Times Now Navbharat
live-tv
Premium

अमेरिका-चीन तनाव में जापानी फैक्टर, ताकाइची का दक्षिणपंथ से कितना बदल जाएगा पूर्वी एशिया का समीकरण?

ताकाइची का उभार और दक्षिणपंथी राजनीति का पुनरुत्थान केवल जापान की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। यह अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता को नया आयाम दे सकता है। अमेरिका के लिए यह फायदेमंद है क्योंकि उसे एक और मजबूत सहयोगी मिलेगा, लेकिन चीन के लिए यह सीधी चुनौती होगी। पूर्वी एशिया में आने वाले वर्षों में शक्ति-संतुलन का समीकरण काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि साने ताकाइची अपने “Japan is Back” विजन को कितनी आक्रामकता से लागू करती हैं।

Image
साने ताकाइची बन सकती हैं जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री (फोटो- AP)
Curated by: Shishupal Kumar
Updated Oct 5, 2025, 00:22 IST
Follow on Google News

जापान को इतिहास में पहली बार एक महिला प्रधानमंत्री मिल सकती है, यह करीब-करीब तय ही है। जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की नेता के रूप में साने ताकाइची के नाम पर मुहर लग गई है। साने ताकाइची जापान की राजनीति में बड़ा नाम है और यह जापान की पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री रह चुकी हैं। ताकाइची के आगमन के साथ ही जापान में दक्षिणपंथ की आहट भी सुनाई देने लगी है। क्योंकि ताकाइची खुद दक्षिणपंथ की राजनाति करती हैं और ताकाइची के विचार पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मिलते हैं। चीन की आलोचक रही हैं और टोक्यो स्थित 'यासुकुनी तीर्थस्थल' नियमित रूप से जाती हैं। जहां जापानी युद्ध में मारे गए लोगों, जिनमें युद्ध अपराधी भी शामिल हैं, को श्रद्धांजलि दी जाती है। उनकी छवि काफी रूढ़िवादी रही है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच जापान की राजनीति में दक्षिणपंथ की वापसी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जापान की नेता साने ताकाइची की उभार और उनके “Japan is Back” एजेंडे को इस क्षेत्र में शक्ति-संतुलन बदलने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि ताकाइची के दक्षिणपंथी रुख से पूर्वी एशिया का भू-राजनीतिक समीकरण कैसे बदल सकता है और अमेरिका के लिए यह क्यों फायदेमंद साबित हो सकता है?

"Japan is Back” विजन

ताकाइची जापान की कंजरवेटिव राजनीति का चेहरा हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत रक्षा नीति की हिमायती मानी जाती हैं। उनका विजन “Japan is Back” जापान को सिर्फ आर्थिक महाशक्ति ही नहीं, बल्कि सैन्य और रणनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने का संकेत देता है। ताकाइची का एजेंडा संविधान में बदलाव और आत्मरक्षा बल को पूर्ण सेना का दर्जा देने से जुड़ा है।

Sanae Takaichi

Sanae Takaichi

अमेरिका के लिए क्यों है खुशखबरी?

अमेरिका खासकर ट्रंप लंबे समय से चाहते रहे हैं कि जापान अपनी सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाए ताकि चीन को काउंटर किया जा सके। ताकाइची का दक्षिणपंथी झुकाव अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति से मेल खाता है। इससे अमेरिका को चीन के खिलाफ मजबूत क्षेत्रीय साझेदार मिल सकता है। जापान पहले ही क्वाड (Quad) और AUKUS जैसे सुरक्षा समूहों का अहम सदस्य है। ताकाइची की नीतियां इन समूहों की रणनीतिक ताकत को और बढ़ा सकती हैं। नव नियुक्त एलडीपी अध्यक्ष ने अमेरिका के साथ व्यापार और निवेश समझौते पर फिर से बातचीत करने की संभावना जताई है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप 550 अरब डॉलर के जापानी निवेश के बदले जापानी कारों और अन्य वस्तुओं पर शुल्क कम करने पर सहमत हुए थे।

टैरिफ पर टकराव संभव

हालांकि टैरिफ के मुद्दे पर जापान और अमेरिका आमने सामने हो सकते हैं। चुनावी प्रचार के दौरान, ताकाइची ने कहा था कि वह अपने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा किए गए टैरिफ समझौते का पालन करेंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी सरकार को लगता है कि यह समझौता जापान के हित में नहीं है, तो वे फिर से बातचीत कर सकती हैं। मतदान से कुछ दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताकाइची ने कहा, "अगर कोई ऐसा पहलू सामने आता है जो बेहद असमान और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के लिए हानिकारक हो, तो हमें अपनी चिंताओं को दृढ़ता से व्यक्त करना चाहिए। फिर से बातचीत की भी संभावना है।" वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषकों का कहना है कि यह टिप्पणी व्यापार और निवेश को लेकर और भी विवाद की संभावना की ओर इशारा करती है। समझौते की शर्तों के तहत, अगर जापान विशिष्ट निवेशों के लिए धन देने से इनकार करता है, तो ट्रंप जापानी आयातों पर शुल्क बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। कैलिफोर्निया स्थित शोध संस्थान रैंड कॉर्प में जापान प्रमुख जेफरी हॉर्नंग ने व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा, "अगर वह इसे फिर से खोलने की कोशिश करती हैं, तो इससे काफी तनाव पैदा होगा।"

Sanae Takaichi japan

Sanae Takaichi japan

चीन के लिए चुनौती

चीन दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्ट्रेट में अपनी आक्रामकता बढ़ा रहा है। ताकाइची के सत्ता में आने से जापान अपनी नौसेना और वायुसेना को और मजबूत करने की ओर बढ़ सकता है। जापान और चीन के बीच द्वीप विवाद पहले से ही तनाव का कारण हैं। ताकाइची का रुख इस विवाद को और ज्यादा आक्रामक बना सकता है, जिससे बीजिंग की चिंता और बढ़ेगी।

क्या तनाव बढ़ेगा?

ताकाइची का दक्षिणपंथ निश्चित रूप से पूर्वी एशिया में हथियारों की होड़ को तेज करेगा। चीन इसे “घेराबंदी” मानकर अपनी सैन्य शक्ति को और आगे बढ़ा सकता है। ताइवान स्ट्रेट और दक्षिण चीन सागर में अमेरिका-चीन के साथ अब जापान भी एक सक्रिय फैक्टर बन सकता है।

Sanae Takaichi japan next pm

Sanae Takaichi japan next pm

भारत और क्षेत्रीय देशों पर असर

भारत के लिए ताकाइची की नीतियां रणनीतिक अवसर लेकर आ सकती हैं, क्योंकि जापान, अमेरिका और भारत मिलकर चीन को बैलेंस करने की कोशिश करेंगे। दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ेगा कि वे सुरक्षा मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं। दक्षिण-पूर्व एशिया के छोटे देशों (वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया) को भी जापान का मजबूत होना एक सुरक्षा गारंटी जैसा लगेगा।

ताकाइची के रास्ते भी आसान नहीं

कई पूर्ववर्तियों के विपरीत, ताकाइची 15 अक्टूबर को संसद की बैठक में प्रधानमंत्री पद चुनी ही जाएंगी, इसको लेकर कोई आश्वासन नहीं है। एलडीपी और उसके गठबंधन सहयोगी, कोमेइतो, पिछले एक साल में संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत खो चुके हैं और ताकाइची को मंजूरी के लिए विपक्ष के वोटों पर निर्भर रहना होगा - हालांकि पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह लगभग तय है।

End of Article