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बर्गेनस्टॉक में MoU पर मंथन, पहले दौर की वार्ता में ईरान को क्या हासिल हुआ? US ने किन बातों पर जताई सहमति

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X पर अपने एक पोस्ट में कहा कि 'ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद के निर्यात पर छूट मिली है। ईरान के बंदरगाहों पर यूएस ने जो नाकेबंदी लगाई थी, उसे हटा लिया गया है। यहां तक कि ईरान की जप्त संपत्तियों में से कुछ को जारी किया गया है।

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एमओयू पर स्विटजरलैंड में हुई ईरान-यूएस के बीच बातचीत।
Written by: Alok Rao
Updated Jun 22, 2026, 14:56 IST
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US-Iran MoU Talk: स्विटजरलैंड के बर्गेनस्टॉक पर दुनिया भर की नजरें लगी हैं। इस सुंदर शहर में अमेरिका और ईरान के बीच 14 प्वाइंट वाले 'मेंमोरेंडम ऑफ स्टैंडिंग' (MoU) पर बातचीत हो रही है। कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में हैं। दोनों पक्षों के बीच रविवार को लंबी बैठक चली। बातचीत चल ही रही थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से ईरानी शिष्टमंडल खफा हो गया और वह बैठक से उठकर चला गया लेकिन बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X पर अपने एक पोस्ट में कहा कि 'ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद के निर्यात पर छूट मिली है। ईरान के बंदरगाहों पर यूएस ने जो नाकेबंदी लगाई थी, उसे हटा लिया गया है। यहां तक कि ईरान की जप्त संपत्तियों में से कुछ को जारी किया गया है। ईरान के विकास से जुड़ी एक योजना पर भी चर्चा हुई।' जाहिर है कि पहले दौर की बातचीत से ईरान खुश है और इससे वार्ता के आगे बढ़ने की उम्मीद है।

वार्ता में कौन-कौन शामिल हुआ?

रविवार को होने वाली वार्ता स्विट्ज़रलैंड के बर्गेनस्टॉक शहर में आयोजित हुई। यह शहर ल्यूसेर्न झील के ऊपर स्थित है और यहां के एक लग्जरी होटल में बैठक संपन्न हुई। ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची शामिल हुए। तो वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी भी वार्ता में शरीक हुए।

'तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र' बनाने पर सहमति

ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में हुईं उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान ईरान एवं अमेरिका ने लेबनान में जारी संघर्ष से जुड़े मुद्दों के हल के लिए एक 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ (तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र) स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान एवं कतर की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि इस 'तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र’ में लेबनान की सरकार भी शामिल होगी और इसका उद्देश्य 'लेबनान में सैन्य अभियानों की समाप्ति के समझौते का पालन सुनिश्चित करना’ होगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला और इजराइल के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए पर्याप्त साबित होगी या नहीं। इजराइल का लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा है और उसका कहना है कि उन चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए जो उत्तरी इजराइल पर हमले करते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार तड़के स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कोशिशों से 'महत्वपूर्ण प्रगति’हासिल हुई है।

US Iran talk

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'लेबनान संघर्षविराम' पर प्रगति की उम्मीद-वेंस

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने लेबनान में संघर्षविराम उल्लंघनों का हवाला देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। शनिवार को वार्ता के लिए रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने कहा कि उन्हें 'परमाणु मुद्दे' और 'लेबनान संघर्षविराम' पर प्रगति की उम्मीद है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बगाई ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल समझौता ज्ञापन (MoU) में अमेरिका द्वारा किए गए वादों के क्रियान्वयन पर जोर देगा और यह स्पष्टता मांगेगा कि अमेरिका इन प्रतिबद्धताओं को किस प्रकार लागू करेगा।

बातचीत वाले एजेंडे में क्या है?

रविवार की वार्ता से पहले बगाई ने बताया कि बर्गेनस्टॉक में ईरान, अमेरिका, कतर और पाकिस्तान के बीच एक चतुष्पक्षीय बैठक होगी। उन्होंने कहा, 'जायोनी शासन (इजराइल) लेबनान में अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन जारी रखे हुए है। आज की वार्ता का मुख्य विषय यही रहेगा।' अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों तक तकनीकी स्तर की बातचीत होगी, जिसमें दोनों पक्ष शांति प्रक्रिया के अंतिम चरण पर चर्चा करेंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा लेबनान युद्ध जैसे प्रमुख विवादित मुद्दों का समाधान खोजने का प्रयास करेंगे। तेहरान से रिपोर्टिंग करते हुए अल जजीरा के रेसुल सेरदार अतास ने बताया कि गालिबाफ ने स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले कहा था कि ईरान का मुख्य उद्देश्य अमेरिका को यह याद दिलाना है कि पहले उसे MoU के प्रावधानों को लागू करना होगा या कम से कम उनके क्रियान्वयन की शुरुआत करनी होगी। तकनीकी वार्ताएं तभी आगे बढ़ेंगी जब अमेरिका ऐसा करने पर सहमत होगा।

इन मुद्दों पर जोर दे रहा ईरान

  • लेबनान में शत्रुता का पूर्ण अंत
  • अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हटाया जाना
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना
  • ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करना
  • तेल, पेट्रोकेमिकल और संबंधित क्षेत्रों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने चेतावनी दी कि तेहरान केवल कागजी समझौता स्वीकार नहीं करेगा और वाशिंगटन को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह लागू करना होगा।

बातचीत में लेबनान बड़ा मुद्दा

वार्ता के पहले दिन लेबनान में संघर्षविराम का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। शनिवार को संघर्षविराम की खबरों के बावजूद इजराइली बलों के हमले में लेबनान में दर्जनों लोग मारे गए। अल जजीरा के मोहम्मद वल्ल के अनुसार, ईरान का कहना है कि जब तक इजराइल समझौते का पालन नहीं करता, तब तक वह MoU के कार्यान्वयन में आगे नहीं बढ़ेगा। MoU की पहले प्वाइंट में अमेरिका और ईरान ने 'लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों के तत्काल और स्थायी अंत पर सहमति जताई है। समझौते में लेबनान की 'क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता' की रक्षा करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। हालांकि, दस्तावेज में इजराइल का सीधा उल्लेख नहीं है, जबकि वह अभी भी लेबनान के लगभग पांचवें हिस्से पर कब्जा किए हुए है और मार्च की शुरुआत से लगभग रोजाना हमले कर रहा है। इन हमलों में 4,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। ईरान का मानना है कि अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह इजराइल को समझौते का पालन करवाए।

JD vence

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ईरान का परमाणु कार्यक्रम

तकनीकी वार्ताओं के शुरू होते ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम चर्चा का एक प्रमुख विषय होगा। दशकों से चली आ रही दुश्मनी के बावजूद, ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। अमेरिका स्पष्ट कर चुका है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, न ही उसे उन्हें खरीदने, विकसित करने या ऐसी क्षमता हासिल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नागरिक उद्देश्यों के लिए है और यदि प्रतिबंध हटाए जाते हैं तो वह अपनी परमाणु गतिविधियों पर कुछ सीमाओं को लेकर बातचीत कर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का क्या होगा?

शनिवार को ईरान ने कहा कि लेबनान में इजराइली हमलों के जारी रहने के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है।हालांकि अमेरिकी सेना ने दावा किया कि जलमार्ग सभी जहाजों के लिए खुला हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि 20 जून तक जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। उसके अनुसार, 55 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से वहां से गुजरे, जिनके जरिए बड़ी मात्रा में सामान और 1.7 करोड़ बैरल से अधिक तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया गया। इसी दिन डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि संघर्षविराम की 60 दिन की अवधि के दौरान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

US Iran talk

US Iran talk

होर्मुज जलडमरूमध्य के वास्तविक बंद होने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया था और विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी के खतरे में डाल दिया था। अमेरिका में तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और उससे जीवनयापन की लागत पर पड़े असर को उन प्रमुख कारणों में माना जा रहा है, जिनकी वजह से ट्रंप ने युद्ध समाप्त करने का फैसला लिया।

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