US attack on Kharg Island: शुक्रवार रात अमेरिका ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर भीषण हमला कर दिया, यहां इसने भीषण बमबारी की और खर्ग आइलैंड पर ईरान के जितने भी सैन्य अड्डे और ठिकाने थे, उसे अपनी बमबारी में बर्बाद कर दिया। बमबारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रुथ सोशल पर बमबारी का एक वीडियो पोस्ट किया। हालांकि, उन्होंने इस वीडियो के साथ कुछ लिखा नहीं, लेकिन माना यही जा रहा है कि यह वीडियो खर्ग आइलैंड पर हुई बमबारी का है। अपने इस पोस्ट से पहले उनका एक और पोस्ट है जिसमें वह ईरान को खुले तौर पर चेतावनी दी। इस पोस्ट में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्ट्रेट आफ होर्मुज में ऑयल टैंकरों और जहाजों के आवाजाही में ईरान यदि किसी तरह का अवरोध और बाधा खड़ी करता है तो इसके नतीजे बहुत बुरे होंगे। ट्रंप ने कहा कि अभी के हमले में तो उन्होंने खर्ग द्वीप पर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों एवं तेल से जुड़ी उसकी बुनियादी संरचना को बख्श दिया है लेकिन स्ट्रेट ऑफ होरमुज में ईरान ने यदि अब किसी तरह की दिक्कत पैदा की तो अंजाम बहुत बुरा होगा। वह खर्ग द्वीप पर मौजूद ईरानी तेल संरचना को तहश-नहश और उसे बर्बाद कर देंगे। ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व के इतिहास में इतनी भीषण बमबारी कभी नहीं हुई।
ईरान के तट से करीब 25 किलोमीटर दूर है खर्ग द्वीप
इसके अलावा ट्रंप ने ईरान युद्ध के बारे में कई सारी बातें कही हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान की वायु सेना, नौसेना पूरी तरह खत्म हो गई है और उसके पास सैन्य क्षमता बहुत कम बची है। तेल के दाम कब कम होंगे और यह युद्ध कब रुकेगा इसके बारे में भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी लेकिन हम यहां बात खर्ग द्वीप पर हुए हमले की करेंगे। सवाल है कि ईरान से करीब 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खर्ग द्वीप को अमेरिकी सेना ने आखिर निशाना क्यों बनाया? यह द्वीप ईरान के लिए कितना अहमियत रखता है और इस द्वीप पर हमला कर ट्रंप, ईरान को क्या संदेश देना चाहते हैं। इस द्वीप की अहमियत इतनी है कि इसे को ईरान का 'दिल' और उसकी 'लाइफलाइन' कहा जाता है। खर्ग पर हमला कर ट्रंप ने ईरान को गहरी चोट पहुंचाई है, इसमें कोई शक नहीं है।
Strait Of Hormuz
इस द्वीप से गुजरता है ईरान का 90 प्रतिशत कच्चा तेल
यह छोटा द्वीप ईरान के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? तो इसका सीधा जवाब है तेल। इस द्वीप पर ईरान के तेल रिजर्व्स हैं। इस द्वीप पर वह अपने तेल का भंडारण करता है और करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल को वह यहीं से बाहर भेजता और निर्यात करता है। चूंकि, ऑयल के एक्सपोर्ट पर ईरान पर बहुत सारे प्रतिबंध लगे हैं। वह उस तरह से तेल नहीं बेच सकता है जिस तरह से सऊदी अरब, कतर, इराक, ओमान और बहरीन जैसे खाड़ी के देश बेचते हैं। गिने-चुने देश ही उससे तेल खरीदते हैं। भारत भी एक समय ईरान से तेल खरीदता था। जो देश ईरान से तेल खरीदते आए हैं उनमें सबसे बड़ा देश चीन है। कहा जाता है कि ईरान का करीब 90 प्रतिशत तेल चीन खरीदता है। इसके बाद सीरिया, यूएई, वेनेजुएला और मलेशिया जैसे देश भी ईरान से तेल का आयात करते हैं लेकिन ये देश कम मात्रा में ईरान से तेल मंगाते हैं। ईरान का सबसे बड़ा ग्राहक चीन ही है और इस तेल के बदले में चीन, ईरान को पैसे, तकनीक और हथियार से मदद देता आया है।
ईरान की कमाई का जरिया है यह द्वीप
ईरान की अर्थव्यवस्था कैसी है इसके बारे में आप सभी को पता है। प्रतिबंधों की वजह से उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई। बेतहाशा बढ़ी महंगाई और रियाल की कमजोरी से बेहाल जनता बीते जनवरी में सड़क पर उतर आई। इस हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को आप ने भी देखा। बात यह है कि सरकार चाहे जनता द्वारा चुनी गई हो, सैन्य सरकार हो या चरमपंथी इस्लामी सरकार। देश और व्यवस्था चलाने के लिए उसे पैसों की जरूरत होती है। खाड़ी देशों और ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ या कहिए कमाई का जरिया तेल ही है। तेल के अलावा इनके पास ऐसा कुछ नहीं है जिससे वे अपनी व्यवस्था चला पाएं। तेल बेचकर ही ये खूब मोटी कमाई करते हैं।
Oil tanker
करीब 30 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल के भंडारण की क्षमता
तेल का निर्यात रुक जाए तो इन देशों को खुद को खड़ा रख पाना मुश्किल हो जाएगा। चीन और अन्य देशों को तेल का निर्यात कर ईरान अपने लिए पैसे का बंदोबस्त करता है। कहा जाता है कि उसका तेल ब्लैक मार्केट में भी जाता है। कहने का मतलब है कि ईरान के तेल कारोबार में खर्ग द्वीप सबसे अहम है। ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात इसी द्वीप के रास्ते होते हैं। इस द्वीप से ईरान से रोजाना सात मिलियन बैरल कच्चा तेल टैंकरों पर अपलोड कर सकता है। इसके अलावा इस द्वीप पर करीब 30 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल के भंडारण की क्षमता है। यहां ईरान की ऑयल की बुनियादी संरचना काफी मजबूत है। यह द्वीप बड़े-बड़े से ऑयल टैंकर को आसानी से हैंडल कर लेता है। इन वजहों से इस द्वीप को ईरान की 'लाइफ लाइन' कहा जाता है। यहां से तेल का कारोबार यदि रुका तो ईरान ठप पड़ जाएगा।
ट्रंप ने अपनी बमबारी से ईरान को साफ-साफ संकेत दे दिया है कि अगर उसे अपने इस द्वीप के तेल भंडार और ऊर्जा संरचना को बचाकर रखना है तो उसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों को आने-जाने देना होगा। होर्मुज में टांग अड़ाया तो उसे खर्ग के रूप में बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
