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क्या बंधकों की रिहाई के बाद अब गाजा में हो जाएगी शांति स्थापित या अभी भी चुनौतियां हैं बाकी?

हमास और इजराइल के बीच बंधकों की रिहाई निश्चित ही एक सकारात्मक कदम है और शांति की दिशा में उम्मीद जगाता है, लेकिन गाजा में स्थायी शांति अभी भी कई बड़ी चुनौतियों से घिरी हुई है। हमास और इजराइल के बीच गहरा राजनीतिक और वैचारिक टकराव अभी खत्म नहीं हुआ है। बंधकों की रिहाई के बाद भी शांति स्थापित करना एक लंबा और जटिल रास्ता है, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियों को हल करना होगा।

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गाजा में स्थाई शांति पर क्यों मंडरा रहा खतरा?
Curated by: शिशुपाल कुमार
Updated Oct 13, 2025, 23:33 IST
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हमास और इजराइल के बीच शांति समझौते पर बात आगे बढ़ रही है। बंधकों को दोनों ओर से रिहा किया जा रहा है। हमास ने सोमवार को युद्धविराम के तहत सभी 20 जीवित बंधकों को रिहा कर दिया। इस युद्धविराम ने गाजा पट्टी में दो साल से चल रहे संघर्ष को विराम दिया है, जिसमें हजारों फलस्तीनी मारे गए थे। इस समझौते के हिस्से के तौर पर, इजराइल ने 1,900 से अधिक फलस्तीनी कैदियों को भी रिहा किया है। बंधकों की यह रिहाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजराइल और हमास के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम और बंधक समझौते का जश्न मनाने के लिए इजराइल में मौजूद थे। अब सवाल ये है कि क्या बंधकों की रिहाई के बाद गाजा में शांति स्थापित हो पाएगी या फिर अभी भी कुछ जटील मुद्दों को दूर करना बाकी है।

क्यों गाजा में स्थायी शांति पर मंडरा रखा है खतरा?

अमेरिका और मिस्र के राष्ट्रपति युद्धविराम समझौते के बाद गाजा में दो साल से अधिक समय से जारी इजराइल-हमास संघर्ष को समाप्त करने के लिए वैश्विक नेताओं के “शांति सम्मेलन” की अध्यक्षता कर रहे हैं। इजराइल और हमास के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं है, और सोमवार के सम्मेलन में उनके शामिल होने की संभावना भी कम है। इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यहूदी अवकाश के कारण सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे। इजराइल ने गाजा के मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा समर्थित फलस्तीनी प्राधिकरण की किसी भी भूमिका को स्वीकार नहीं किया है। सम्मेलन से पहले, फलस्तीनी प्राधिकरण के नेता महमूद अब्बास सोमवार को शर्म अल शेख के रेड सी रिसॉर्ट पहुंचे। कतर में अमेरिका, अरब देशों और तुर्की के दबाव के बाद, हमास और इजराइल युद्धविराम के पहले चरण को लागू करने के लिए सहमत हुए थे। हमास का मुख्य समर्थक ईरान मिस्र में होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हो रहा है।

egypt peace deal

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इजराइल-हमास शांति वार्ता में कहां फंसा है पेंच?

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू साक्षात्कार में बताया कि गाजा संघर्ष विराम समझौते तक पहुंचने में मदद करने वाले मध्यस्थों ने हमास के शस्त्रागार जैसे जटिल मुद्दों पर वार्ता को अस्थायी तौर पर स्थगित करने का निर्णय लिया, क्योंकि युद्धरत पक्ष एक व्यापक समझौते के लिए तैयार नहीं थे। शेख मोहम्मद ने वर्षों से हमास नेतृत्व के साथ घनिष्ठ संपर्क बनाए रखा है और गाजा में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के प्रमुख मध्यस्थों में से एक हैं। उन्होंने यह बात तब कही जब इजराइल और हमास ने गाजा में युद्ध रोकने और बचे हुए सभी बंधकों के बदले लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई पर सहमति जताई थी। इस समझौते ने संघर्ष के कुछ सबसे जटिल मुद्दों को बाद के लिए छोड़ दिया, जिनमें हमास के हथियारों का भविष्य और युद्ध के बाद गाजा के शासन की व्यवस्था शामिल है। शेख मोहम्मद ने शुक्रवार को पेरिस में कहा- "अगर हम पूरी बातचीत करते, तो हम इन नतीजों तक नहीं पहुंच पाते।" यह बयान उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अरब तथा यूरोपीय विदेश मंत्रियों के साथ युद्धोत्तर गाजा पर हुई बैठक के बाद दिया।

किन मुद्दों पर सहमत हैं इजराइल और हमास?

  • बंधकों की रिहाई: दोनों पक्षों ने बंधकों के आदान-प्रदान पर सहमति जताई है।
  • युद्ध विराम: वर्तमान में एक स्थगित या अस्थायी युद्ध विराम लागू है, जिससे हिंसा को रोकने की कोशिश हो रही है।
  • मानवतावादी राहत: गाजा में राहत सामग्री और मदद पहुंचाने पर सहमति बनी है, ताकि आम जनता की स्थिति सुधारी जा सके।

किन मुद्दों पर असहमत हैं हमास और इजराइल?

  • हमास का निरस्त्रीकरण: इजराइल चाहता है कि हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ दे, जबकि हमास इसे स्वीकार नहीं करता।
  • गाजा का प्रशासन: गाजा के राजनीतिक नियंत्रण को लेकर मतभेद हैं-इजराइल और कुछ अंतरराष्ट्रीय समुदाय फलस्तीनी प्राधिकरण की भूमिका चाहते हैं, जबकि हमास इसे मानने को तैयार नहीं।
  • सुरक्षा उपाय: इजराइल की सुरक्षा चिंताएं और हमास की सैन्य क्षमताओं पर नियंत्रण को लेकर विवाद बना हुआ है।
  • स्थायी शांति समझौता: दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चलने वाला स्थायी शांति समझौता अभी भी दूर की संभावना है।
  • सीमा नियंत्रण: गाजा की सीमाओं के नियंत्रण को लेकर भी असहमति बनी हुई है, जो सामान और लोगों के आवागमन पर असर डालती है।

गाजा में स्थायी शांति के राह में कितनी अड़चनें?

इजराइल के साथ युद्ध ने हमास को काफी कमजोर कर दिया है। समूह के भीतर भविष्य की रणनीति को लेकर गहरा मतभेद मौजूद है। एक धड़ा हथियार छोड़ने से साफ इनकार चाहता है, भले ही इसका परिणाम नया युद्ध क्यों न हो। दूसरा धड़ा ज्यादा व्यावहारिक रुख अपनाने की वकालत कर रहा है- हथियारों और अन्य मामलों में समझौता और वास्तविकतावादी नीति। बचे हुए बंधकों को छोड़ने के बाद हमास ने इजराइल के साथ अपने पास मौजूद महत्वपूर्ण सामरिक और राजनीतिक महत्व खो दिया है। इस कमी के कारण यह अनिश्चित है कि हमास अपने सभी मूल लक्ष्यों को हासिल कर पाएगा या नहीं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बार-बार कह चुके हैं कि गाजा युद्ध को स्थायी रूप से बंद करने से पहले हमास का निरस्त्रीकरण आवश्यक है। परिणामस्वरूप, अब आगे की राह जटिल है- आंतरिक विभाजन, सीमित सामरिक विकल्प और इजराइली दवाब मिलकर किसी भी दीर्घकालिक समाधान को चुनौती दे रहे हैं।

hamas israel

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हमास-इजराइल के बीच अबतक क्या-क्या हुआ?

हमास और इजराइल के बीच मौजूदा जंग की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई, जब हमास ने इजराइल पर अचानक और बड़ा हमला कर दिया। यह हमला दशकों में सबसे भयावह माना गया। हमास के लड़ाके सीमा पार कर दक्षिणी इजराइल में घुसे, जहां उन्होंने रॉकेट दागे, नागरिकों पर हमला किया और सैकड़ों लोगों को मार डाला। इस हमले में 1,200 से अधिक इजराइली नागरिकों की मौत हुई और करीब 200 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया गया, जिनमें महिलाएं, बच्चे और विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इजराइल ने इस हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन आयरन स्वॉर्ड्स’ शुरू किया और गाजा पट्टी पर भीषण हवाई हमले किए। इस जवाबी कार्रवाई में हजारों फिलिस्तीनी मारे गए और लाखों विस्थापित हो गए। इजराइल ने गाजा की बिजली, पानी और ईंधन आपूर्ति भी काट दी, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा गया। आज की स्थिति यह है कि संघर्ष विराम लागू है, लेकिन कई जटिल सवाल अभी भी बाकी हैं- गाजा का प्रशासन कौन संभालेगा, हमास का क्या होगा, और क्या इजराइल-फिलिस्तीन के बीच कभी टिकाऊ शांति स्थापित हो सकेगी।

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