Protest In Iran: अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील के लिए 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद दुनिया जहां राहत की सांस ले रही है लेकिन ईरान में एक धड़ा ऐसा भी है जो इस करार से खुश नहीं बल्कि नाराज है। यह डील लोगों को भरोसे में नहीं ले पाया है। ईरान में इस डील के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के खिलाफ नारेबाजी हुई है। ईरान के कई शहरों में ये विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। कुछ ईरानी सांसद भी डील की रूपरेखा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इन्होंने पूछा है कि क्या सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई ने इस डील का समर्थन किया है?
तेहरान एवं मशहाद की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी
यरूशलम पोस्ट ने अरब के एक समाचार पत्र के हवाले से कहा है कि इस सप्ताह के अंत में चरमपंथी तेहरान एवं मशहाद की सड़कों पर उतरकर इस डील का विरोध किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चरमपंथी डील की रूपरेखा से खुश नहीं हैं। खासकर ये सीजफायर से जुड़ी शर्तों एवं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने वाले प्रावधान का विरोध कर रहे हैं। तेहरान में प्रदर्शनकारी सड़कों पर एकत्र हुए और अराघची एवं गालिबाफ के खिलाफ नारे लगाए। पूर्वी शहर मशहाद में विदेश मंत्रालय के बाहर एकत्र हुए लोगों ने 'अराघची को शर्म आनी चाहिए और देश छोड़ देना चाहिए' के नारे लगाए।
विदेश मंत्रालय के सामने प्रदर्शन किया
अन्य प्रदर्शनकारियों ने पूछा-'गालिबाफ, अराघची-हमारे नेता के लहू के बारे में क्या है?' मशहाद में ही विदेश मंत्रालय के सामने एक अन्य प्रदर्शन में भीड़ ने अराघची के खिलाफ नारेबाजी की। यही नहीं कुछ इलाकों में डील के समर्थकों एवं विरोधियों में आमना-सामना और संघर्ष होने की भी रिपोर्टें हैं। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक टेलिविजन पर अराघची द्वारा इस डील के बारे में चर्चा किए जाने के बाद दर्जनों लोग सड़कों पर उतरकर उनका विरोध किया। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक काला लिबास पहनी महिलाओं ने हाथ में लाल एवं काल रंग के झंडे लेकर अराघची के खिलाफ नारेबाजी की। कुछमहिलाएं 'डेथ टू अराघची, अराघची शर्म करो, समझौता मत करो, गद्दार अराघची की मौत हो जाए' नारे लगाते सुनी गईं।
iran Protest
ईरानी कट्टरपंथी क्यों परेशान हैं?
CNN के अनुसार, वाशिंगटन के साथ बातचीत का विरोध करना ईरान के भीतर कोई नई बात नहीं है। हालांकि, इस बार जो चीज अलग है, वह है कुछ समूहों, नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा इस समझौते का किया जा रहा तीव्र विरोध। उनका मानना है कि यह समझौता युद्ध के दौरान तेहरान द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को कमजोर करता है। मीडिया आउटलेट ने कहा कि 'नेजाम' (जैसा कि ईरान के राजनीतिक तंत्र को जाना जाता है) वाशिंगटन के साथ बातचीत के दौरान एक एकजुट मोर्चा पेश करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
यूएस के साथ किसी समझौते के खिलाफ हैं कट्टरपंथी
इसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, अराघची, संसदीय नेता और सेना शामिल हैं। मीडिया संस्था ने कहा कि सरकारी मीडिया से जुड़े लोग, अनुभवी रूढ़िवादी राजनेता और वे कार्यकर्ता जो यह मानते हैं कि ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध जीत लिया है, वाशिंगटन के साथ किसी भी समझौते के खिलाफ हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया है कि शीर्ष नेतृत्व को इस समझौते के बारे में गुमराह किया जा रहा है। अरबी समाचार पत्र अल-अरबी अल-जदीद के अनुसार, इस समझौते का विरोध करने वाले कार्यकर्ता और सांसद ईरान के रूढ़िवादी (कंजर्वेटिव) खेमे से आते हैं। उनमें से कई ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व सचिव सईद जलीली के करीबी हैं।
'ईरान के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं करता यह समझौता'
कट्टरपंथी ईरानी नेताओं का तर्क है कि यह समझौता ईरान के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं करता है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश के नियंत्रण/प्रभाव को कमजोर कर सकता है। आलोचकों ने ईरानी वार्ताकारों पर वाशिंगटन के साथ समझौता करने के लिए बहुत अधिक रियायतें देने का आरोप लगाया है। कट्टरपंथी ईरानी अखबार 'कायहान' के संपादक हुसैन शरियतमदारी ने भी अपने संपादकीय में इस समझौते की कड़ी आलोचना की है। शरियतमदारी ने लिखा है, 'क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से वास्तव में दुश्मन का व्यावसायिक और आर्थिक रास्ता बंद नहीं हुआ था?'
'तेहरान के दुश्मनों के हौसले बुलंद होंगे'
उन्होंने आगे कहा कि वाशिंगटन से मुआवजा प्राप्त करना क्रांति के नेता द्वारा घोषित मांगों में से एक 'था और आज भी है।' उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ईरान होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमत हो जाता है, तो वह इसे कैसे हासिल करेगा, और तर्क दिया कि ऐसा करने से उसका दबदबा कमजोर हो जाएगा। शरियतमदारी ने ईरान द्वारा होर्मुज पर नियंत्रण के बदले शिपिंग सेवा शुल्क लेने के प्रस्तावों को भी अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया और चेतावनी दी कि इससे तेहरान के दुश्मनों के हौसले बुलंद होंगे।
ओबामा के समय के समझौते से बेहतर है यह डील-मेहदी
'द नेशनल' के अनुसार, अराघची ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ शांति समझौता 'अब तक के सबसे करीब' है और अब औपचारिक रूप लेने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने ईरानी सरकारी टीवी पर यह दावा भी किया है कि तेहरान 'अमेरिका के साथ युद्ध का विजेता' रहा है। 'द गार्जियन' के अनुसार, गालिबाफ के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने आलोचकों पर पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया कि यह सौदा बराक ओबामा के कार्यकाल में 2015 में हुए परमाणु समझौते से बेहतर है। उन्होंने कहा, 'इस बार ऐसा नहीं है कि हम परमाणु कार्यक्रम बंद कर देंगे और उनके द्वारा प्रतिबंध हटाए जाने का इंतजार करेंगे। ऐसा कोई ख्याली पुलाव नहीं है। जलडमरूमध्य हमारे हाथ में है; हम जब चाहें, एक घंटे के भीतर इसे बंद कर सकते हैं।'
'उन्होंने क्षेत्र में हमारी ताकत देखी है'
उन्होंने आगे कहा, 'हम जानते हैं कि अमेरिका हमें पैसा नहीं देगा। अरब देशों ने इस पैसे का वादा किया है और वे इसे देने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि हम उनसे ऊपर हैं और उन्होंने क्षेत्र में हमारी ताकत देखी है। इस समझौते का एक निहितार्थ यह है कि अरब देशों को ईरान की संप्रभुता और सर्वोच्चता को स्वीकार करने तथा रियायतें देने में भागीदार बनने के लिए मजबूर होना पड़ा है।'
समझौते के मसौदे पर हुए डिजिटल हस्ताक्षर
Protest in Iran
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ होने वाले शांति समझौते पर हस्ताक्षर कार्यक्रम में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से खबर में कहा कि ट्रंप और वेंस दोनों ने ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ के साथ इस समझौते के मसौदे पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए हैं। ट्रंप ने सोमवार को फ्रांस में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वेंस हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे। समारोह में उनकी उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, 'मैं शामिल हो भी सकता हूं और नहीं भी।’
ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे-नेतन्याहू
वहीं, इजराइल में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने कदमों का बचाव करते हुए कहा कि 'ईरान को समझौते के साथ या उसके बिना भी परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे।’नेतन्याहू ने सोमवार शाम आयोजित एक संक्षिप्त संवाददाता सम्मेलन में हिब्रू भाषा में कहा, 'ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे, न आज और न कल।’उन्होंने कहा, 'लोग मुझसे पूछते हैं कि हमने क्या हासिल किया है? मेरा जवाब है कि हमने अपने ऊपर मंडरा रहे विनाश के तत्काल खतरे को टाल दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने इजराइल राष्ट्र को पूर्ण विनाश के खतरे से बचाया है।’
