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जमात, Gen Z दोनों पर बांग्लादेश ने क्यों नहीं जताया भरोसा? लोगों की पहली पसंद कैसे बन गई BNP

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद हुए चुनाव में बीएनपी का नेतृत्व उनके बेटे तारिक रहमान ने किया। बीएनपी की इस भारी जीत के बाद कहा जा रहा है कि 17 साल तक निर्वासन में रहने वाले तारिक बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बीएनपी की अगर बात करें तो यह बांग्लादेश पुरानी पार्टियों में से एक है। इसका गठन पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने 1978 में किया ।

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Photo : AP
बांग्लादेश चुनाव में BNP को मिली जबर्दस्त जीत।
Updated Feb 13, 2026, 15:11 IST

Bangladesh Election Results 2026: अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद बांग्लादेश में पहली बार हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की बंपर जीत हुई है। चुनाव नतीजों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड सीटों पर जीत दर्ज की है। अलग-अलग रिपोर्टों की मानें 300 सदस्यों वाली संसद में उसने दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार किया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद हुए चुनाव में बीएनपी का नेतृत्व उनके बेटे तारिक रहमान ने किया। बीएनपी की इस भारी जीत के बाद कहा जा रहा है कि 17 साल तक निर्वासन में रहने वाले तारिक बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बीएनपी की अगर बात करें तो यह बांग्लादेश पुरानी पार्टियों में से एक है। इसका गठन पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने 1978 में किया और इसका संचालन उनकी पत्नी एवं प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने बेहद कामयाबी से किया। लेकिन बीते दिसंबर महीने में बीएनपी की कमान अपने हाथ में लेने के बाद तारिक ने इसे सत्ता के शिखर तक पहुंचा दिया। जिया के निधन के बाद पार्टी में आई रिक्तता को भरने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने में वह सफल हुए।

जमात और NCP से था BNP का मुकाबला

शेख हसीना जिन्होंने 5 अगस्त 2024 को तख्तापलट होने के बाद भारत में शरण ली, उनकी पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लग गया था। वह इस चुनाव का हिस्सा नहीं थी। ऐसे में बीएनपी के सामने उसकी पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी नहीं थी। ऐसे में बीएनपी का सामना जमात-ए-इस्लामी और हसीना सरकार का तख्तापलट करने वाली Gen Z की नई नवेली पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी (NCP) से था लेकिन चुनाव में बांग्लादेश के लोगों ने न तो जमात और न ही एनसीपी पर भरोसा जताया। लोगों का भरोसा मुख्य धारा की पार्टी और स्थायी सरकार दे सकने में सक्षम बीएनपी पर रहा।

BNP

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BNP को मिला चुनाव में आवामी लीग के न होने का फायदा

हालांकि, बीएनपी की इस बड़ी जीत में खालिदा जिया की मौत के बाद पार्टी को मिली सहानुभूति भी शामिल है। लेकिन बीएनपी की इस जीत में सहानुभूति एक कारण नहीं है। बीएनपी की इस जीत के कई कारण हैं। सबसे बड़ी वजह तो चुनाव मैदान में आवामी लीग का नहीं होना था। आवामी लीग यदि चुनाव में होती तो नतीजे इस तरह के शायद नहीं होते जैसा कि आए हैं। हसीना की अनुपस्थिति में भी आवामी लीग अपनी उपस्थिति दर्ज कराती। चुनावी परिदृश्य में अवामी लीग के न होने से उसकी जगह बड़ी और स्थापित पार्टियां लेने में सफल हो गईं और इसमें बीएनपी सबसे आगे रही। उसे अपना परंपरागत वोट तो मिला ही, आवामी लीग के वोट बैंक में भी उसने बड़े पैमाने पर सेंधमारी की। दूसरा, शफीकुर रहमान की अगुवाई वाले जमात ए इस्लामी उसे चुनाव में टक्कर नहीं दे पाया। हालांकि, उसका गठबंधन हसीना को सत्ता से उखाड़ फेंकने वाले Gen Z की पार्टी एनसीपी से था। दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन लोगों ने दोनों को नकार दिया।

shafikur rahman

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लोगों का भरोसा नहीं जीत पाई एनसीपी

अगस्त 2024 के आंदोलन के बाद बांग्लादेश में Gen Z एक बड़ी ताकत बन गई थी। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में जिस अंतरिम सरकार का गठन हुआ उसमें कई छात्र नेता शामिल हुए। इसके नेता बांग्लादेश से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे। इनमें से कई ने भारत विरोधी बयान देकर खूब सुर्खियां बटोरीं। बांग्लादेश की राजनीति में Gen Z के बढ़े दबदबे और रसूख को देखकर लगा कि चुनाव में एनसीपी बेहतर प्रदर्शन करेगी लेकिन उसने निराश किया। लोगों ने एक तरह से उसे खारिज कर दिया। जमात की तरह उसे भी भारी हार का सामना करना पड़ा है। एनसीपी की इस हार के पीछे एक्सपर्ट्स कई वजह मानते हैं। इनमें दो सबसे बड़ी वजह एकजुटता का अभाव और लोगों का भरोसा न होना है। चुनाव लड़ने के लिए जिस तरह की एकजुटता होनी चाहिए थी, वह एनसीपी में नहीं थी। उसमें एक बिखराव था। संगठन कमजोर और इसमें महिलाएं हाशिए पर थीं। दूसरा लोग इसे एक परिपक्व राजनीतिक पार्टी के रूप में नहीं देख रहे थे। राजनीतिक अनुभव एवं नेतृत्व की कमी लोगों में विश्वास नहीं जमा सकीं। लोगों ने Gen Z की भूमिका आंदोलन चलाने तक ही देखा। उन्होंने देश की कमान संभालने के लिए पुरानी पार्टी को चुना।

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