयार किया जाता है, ताकि उसका रंग और टेक्सचर पारंपरिक पनीर जैसा लगे। अगर इसे स्वीकृत फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुसार बनाया गया है तो जरूरी नहीं कि यह अपने आप में असुरक्षित हो। असली समस्या तब होती है, जब इसे बिना सही लेबल के दूध वाला पनीर बताकर बेच दिया जाता है।

असली और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है

आधारदूध से बना असली पनीरएनालॉग पनीर
मुख्य सामग्रीदूध और फूड-ग्रेड कोएगुलेंटवेजिटेबल ऑयल, स्टार्च, मिल्क सॉलिड और एडिटिव्स
प्रोटीनअच्छी गुणवत्ता वाला डेयरी प्रोटीनमात्रा और गुणवत्ता बनाने के तरीके पर निर्भर
फैटदूध का प्राकृतिक फैटरिफाइंड या वेजिटेबल फैट हो सकता है
कैल्शियमप्राकृतिक रूप से मिलता हैमात्रा सामग्री के अनुसार बदल सकती है
प्रोसेसिंगतुलनात्मक रूप से कमआमतौर पर ज्यादा प्रोसेस्ड
कीमतउत्पादन लागत ज्यादासामान्यतः सस्ता
लेबलपनीर के नाम से बेचा जाता है‘Analogue’ या ‘Non-dairy’ लिखा होना चाहिए

क्या एनालॉग पनीर सेहत के लिए खराब है

हर एनालॉग पनीर को जहरीला या तुरंत बीमार करने वाला भोजन नहीं कहा जा सकता। यदि उसे मान्य सामग्री और तय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाया गया है तो उसे खाने से तुरंत नुकसान होना जरूरी नहीं। हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं कि वह दूध से बने पनीर जितना पौष्टिक होगा।

दिपाली शर्मा कहती हैं - पारंपरिक पनीर की तुलना में एनालॉग पनीर में प्रोटीन की मात्रा या उसकी गुणवत्ता कम हो सकती है। कुछ उत्पादों में रिफाइंड फैट, सोडियम और फूड एडिटिव्स अधिक हो सकते हैं। इसका सही न्यूट्रिशन प्रोफाइल इस बात पर निर्भर करेगा कि उसे किन सामग्रियों से बनाया गया है।

पनीर को लेकर क्यों रहें अलर्ट

पनीर को लेकर क्यों रहें अलर्ट

मान लीजिए, कोई शाकाहारी व्यक्ति अपनी प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए पनीर खाता है। उसे लगता है कि पनीर की सब्जी खाकर पर्याप्त प्रोटीन मिल गया, लेकिन अगर उसमें स्टार्च और वेजिटेबल फैट वाला विकल्प इस्तेमाल हुआ है तो उसके भोजन का पोषण संतुलन बदल सकता है।

नियमित रूप से खाने पर क्या नुकसान हो सकता है

एनालॉग पनीर का स्वास्थ्य पर असर उसकी सामग्री, गुणवत्ता और खाई गई मात्रा पर निर्भर करेगा। अगर किसी उत्पाद में स्टार्च, नमक और रिफाइंड फैट अधिक है तो नियमित सेवन से शरीर को ज्यादा कैलोरी मिल सकती है, जबकि अपेक्षित प्रोटीन कम रह सकता है।

खासकर इन लोगों को एनालॉग पनीर पर अधिक सतर्क रहना चाहिए:

  • मोटापे या बढ़ते वजन से परेशान लोग
  • फैटी लिवर वाले मरीज
  • हाई कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड वाले लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग के मरीज
  • बच्चे, जिन्हें ग्रोथ के लिए पर्याप्त प्रोटीन चाहिए
  • बुजुर्ग, जिनमें मांसपेशियां कमजोर होने का खतरा अधिक रहता है
  • वे शाकाहारी लोग, जो प्रोटीन के लिए पनीर पर निर्भर हैं

दिपाली शर्मा समझाती हैं कि अगर अधिक प्रोसेस्ड विकल्पों को लगातार प्राकृतिक डेयरी उत्पादों की जगह दिया जाए तो व्यक्ति को पनीर से मिलने वाले पोषक तत्व समान मात्रा में नहीं मिल पाते। इसलिए केवल यह देखकर संतुष्ट न हों कि उत्पाद पनीर जैसा दिखाई दे रहा है। उसकी सामग्री और न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना भी जरूरी है।

एनालॉग और सिंथेटिक पनीर क्या एक ही हैं

आम बोलचाल में एनालॉग पनीर को नकली या सिंथेटिक पनीर कहा जा रहा है, लेकिन इनमें थोड़ा अंतर है।

नामइसका क्या मतलब है?
एनालॉग पनीरपनीर जैसा वैकल्पिक उत्पाद, जो वेजिटेबल फैट और दूसरी मान्य सामग्री से बनाया जा सकता है
गलत लेबल वाला एनालॉग पनीरएनालॉग उत्पाद, जिसे दूध का पनीर बताकर बेचा जा रहा हो
मिलावटी पनीरदूध से बने पनीर में सस्ता तेल, स्टार्च या अन्य सामग्री मिलाई गई हो
खतरनाक सिंथेटिक पनीरऐसा उत्पाद, जिसमें घटिया, अस्वीकृत या हानिकारक सामग्री इस्तेमाल हुई हो
इसलिए हर एनालॉग उत्पाद को खतरनाक सिंथेटिक पनीर कहना सही नहीं होगा। लेकिन उसे दूध वाला पनीर बताकर बेचना ग्राहक को गुमराह करना जरूर है।

सरकार को प्रतिबंध लगाने की जरूरत क्यों पड़ी

एनालॉग पनीर असली पनीर की तुलना में काफी सस्ता तैयार होता है। इसी अंतर का फायदा उठाकर कुछ होटल, रेस्टोरेंट और कैटरर इसे दूध वाले पनीर की जगह इस्तेमाल कर रहे थे। ग्राहक से कीमत असली पनीर की ली जाती थी, लेकिन उसे यह नहीं बताया जाता था कि डिश में एनालॉग उत्पाद इस्तेमाल हुआ है।

महाराष्ट्र में एक साल तक चले जांच अभियान में 35.4 प्रतिशत नमूने तय मानकों के अनुरूप नहीं मिले। ऐसे उत्पाद कई बार बिना मूल पैकेजिंग, बैच नंबर, बिल और जरूरी दस्तावेजों के बेचे जा रहे थे। इससे उनके स्रोत का पता लगाना भी मुश्किल था।

अप्रैल 2026 में FSSAI के पश्चिमी क्षेत्र ने भी साफ किया था कि चीज एनालॉग को ‘पनीर’ के नाम से बेचना नियमों का गंभीर उल्लंघन है। होटल और रेस्टोरेंट को मेन्यू या डिस्प्ले बोर्ड पर इसके इस्तेमाल की स्पष्ट जानकारी देने को कहा गया था।

ग्राहक से पहचान छिपाना सबसे बड़ी समस्या

पारस हेल्थ, पंचकूला की हेड डाइटीशियन पूजा गुप्ता बताती हैं कि एनालॉग पनीर पारंपरिक दूध वाले पनीर जैसा नहीं होता। इसे वेजिटेबल फैट और दूसरे फूड एडिटिव्स से बनाया जाता है। अगर यह फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुसार बना है और इस पर स्पष्ट लेबल लगा है, तो ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला कर सकता है। लेकिन इसे डेयरी पनीर बताकर बेचना ग्राहक को गुमराह करना है।

बात सीधी-सी है। यदि किसी उत्पाद पर साफ लिखा है कि वह एनालॉग है और उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू कितनी है, तो ग्राहक सोच-समझकर चुनाव कर सकता है। लेकिन उसे ग्रेवी में डालकर असली पनीर बता देना गलत है।

पनीर खरीदते समय लेबल पर क्या देखें

क्या जांचें?किस बात पर ध्यान दें?
उत्पाद का नामPaneer लिखा है या Analogue/Imitation/Non-dairy
सामग्री की सूचीदूध मुख्य सामग्री है या वेजिटेबल ऑयल और स्टार्च
फैट का स्रोतMilk fat है या vegetable/palm oil
प्रोटीनप्रति 100 ग्राम कितनी मात्रा दी गई है
सोडियमनमक की मात्रा बहुत अधिक तो नहीं
लाइसेंसFSSAI लाइसेंस नंबर है या नहीं
पैकेजिंगसीलबंद पैकेट, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट देखें

पूजा गुप्ता सलाह देती हैं कि पनीर हमेशा भरोसेमंद दुकान या ब्रांड से खरीदें। केवल सफेद रंग और मुलायम बनावट देखकर उसकी शुद्धता तय न करें। पैकेट का लेबल पढ़ें और बाहर खाना खाते समय जरूरत लगे तो पूछें कि डिश में दूध वाला पनीर है या एनालॉग।”

घरेलू टेस्ट पर कितना भरोसा करें

इंटरनेट पर पनीर की पहचान के कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। आयोडीन टेस्ट से स्टार्च की मौजूदगी का शुरुआती संकेत मिल सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि पनीर पूरी तरह सुरक्षित या असुरक्षित है। इसी तरह पनीर का बहुत मुलायम, सख्त या रबड़ जैसा होना भी मिलावट का पक्का प्रमाण नहीं है। किसी उत्पाद में किस तरह का फैट या कौन-सा एडिटिव है, इसका सही पता लैब टेस्ट से ही चलता है।

आखिर ग्राहक क्या करे

दिपाली शर्मा का कहना है कि इस मामले में स्पष्ट लेबलिंग, नियमों का सख्ती से पालन और उपभोक्ताओं की जागरूकता सबसे जरूरी है। ग्राहक को यह जानने का अधिकार है कि वह दूध से बना पनीर खरीद रहा है या कोई प्रोसेस्ड विकल्प। सामग्री की सूची देखकर ऐसा उत्पाद चुनें, जो आपकी पोषण संबंधी जरूरतों और हेल्थ गोल्स के अनुकूल हो।

कुल मिलाकर, हर एनालॉग उत्पाद को जहर मानकर डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे असली पनीर समझकर खाना भी ठीक नहीं। अगर आप पनीर को प्रोटीन और कैल्शियम के लिए खाते हैं तो उसकी सामग्री जानना जरूरी है। याद रखिए, सफेद रंग और मुलायम टेक्सचर उसके पौष्टिक होने की गारंटी नहीं हैं।

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