Times Now Navbharat
live-tv
Premium

बिश्केक में आयोजित 25वां SCO समिट भारत के लिए क्यों बेहद अहम, क्या हैं 5 बड़े एजेंडे?

रूस और ईरान जैसे दो सदस्य देशों के युद्धों में उलझे होने के कारण, इस बैठक में चल रहे संघर्षों पर विस्तृत चर्चा होगी। ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों की समीक्षा की जाएगी।

Image
Photo : AP
SCO समिट पर भारत की नजर
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Sep 1, 2026, 13:52 IST
Follow on Google News

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 25वां शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। 10 सदस्यीय इस मुख्य समूह की यह बैठक अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के कारण बेहद खास है। पिछले साल चीन के तियानजिन में आयोजित सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच का त्रिस्तरीय हैंडशेक दुनिया भर में सुर्खियों में रहा था। अब इस 25वें सम्मेलन का परिणाम न केवल यूरेशियाई भू-राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन, 2028-2029 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सीट और लंबे समय से लंबित 'भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन' का खाका भी तैयार करेगा।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?

SCO की शुरुआत 1996 में 'शंघाई फाइव' (चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान) के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य सोवियत संघ के विघटन के बाद सीमा विवादों को सुलझाना और सैन्य तनाव कम करना था। 2001 में उज्बेकिस्तान के जुड़ने के बाद इसे औपचारिक रूप से SCO नाम दिया गया। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस को शामिल किया गया।

  • वर्तमान में इसके 10 सदस्य देश हैं—रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस।
  • यह संगठन वैश्विक आबादी के लगभग 3.4 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और दुनिया की जीडीपी में लगभग 25% का योगदान देता है।
  • तुर्कमेनिस्तान एकमात्र मध्य एशियाई देश है जो इससे बाहर है। अफगानिस्तान और मंगोलिया इसके पर्यवेक्षक हैं, जबकि तुर्की, अजरबैजान और सऊदी अरब इसके डायलॉग पार्टनर हैं।
  • यह नाटो (NATO) की तरह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और न ही यूरोपीय संघ (EU) की तरह आर्थिक ब्लॉक। यह आम सहमति पर आधारित एक कूटनीतिक और सुरक्षा मंच है।

इस बार के SCO सम्मेलन के मुख्य एजेंडे

रूस और ईरान जैसे दो सदस्य देशों के युद्धों में उलझे होने के कारण, इस बैठक में चल रहे संघर्षों पर विस्तृत चर्चा होगी। ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों की समीक्षा की जाएगी। आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और क्रॉस-बॉर्डर सुरक्षा (विशेष रूप से अफगानिस्तान से जुड़े खतरों) से निपटने के लिए SCO के रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS) की योजनाओं पर मुहर लगेगी। सम्मेलन में प्रस्तावित 'SCO डेवलपमेंट बैंक' (जिसकी चौथी दौर की वार्ता जून में शेन्जेन में हुई थी) के परिचालन ढांचे पर बात होगी। साथ ही, सेंट पीटर्सबर्ग को मुंबई से जोड़ने वाले 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) और माल ढुलाई के लिए घोषित 'सिल्क रोड स्टेशन' नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर रहेगा। आंतरिक कूटनीतिक तनाव: भारत-चीन संबंधों में सुधार और भारत-पाकिस्तान के बीच के तनाव भी इस बैठक के परोक्ष एजेंडे में रहेंगे।

  1. नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की तैयारी
  2. 2028-2029 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सीट
  3. SCO के रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS) की योजनाओं पर मुहर लगेगी
  4. लंबित 'भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन' का खाका भी होगा तैयार
  5. 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) पर काम

भारत के लिए यह सम्मेलन क्यों बेहद महत्वपूर्ण है?

नई दिल्ली में 12 सितंबर को होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही यह बैठक एजेंडा तय करने में सहायक होगी। अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात हो चुकी है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) की नाकेबंदी से भारत को होने वाली चिंताओं पर चर्चा हुई। साथ ही भारत, ईरान और यूएई के बीच तनाव को कम करके ब्रिक्स के संयुक्त बयान पर सहमति बनाने का प्रयास हुई।

UNSC अस्थायी सीट चुनाव (2028-2029)

जून 2027 में होने वाले UNSC की गैर-स्थायी सीट के चुनाव में भारत और तजाकिस्तान दोनों एशियाई ब्लॉक से दावेदार हैं। पीएम मोदी इस सम्मेलन का उपयोग तजाकिस्तान को अपनी उम्मीदवारी एक साल टालने के लिए मनाने में कर सकते हैं (ठीक उसी तरह जैसे 2009 में भारत ने कजाकिस्तान को 2011-12 के लिए उम्मीदवारी वापस लेने के लिए मनाया था)। भारत लंबे समय से स्थगित पड़े 'भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन' की नई तारीखें तय करने का प्रयास करेगा। भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ यह मंच भारत को यूरेशिया क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बनाए रखने का मौका देता है।

रूस और अन्य वैश्विक शक्तियों के लिए मायने

पश्चिमी देशों के दबाव और यूक्रेन युद्ध के बीच, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बिश्केक में कम से कम 9 द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, ताकि वैश्विक मंच पर रूस का दबदबा बरकरार रखा जा सके। इस सम्मेलन के समापन के साथ ही SCO की अगली अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपी जाएगी।

End of Article