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Samrat Chaudhary: बिहार के नए 'सम्राट'; 1990 में ली राजनीति में एंट्री, भाजपा ने 9 साल में ही दे दिया बड़ा तोहफा

Who is Samrat Chaudhary: करीब सात साल पहले भाजपा में शामिल हुए सम्राट (Samrat Chaudhary)का सियासी सफर कैसा रहा है, उनकी पढ़ाई कहां से हुई, और उनके परिवार में कौन-कौन है? साथ ही वे कितने अमीर हैं...

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सम्राट चौधरी बिहार के नए 'सम्राट'। फोटो- टाइम्स नाउ नव भारत
Authored by: Shiv Shukla
Updated Apr 14, 2026, 18:15 IST

Who is Samrat Chaudhary: बिहार की राजनीति में मंगलवार यानी 14 अप्रैल 2026 की तारीख इतिहास में दर्ज हो गई है। 10 बार सूबे के सीएम रहे नीतीश कुमार मे अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है। जिसके बाद भाजपा पहली बार बिहार में अपना सीएम बना रही है। यह भाजपा और बिहार दोनों के इतिहास में पहली बार होगा। नीतीश कुमार के इस्तीफे (Nitish Kumar Resignation) के बाद भाजपा विधायक दल में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है।पर्यवेक्षक के तौर पर मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उनके नाम का एलान किया। जिसके बाद यह तय हो गया है कि सम्राट चौधरी ही बिहार के नए सीएम हैं।अब वे कल 11 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के नए सीएम की शपथ ग्रहण करेंगे। ऐसे में यह जानना अहम है कि करीब सात साल पहले भाजपा में शामिल हुए सम्राट का सियासी सफर कैसा रहा है, उनकी पढ़ाई कहां से हुई, और उनके परिवार में कौन-कौन है? साथ ही वे कितने अमीर हैं...

इससे पहले राजभवन पहुंच कर 10 बार के सीएम रहे नीतीश कुमार ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा। इस दौरान उनके साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय चौधरी भी मौजूद रहे। इस्तीफा देने के बाद करीब छह मिनट तक दोनों की वार्ता के बाद नीतीश कुमार लोकभवन से बाहर निकले। नीतीश कुमार हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया।

बता दें कि 202 विधायकों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जदयू के 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19 और हिंदुस्तान आवामी मोर्चा के पांच विधायक शामिल हैं। इन दलों का नेतृत्व क्रमशः चिराग पासवान और जीतन राम मांझी करते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पांच विधायक भी गठबंधन का हिस्सा हैं, इस पार्टी के प्रमुख हैं उपेंद्र कुशवाहा।

1990 में किया राजनीति में प्रवेश ( Samrat Chaudhary Political Journey)

सम्राट चौधरी राज्य के सबसे चर्चित नेताओं में से एक हैं और हालिया वर्षों में बीजेपी में तेजी से उनका उभार हुआ है। सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर, 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ था। उनके पिता शकुनि चौधरी छह बार विधायक और सांसद रहे, जबकि उनकी मां पार्वती देवी तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थीं। सम्राट चौधरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही पूरी की और बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। मई 1999 में राबड़ी देवी की सरकार के दौरान वे बिहार के कृषि मंत्री बने। वे 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2010 में वे बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक बने।

नीतीश के नजदीक होने का एक कारण यह भी ( Samrat Chaudhary Caste)

कुशवाहा जाति से ताल्लुक होने के कारण सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के करीब माना जाता है। जहां लालू प्रसाद यादव की राजनीति परंपरागत रूप से यादव वोट बैंक के इर्द-गिर्द रही है, वहीं नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत ‘लव-कुश’ यानी कुर्मी-कोइरी समीकरण के साथ की थी। नीतीश खुद कुर्मी समुदाय से आते हैं, जबकि सम्राट चौधरी कोइरी (कुशवाहा) समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हालांकि एक समय ऐसा भी था जब महागठबंधन की सरकार के दौरान सम्राट चौधरी, नीतीश कुमार के कट्टर विरोधियों में गिने जाते थे। उन्होंने नीतीश के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी। लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद जब भाजपा फिर सत्ता में लौटी, तो समीकरण बदल गए और सम्राट चौधरी नीतीश के करीबी सहयोगी बन गए। इसके बाद बिहार की राजनीति में ‘लव-कुश’ संतुलन एक बार फिर मजबूत दिखने लगा। यही वजह है कि भाजपा के भीतर भी नीतीश कुमार के लिए सम्राट चौधरी को संभावित मुख्यमंत्री चेहरा माना जाता है।

सुशील मोदी दिल्ली गए तो बिहार में सम्राट की बढ़ी सक्रियता

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय जनता दल के साथ बिताया और राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री भी रहे। यानी उनकी शुरुआती राजनीतिक पहचान लालू यादव की पार्टी से ही जुड़ी रही। हालांकि 2018 में भाजपा में शामिल होने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा। 2020 के चुनावों के बाद जब सुशील कुमार मोदी को बिहार से हटाकर दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई, तो सम्राट चौधरी के लिए पार्टी में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वे बिहार भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

इससे पहले 2019 में, जब नित्यानंद राय बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब सम्राट चौधरी को उनका डिप्टी बनाया गया था, जो उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत था।

आरजेडी में कराया विभाजन,बीजेपी में हुए शामिल

मूल रूप से आरजेडी और जेडी(यू) से जुड़े सम्राट चौधरी ने 2014 में आरजेडी में विभाजन की योजना बनाई थी, 13 विधायकों को तोड़कर एक अलग गुट बनाया और फिर भाजपा में शामिल हो गए। 2 जून 2014 को वे जीतन राम मांझी मंत्रिमंडल में शहरी विकास एवं आवास मंत्री बने। उन्होंने 1999 में माप-विज्ञान और बागवानी मंत्री के रूप में भी कार्य किया था। मार्च 2023 में, सम्राट चौधरी को संजय जायसवाल की जगह भाजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्हें पार्टी के ओबीसी आधार, खासकर कोइरी/कुशवाहा जाति के बीच जनाधार को मजबूत करने के लिए चुना गया था।

नीतीश कुमार के विरोध में पहनी पगड़ी

अपने कार्यकाल के दौरान सम्राट चौधरी ने कथित पक्षपात और सरकारी नीतियों के लिए नीतीश कुमार की खुलकर आलोचना की। उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की शपथ के रूप में प्रतीकात्मक रूप से पगड़ी भी पहनी। जुलाई 2024 में नीतीश कुमार के भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जुड़ने के बाद उन्होंने पगड़ी उतार दी। जुलाई 2024 में उन्हें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। जनवरी 2024 में सम्राट चौधरी भाजपा विधायक दल के नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री बने। उन्हें वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे प्रमुख विभाग दिए गए।

सम्राट चौधरी अक्सर लोगों की नजरों में रहे हैं। 2023 में उन्होंने राहुल गांधी की दाढ़ी की तुलना ओसामा बिन लादेन से की थी। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी ओसामा बिन लादेन जैसी दाढ़ी रखते हैं और सोचते हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे बन जाएंगे।

कितनी है नेटवर्थ? (Samrat Chaudhary Net Worth)

सम्राट चौधरी मुंगेर की तारापुर सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा आए थे। नॉमिनेशन फाइल करते समय दाखिल किए गए हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति का खुलासा किया था। इसके आधार पर उनकी नेटवर्थ करीब 11.34 करोड़ रुपये से ज्यादा है। उनके और उनके परिवार के पास कुल 1,71,550 रुपये की नकदी, जबकि अलग-अलग बैंक अकाउंटमें करीब 27 लाख रुपये जमा हैं। इसके अलावा पति-पत्नी के पास करीब 40 लाख रुपये कीमत का सोना है। शेयर, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड में उन्होंने करीब 32 लाख रुपये, जबकि इंश्योरेंस पॉलिसी में 10 लाख रुपये लगाए हैं। सम्राट चौधरी के पीपीएफ खाते में भी 10 लाख रुपये जमा है। उनके ऊपर किसी भी प्रकार की कोई देनदारी नहीं है। सम्राट चौधरी के नाम पर एक बोलेरो नियो कार है, जिसकी कीमत 7 लाख रुपये के आसपास है। अचल संपत्ति पर नजर डालें, तो सम्राट चौधरी के पास मुंगेर के तारापुर, मानिकपुर और खजपुरा में 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की खेती और गैर-खेती योग्य जमीन है। पत्नी के नाम पर 50 लाख रुपये की खेती की जमीन है और पटना में 58 लाख रुपये कीमत की कॉमर्शियल बिल्डिंग भी है।

परिवार में कौन कौन है? (Samrat Chaudhary Family)

सम्राट चौधरी की शादी 2007 में ममता कुमारी से हुई थी। दोनों का एक बेटा और एक बेटी है। बेटे का नाम प्रणय चौधरी तो बेटी का नाम चारू प्रिया है। इसके अलावा, उनके कुल पांच भाई-बहन हैं।

सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन

  • 1999 – बिहार सरकार में कृषि मंत्री बने
  • 2000 – राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए
  • 2010 – परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से दोबारा विधायक चुने गए
  • 2010 – बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बने
  • 2014 – तत्कालीन राज्यपाल डी. वाई. पाटिल द्वारा बिहार विधान परिषद के सदस्य मनोनीत किए गए
  • 2014 – जीतन राम मांझी सरकार में शहरी विकास एवं आवास मंत्री बने
  • 2018 – भारतीय जनता पार्टी की बिहार इकाई के उपाध्यक्ष नियुक्त हुए
  • 2020 – बिहार विधान परिषद के सदस्य चुने गए
  • 2021 – नीतीश कुमार सरकार में पंचायती राज मंत्री बने
  • 2022 – बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता बने
  • 2023 – भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष बने
  • 2024 – भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए
  • 2024 – बिहार के उपमुख्यमंत्री बने
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