Who is Ahmad Vahidi: ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) यानी आरआईजीसी (IRGC) ने कथित तौर पर देश की कूटनीतिक और सैन्य व्यवस्था पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। इसके प्रमुख अहमद वाहिदी (Ahmad Vahidi) इस समय इस्लामिक रिपब्लिक के सबसे ताकतवर व्यक्ति के रूप में उभरकर सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार न्यूयॉर्क पोस्ट और इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (Institute for the Study of War) का कहना है कि ईरान की सैन्य व्यवस्था अब पूरी तरह वाहिदी के नियंत्रण में है और वही अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को भी संभाल रहे हैं। अमहद वाहिदी कौन हैं और कैसे बने इतने ताकतवर, जानिए विस्तार से।
कौन हैं अहमद वाहिदी?
अहमद वाहिदी (Ahmad Vahidi) का जन्म 27 जून 1958 को शिराज (Shiraz) में हुआ था। उनका वास्तविक नाम वहीद शाहचेराघी है। वह IRGC के कट्टरपंथी कमांडर माने जाते हैं और पहले इस बल के डिप्टी-कमांडर रह चुके हैं। अपने पूर्ववर्ती मोहम्मद पाकपुर की हत्या के बाद उन्हें IRGC का प्रमुख नियुक्त किया गया था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में स्नातक, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में परास्नातक और इमाम सादेघ यूनिवर्सिटी से स्ट्रैटेजिक स्टडीज में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। वह 2021 से 2024 तक ईरान के गृह मंत्री भी रह चुके हैं और वर्तमान में एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल के सदस्य हैं। वाहिदी अपने कट्टर रुख के लिए जाने जाते हैं, जो तेहरान की आयतुल्लाह व्यवस्था के अनुरूप है, और उन्होंने हिजाब नियमों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं के खिलाफ सख्त सजा की चेतावनी भी दी है। उन पर अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ ने आतंकवाद और परमाणु प्रसार में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा 1994 में अमिया बॉम्बिग (AMIA bombing) मामले में अर्जेंटीना की एक अदालत ने उन पर आरोप तय किए थे।
गालिबफ की दो टूक
मोज्तबा खामेनेई दे रहे मौन समर्थन
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ( Mojtaba Khamenei) IRGC के बढ़ते प्रभाव को मौन समर्थन दे रहे हैं, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) समेत कई शीर्ष नेता फैसला लेने की ताकत खो चुके हैं। इस कथित सत्ता परिवर्तन का सबसे खतरनाक असर होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz) में देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अराघची इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोलने के पक्ष में थे, लेकिन IRGC ने उनका फैसला पलट दिया। वाहिदी के आदेश पर IRGC नौसेना के तेज हमला करने वाले जहाजों और गनबोट्स ने होर्मुज को अवरुद्ध कर दिया और पिछले 48 घंटों में कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया गया। समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार इस रूट से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लगभग पूरी तरह रुक गई है और सिर्फ ईरानी जहाज ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, वह भी अमेरिकी नाकाबंदी से बचते हुए।
IRGC के करीबी मोहम्मद बाघेर जोलगदर
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल कट्टरपंथी नेता मोहम्मद बाघेर जोलगदर ( Mohammad Bagher Zolghadr) IRGC के करीबी हैं और उन्होंने विदेश मंत्री अराघची पर कूटनीति में नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। इसके बाद वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया, जिससे संकेत मिलता है कि वाहिदी मध्यमार्गी आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। बताया गया है कि वाहिदी ने इस्लामाबाद में वार्ता के पहले दौर के लिए जोलगदर को टीम में शामिल करने का समर्थन किया था, लेकिन संसद अध्यक्ष मो, बघेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) और अराघची ने उनके कूटनीतिक अनुभव की कमी का हवाला देते हुए इसका विरोध किया। विशेषज्ञों का मानना है कि जोलगदर को IRGC की ओर से वार्ता की निगरानी के लिए भेजा गया था और बाद में उन्होंने शिकायत की कि अराघची ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया और प्रतिरोध के मुद्दे पर नरम रुख अपनाया। इसके बाद IRGC ने कूटनीतिक वार्ता में हस्तक्षेप किया और शीर्ष नेतृत्व ने पूरी वार्ता टीम को वापस बुला लिया।
क्यों खतरे में पड़ी अमेरिका-ईरान वार्ता?
इसी बीच, ईरान ने यह भी कहा है कि वह अमेरिका के साथ नई वार्ता के लिए इस्लामाबाद में प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजेगा, क्योंकि अमेरिकी सेना ने एक ईरानी कंटेनर जहाज को जब्त कर लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई (Esmaeil Baghaei) ने वॉशिंगटन पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया और कहा कि 13 अप्रैल से होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरानी जहाज की जब्ती अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्ट्डी ऑफ वॉर के अनुसार IRGC के हस्तक्षेप ने अमेरिका के साथ सार्थक बातचीत की संभावना लगभग समाप्त कर दी है। IRGC से जुड़े मीडिया ने भी संकेत दिया कि ईरान ने अमेरिका की अत्यधिक मांगों का हवाला देते हुए अगले दौर की वार्ता को खारिज कर दिया है। मंगलवार की समय सीमा नजदीक आने और युद्धविराम के कमजोर पड़ने के बीच इस बात की आशंका बढ़ गई है कि जैसे ही यह नाजुक समझौता समाप्त होगा, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की दूसरी लहर शुरू हो सकती है।
