मंगलवार 18 नवंबर को शीर्ष नक्सली लीडर माडवी हिडमा मारा गया। मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के मारेदुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों ने उसे और पांच अन्य उग्रवादियों को मार गिराया। हिडमा भारत के सबसे वांटेड माओवादी कमांडरों में से एक था। सुरक्षा बलों द्वारा सघन अभियानों के बीच हिडमा की मौत नक्सलियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कौन था माडवी हिडवा, सुरक्षाबलों पर उसने कैसे दिया था सबसे बड़े हमले को अंजाम और कैसे किया गया उसे ढेर, आइए इस पर करीब से नजर डालें।
माडवी हिडमा कौन था?
40 साल के माडवी हिडमा का जन्म छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एक सुदूर गांव पुवर्ती में हुआ था। नक्सली बनने से पहले उसने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। माना जाता है कि हिडमा का पहला गुरु रमेश पुडियामी उर्फ बदरन्ना था, जिसके साथ उसने दो साल तक काम किया था। मुरिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले हिडमा को बाद में एक प्लाटून का प्रभार दिया गया था। दुबला-पतला, पतली मूंछे रखने वाला हिडमा हमेशा अपने पास एके-47 रखता था। हिडमा माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन 1 का कमांडर था। वह कथित तौर पर भाकपा (माओवादी) की सबसे कम उम्र की केंद्रीय समिति का सदस्य (CCM) था, जो इसकी शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था है। हिडमा केंद्रीय समिति में बस्तर क्षेत्र का एकमात्र आदिवासी सदस्य था।
हिडमा के थे कई नाम
उसके कई नाम थे जैसे देवा, हिडमालू, संतोष और विलास। हिडमा को दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKZC) के सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया था, जो छत्तीसगढ़ में माओवादी अभियानों का नेतृत्व करती है। अधिकारियों का कहना है कि वह 130-150 सशस्त्र कैडरों की एक बटालियन का नेतृत्व करता था, जो विद्रोहियों के प्रभाव वाले जंगलों और गांवों के एक नेटवर्क के जरिए काम करती थी। उसके अनुशासन ने उसे रैंक में ऊपर उठने में मदद की। एक पूर्व माओवादी सुंदरी ने बताया कि हिडमा रोजाना सुबह 4 बजे उठता था और ताजा घटनाक्रम से अपडेट रहने के लिए समाचार पढ़ता था।
वह अपनी बटालियन के लिए शारीरिक प्रशिक्षण पर भी ध्यान देता था, जिसके लिए कुछ लोग उसे निर्दयी भी कहते थे। लेकिन हिडमा इरादों का पक्का था और उसने आगे बढ़कर नेतृत्व करके अपनी बटालियन का सम्मान अर्जित किया था। उनकी बटालियन दक्षिण बस्तर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में सक्रिय थी, जो माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों का केंद्र रहे हैं। उसने बस्तर संभाग में गुरिल्ला आंदोलनों का भी आयोजन किया और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अभियानों की देखरेख की थी। हिडमा की शादी डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) राजे उर्फ राजक्का से हुई थी। वह उसी बटालियन में शिक्षिका के रूप में काम करती थीं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, राजे कथित तौर पर लगभग हर बड़े माओवादी हमले में शामिल थी।
कई घातक हमलों के पीछे हिडमा का हाथ
हिडमा का नाम कम से कम 26 माओवादी हमलों में सामने आया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसने 2010 में दंतेवाड़ा में सबसे बड़े नरसंहार को अंजाम दिया था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 76 जवान शहीद हुए थे। हिडमा 2013 में हुए झीरम घाटी हमले में भी शामिल था, जिसमें छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेतृत्व का सफाया हो गया था। वह 2017 में सुकमा में हुए माओवादी हमले के पीछे भी था, जिसमें 27 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। 2021 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर के जंगलों में लगभग 400 उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें 22 जवान मारे गए थे। हिडमा कथित तौर पर इस हमले का मास्टरमाइंड था।
हिडमा वर्षों तक सुरक्षा बलों से कैसे बचता रहा?
हिडमा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की मोस्ट वांटेड सूची में था। उस पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था, और राज्य और केंद्रीय एजेंसियां उसकी तलाश में थीं। लेकिन वह सालों तक सुरक्षा बलों से बचता रहा। हिडमा पर नजर रखने वाले सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक, हिडमा तीन सुरक्षा घेरे में रहता था। वह ज्यादातर जंगलों के अंदर की सड़कों से बचता था और अपनी बटालियन की टुकड़ियों के साथ चलता था। जंगलों में कई साल बिताने के कारण हिडमा को इलाके और जनसांख्यिकी की पूरी जानकारी थी, जिससे उसे सुरक्षा बलों पर बढ़त मिलती रही।
हिडमा की सुरक्षा में शामिल पूर्व माओवादी सुंदरी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि हिडमा की सुरक्षा राज्य पुलिस प्रमुखों की सुरक्षा व्यवस्था से भी ज्यादा जटिल थी। उसकी सुरक्षा में तैनात कमांडो अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। उसकी सुरक्षा के बाहरी घेरे में तैनात माओवादी अक्सर सुरक्षा बलों को देख लेते थे, उन पर गोलीबारी करते थे और हिडमा को ऑपरेशन पर कड़ी नजर रखने और फिर उसे भागने देने में सफल रहते थे। हिडमा गांवों में जाने से बचता था और उसके मुखबिर सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने में उसकी मदद करते थे। सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के जंगलों में फोन नेटवर्क की कमी के कारण, सुरक्षा बलों को मानवीय खुफिया तंत्र पर निर्भर रहना पड़ता था, जो हमेशा से ही कुछ हद तक पुराना रहा है। वह ज्यादातर दंडकारण्य क्षेत्र में काम करता था, जहां ढलानें और भूलभुलैया जैसे जंगल हैं।
कैसे हुआ हिडमा ढेर?
छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश सीमा पर सुरक्षाबलों के संयुक्त अभियान में हिडमा और पांच अन्य नक्सलियों को ढेर कर दिया। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले में मंगलवार को सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली कमांडर माडवी हिडमा और उसकी पत्नी समेत छह माओवादी मारे गए। कई हमलों के सूत्रधार हिडमा की मौत को छत्तीसगढ़ पुलिस ने उग्रवाद के ताबूत में आखिरी कील करार दिया। अल्लूरी सीतारामराजू जिले के पुलिस अधीक्षक अमित बरदार ने बताया कि मुठभेड़ सुबह साढ़े छह से सात बजे के बीच मरेदुमिल्ली मंडल के जंगली इलाके में हुई। सुबह साढ़े छह से सात बजे के बीच मरेदुमिल्ली मंडल इलाके में माओवादियों और पुलिस दल के बीच गोलीबारी हुई। मुठभेड़ के दौरान छह माओवादी मारे गए। इस गोलीबारी में दो महिलाएं और चार पुरुष मारे गए। विश्वसनीय सूत्रों और जांच के आधार पर पुलिस ने पुष्टि की कि हिडमा, उसकी पत्नी मदकम राजे, देवे, लकमल (चैतू), मल्ला (मल्लालु) और कमलू (कमलेश) मारे गए। हिडमा के ढेर होने के साथ ही सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में हिडमा के आतंक का अंत हो गया।